भाजपा के दिग्गजों को ‘घेरने’ की कांग्रेस की रणनीति
Thursday - August 30, 2018 12:25 pm ,
Category : WTN HINDI
भाजपा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, कांग्रेस ने की ‘घर’ में ‘घेरने’ की तैयारी
AUG 30 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी ‘रणनीति’ पर काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के ज़रिये जनता से ‘सीधे सम्वाद’ करने की कोशिश कर रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अब अपनी ‘रणनीति’ के तहत भाजपा के दिग्गजों को अनके ‘घर’ में घेरने की तैयारी में हैं।
राजनीति के माहिर खिलाड़ी कमलनाथ ने भाजपा के दिग्गजों को उनके ही ‘गढ़’ में घेरने की ‘रणनीति’ बनाई है। लोकसभा के सबसे अनुभवी सांसदों में एक कमलनाथ ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया को अनके ही क्षेत्र में ‘घेरने’ की रणनीति बनाई है।
सबसे पहले कमलनाथ दो सितम्बर को विदिशा जिले के गंज बासौदा तहसील में एक जनसभा को सम्बोधित करेंगे। गंज बासौदा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है। 1991 में जब वे सांसद बने थे तभी से गंज बासौदा में उन्होंने काफ़ी राजनीति की है। अभी हाल ही में शिवराज सिंह चौहान के ‘क़रीबी’ कहे जाने वाले डॉ राकेश जादौन को विदिशा ज़िला भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है जो कि गंज बासौदा से ही आते हैं
गंज बासौदा में सभा करने की पीछे कमलनाथ की मंशा हो सकती है कि वे यहां की जनता से सीधे सम्वाद करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विकास के दावों पर ‘सवाल’ खड़े किए जाएं। गंज बासौदा के वर्तमान विधायक कांग्रेस के निशंक जैन हैं, ऐसे में कमलनाथ की जनसभा की पूरी जोर शोर से तैयारियां चल रही हैं।
2 सितम्बर को गंज बासौदा में कमलनाथ की जनसभा के बाद 17 सितम्बर को राहुल गांधी विदिशा में एक जनसभा करेंगे। विदिशा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ‘गढ़’ कहा जाता है। 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा संसदीय सीट से ही जीत हासिल की थी। इसके बाद 2009 और 2014 में यहां से सुषमा स्वराज ने जीत हासिल की है।
विदिशा सीट को भाजपा की ‘परम्परागत सीट’ कहा जाता है। 1989 से लगातार यहां से भाजपा जीत हासिल कर रही है। कमलनाथ यहां पर राहुल गांधी की सभा कराकर सुषमा स्वराज और शिवराज सिंह चौहान, दोनों को ही घेरने की रणनीति बना रहे हैं। राहुल गांधी यहां पर विकास के मुद्दे पर राज्य और केन्द्र सरकार को घेर सकते हैं। क्योंकि कुछ दिनों पहले आई एक रिपोर्ट में विदिशा ज़िले को देश के ‘सबसे पिछड़े’ ज़िलों में शामिल किया गया था जिसके बाद राज्य सरकारी की काफ़ी ‘आलोचना’ हुई थी।
कमलनाथ विदिशा के बाद दमोह में भी जनसभा करेंगे। दमोह वित्त मंत्री जयंत मलैया का ‘गढ़’ माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में जयंत मलैया काफ़ी ‘कम अंतर’ से जीते थे, ऐसे में कमलनाथ दमोह वासियों से सीधे सम्वाद करके विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पक्ष में ‘माहौल’ बनाने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस ने इस बार भाजपा के दिग्गजों को उनके ही गढ़ में घेरने की ‘योजना’ बनाई है, ताकि दिग्गजों को उनके घर में ही ‘व्यस्त‘ रखा जाए। विदिशा और दमोह के बाद कई अन्य जगहों पर कांग्रेस भाजपा के कद्दावर नेताओं को ‘घेरने’ की कोशिश में है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी ‘सफल’ हो पाती है। लगातार 15 सालों से मध्य प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा को ‘सत्ताविरोधी’ लहर का सामना करना पड़ेगा, ऐसे में यदि कांग्रेस की दिग्गजों को घेरने की रणनीति काम कर गई, तो 2018 के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए ‘बड़ी चुनौती’ से कम नहीं हैं।
AUG 30 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी ‘रणनीति’ पर काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के ज़रिये जनता से ‘सीधे सम्वाद’ करने की कोशिश कर रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अब अपनी ‘रणनीति’ के तहत भाजपा के दिग्गजों को अनके ‘घर’ में घेरने की तैयारी में हैं।
राजनीति के माहिर खिलाड़ी कमलनाथ ने भाजपा के दिग्गजों को उनके ही ‘गढ़’ में घेरने की ‘रणनीति’ बनाई है। लोकसभा के सबसे अनुभवी सांसदों में एक कमलनाथ ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया को अनके ही क्षेत्र में ‘घेरने’ की रणनीति बनाई है।
सबसे पहले कमलनाथ दो सितम्बर को विदिशा जिले के गंज बासौदा तहसील में एक जनसभा को सम्बोधित करेंगे। गंज बासौदा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है। 1991 में जब वे सांसद बने थे तभी से गंज बासौदा में उन्होंने काफ़ी राजनीति की है। अभी हाल ही में शिवराज सिंह चौहान के ‘क़रीबी’ कहे जाने वाले डॉ राकेश जादौन को विदिशा ज़िला भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है जो कि गंज बासौदा से ही आते हैं
गंज बासौदा में सभा करने की पीछे कमलनाथ की मंशा हो सकती है कि वे यहां की जनता से सीधे सम्वाद करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विकास के दावों पर ‘सवाल’ खड़े किए जाएं। गंज बासौदा के वर्तमान विधायक कांग्रेस के निशंक जैन हैं, ऐसे में कमलनाथ की जनसभा की पूरी जोर शोर से तैयारियां चल रही हैं।
2 सितम्बर को गंज बासौदा में कमलनाथ की जनसभा के बाद 17 सितम्बर को राहुल गांधी विदिशा में एक जनसभा करेंगे। विदिशा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ‘गढ़’ कहा जाता है। 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा संसदीय सीट से ही जीत हासिल की थी। इसके बाद 2009 और 2014 में यहां से सुषमा स्वराज ने जीत हासिल की है।
विदिशा सीट को भाजपा की ‘परम्परागत सीट’ कहा जाता है। 1989 से लगातार यहां से भाजपा जीत हासिल कर रही है। कमलनाथ यहां पर राहुल गांधी की सभा कराकर सुषमा स्वराज और शिवराज सिंह चौहान, दोनों को ही घेरने की रणनीति बना रहे हैं। राहुल गांधी यहां पर विकास के मुद्दे पर राज्य और केन्द्र सरकार को घेर सकते हैं। क्योंकि कुछ दिनों पहले आई एक रिपोर्ट में विदिशा ज़िले को देश के ‘सबसे पिछड़े’ ज़िलों में शामिल किया गया था जिसके बाद राज्य सरकारी की काफ़ी ‘आलोचना’ हुई थी।
कमलनाथ विदिशा के बाद दमोह में भी जनसभा करेंगे। दमोह वित्त मंत्री जयंत मलैया का ‘गढ़’ माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में जयंत मलैया काफ़ी ‘कम अंतर’ से जीते थे, ऐसे में कमलनाथ दमोह वासियों से सीधे सम्वाद करके विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पक्ष में ‘माहौल’ बनाने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस ने इस बार भाजपा के दिग्गजों को उनके ही गढ़ में घेरने की ‘योजना’ बनाई है, ताकि दिग्गजों को उनके घर में ही ‘व्यस्त‘ रखा जाए। विदिशा और दमोह के बाद कई अन्य जगहों पर कांग्रेस भाजपा के कद्दावर नेताओं को ‘घेरने’ की कोशिश में है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी ‘सफल’ हो पाती है। लगातार 15 सालों से मध्य प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा को ‘सत्ताविरोधी’ लहर का सामना करना पड़ेगा, ऐसे में यदि कांग्रेस की दिग्गजों को घेरने की रणनीति काम कर गई, तो 2018 के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए ‘बड़ी चुनौती’ से कम नहीं हैं।