मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सड़कों पर ‘सियासत’
Friday - August 31, 2018 2:34 pm ,
Category : WTN HINDI
ख़राब सड़कों को लेकर कमलनाथ ने कसा शिवराज सिंह चौहान पर ‘तंज’
AUG 31 (WTN) – मध्य प्रदेश की सड़कें आजकल परिवहन के काम कम और ‘राजनीति’ के काम ज़्यादा आ रही हैं। आपको याद होगा कि कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका के दौरे से लौटने के बाद बयान दिया था कि मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने इस पर काफी ‘निशाना’ साधा था। कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश की सड़कें भाजपा के शासनकाल में ‘बदतर’ हालात में हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ख़राब सड़कों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में मध्य प्रदेश पहले तीन राज्यों में शामिल है। इस मामले में पहले स्थान पर यूपी और दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है। चुनावी साल में राजनीति का मौका हाथ में देखकर अब एक बार फिर से मध्य प्रदेश की ‘खराब सड़कों’ को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर ‘तंज’ कसा है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने एक ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए लिखा है, “सड़कों में गड्ढों के कारण होने वाली मौतों में MP देश के टॉप 3 राज्यों में। इससे पहले भी 2015 में सड़क परिवहन मंत्रालय की राज्यसभा में पेश रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन हमारे शिवराज जी पता नहीं कब, प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों को अमेरिका से अच्छी बताने की रट छोड़ेंगे।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने ख़राब सड़कों के कारण हो रही दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को काफी ‘गम्भीरता’ से लिया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2013 से लेकर 2017 तक, मध्य प्रदेश में कुल 1,385 लोगों की मौत सड़कों में गढ्ढों के कारण हुई थी। इस पर ‘सख्ती’ दिखाते हुए कमेटी ने चार सितम्बर को पीडब्ल्यूडी, परिवहन और नगरीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिवों को दिल्ली तलब किया है।
दिल्ली में मध्य प्रदेश के यह अधिकारी अब सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के सामने पेश होंगे और सड़कों की खस्ता हालत के बारे में ‘अपना पक्ष’ रखेंगे। इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत से लेकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए क्या प्रयास हो सकते हैं, इस बारे में अपना प्रजेंटेशन देंगे।
मध्य प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक दल एक दूसरे पर ‘निशाना’ साधने में पीछे नहीं हैं। विधानसभा चुनाव में सड़कों का मुद्दा काफी छाया रहने वाला है। कहा जाता है कि ‘ख़राब सड़कों’ के मुद्दे पर ही 2003 में कांग्रेस चुनाव हारी थी, अब कांग्रेस ख़राब सड़कों को मुद्दा बनाकर भाजपा पर ‘पलटवार’ कर रही है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस की तुलना में उसके शासन में सड़कें काफी ‘बेहतर’ हैं। अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश की जनता किसकी बात पर ‘विश्वास’ करती है।
AUG 31 (WTN) – मध्य प्रदेश की सड़कें आजकल परिवहन के काम कम और ‘राजनीति’ के काम ज़्यादा आ रही हैं। आपको याद होगा कि कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका के दौरे से लौटने के बाद बयान दिया था कि मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने इस पर काफी ‘निशाना’ साधा था। कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश की सड़कें भाजपा के शासनकाल में ‘बदतर’ हालात में हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ख़राब सड़कों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में मध्य प्रदेश पहले तीन राज्यों में शामिल है। इस मामले में पहले स्थान पर यूपी और दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है। चुनावी साल में राजनीति का मौका हाथ में देखकर अब एक बार फिर से मध्य प्रदेश की ‘खराब सड़कों’ को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर ‘तंज’ कसा है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने एक ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए लिखा है, “सड़कों में गड्ढों के कारण होने वाली मौतों में MP देश के टॉप 3 राज्यों में। इससे पहले भी 2015 में सड़क परिवहन मंत्रालय की राज्यसभा में पेश रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन हमारे शिवराज जी पता नहीं कब, प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों को अमेरिका से अच्छी बताने की रट छोड़ेंगे।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने ख़राब सड़कों के कारण हो रही दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को काफी ‘गम्भीरता’ से लिया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2013 से लेकर 2017 तक, मध्य प्रदेश में कुल 1,385 लोगों की मौत सड़कों में गढ्ढों के कारण हुई थी। इस पर ‘सख्ती’ दिखाते हुए कमेटी ने चार सितम्बर को पीडब्ल्यूडी, परिवहन और नगरीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिवों को दिल्ली तलब किया है।
दिल्ली में मध्य प्रदेश के यह अधिकारी अब सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के सामने पेश होंगे और सड़कों की खस्ता हालत के बारे में ‘अपना पक्ष’ रखेंगे। इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत से लेकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए क्या प्रयास हो सकते हैं, इस बारे में अपना प्रजेंटेशन देंगे।
मध्य प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक दल एक दूसरे पर ‘निशाना’ साधने में पीछे नहीं हैं। विधानसभा चुनाव में सड़कों का मुद्दा काफी छाया रहने वाला है। कहा जाता है कि ‘ख़राब सड़कों’ के मुद्दे पर ही 2003 में कांग्रेस चुनाव हारी थी, अब कांग्रेस ख़राब सड़कों को मुद्दा बनाकर भाजपा पर ‘पलटवार’ कर रही है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस की तुलना में उसके शासन में सड़कें काफी ‘बेहतर’ हैं। अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश की जनता किसकी बात पर ‘विश्वास’ करती है।