अबकी बार, रुपया 70.50 के पार...
Wednesday - August 29, 2018 4:06 pm ,
Category : WTN HINDI
डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट जारी, तैयार रहें महंगाई के लिए
AUG 29 (WTN) – आप तैयार रहें महंगाई के लिए। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा बाज़ार में ट्रेडिंग के दौरान रुपया पहली बार 70.50 के स्तर को पार कर गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपया में 42 पैसे की बड़ी गिरावट आई और यह 70.52 के स्तर पर फिसल गया। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 22 पैसे की कमजोरी के साथ 70.32 के स्तर पर खुला था।
डॉलर के मुकाबले रुपये मे गिरावट के देखते हुए बाज़ार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, कल यानि की मंगलवार को कारोबार के दौरान रुपये में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी। रुपया कल 6 पैसे की बढ़त के साथ 70.10 के स्तर पर बंद हुआ था। लेकिन, आज एक बार फिर से रुपये में गिरावट देखी गई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपया अभी तक के सबसे निचले स्तर पर 16 अगस्त को 70.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था। गौरतलब है कि डॉलर के लगातार मज़बूत होने से रुपया कमज़ोर हो रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में पिछले कुछ दिनों से तेज़ी देखी जा रही है। हालांकि, मंगलवार को क्रूड की कीमतों में कमज़ोरी देखने को मिली थी।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होता चला जा रहा है, इससे पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की क़ीमत देश के लोग चुका ही रहे हैं। डॉलर मज़बूत होने से तेल आयात करने के लिए तेल कम्पनियों को ज़्यादा ख़र्च करना पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत के क़रीब क्रूड आयात करता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि खाने-पीने की वस्तुओं और दूसरे ज़रूरी सामान के परिवहन के लिए डीज़ल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में यदि डीज़ल महंगा होगा तो इन सारी ज़रूरी वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे।
रुपए के मुकाबले डॉलर के मज़बूत होने का सबसे ज़्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कम्पनियों की ज़्यादा कमाई निर्यात पर आधारित है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कम्पनियों के साथ-साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली दवा कम्पनियों को भी काफ़ी फायदा होगा। इसके अलावा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इण्डिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेज़ी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कम्पनियां डॉलर में ईंधन बेंचती हैं।
AUG 29 (WTN) – आप तैयार रहें महंगाई के लिए। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा बाज़ार में ट्रेडिंग के दौरान रुपया पहली बार 70.50 के स्तर को पार कर गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपया में 42 पैसे की बड़ी गिरावट आई और यह 70.52 के स्तर पर फिसल गया। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 22 पैसे की कमजोरी के साथ 70.32 के स्तर पर खुला था।
डॉलर के मुकाबले रुपये मे गिरावट के देखते हुए बाज़ार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, कल यानि की मंगलवार को कारोबार के दौरान रुपये में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी। रुपया कल 6 पैसे की बढ़त के साथ 70.10 के स्तर पर बंद हुआ था। लेकिन, आज एक बार फिर से रुपये में गिरावट देखी गई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपया अभी तक के सबसे निचले स्तर पर 16 अगस्त को 70.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था। गौरतलब है कि डॉलर के लगातार मज़बूत होने से रुपया कमज़ोर हो रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में पिछले कुछ दिनों से तेज़ी देखी जा रही है। हालांकि, मंगलवार को क्रूड की कीमतों में कमज़ोरी देखने को मिली थी।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होता चला जा रहा है, इससे पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की क़ीमत देश के लोग चुका ही रहे हैं। डॉलर मज़बूत होने से तेल आयात करने के लिए तेल कम्पनियों को ज़्यादा ख़र्च करना पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत के क़रीब क्रूड आयात करता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि खाने-पीने की वस्तुओं और दूसरे ज़रूरी सामान के परिवहन के लिए डीज़ल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में यदि डीज़ल महंगा होगा तो इन सारी ज़रूरी वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे।
रुपए के मुकाबले डॉलर के मज़बूत होने का सबसे ज़्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कम्पनियों की ज़्यादा कमाई निर्यात पर आधारित है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कम्पनियों के साथ-साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली दवा कम्पनियों को भी काफ़ी फायदा होगा। इसके अलावा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इण्डिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेज़ी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कम्पनियां डॉलर में ईंधन बेंचती हैं।