मध्य प्रदेश में लिवइन रिलेशन वालों को मिली बड़ी राहत, ब्लैकमेलिंग से मिलेगा छुटकारा
Saturday - September 1, 2018 11:44 am ,
Category : WTN HINDI
आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज नहीं होंगे लिवइन के दौरान सम्बन्ध बनाने वाले केस
SEP 01 (WTN) – विदेशी संस्कृति इन दिनों भारत में धीरे-धीरे लोगों को पसंद आ रही है। टूटती शादियां और ज़िम्मेदारी से बचने के लिए युवा आजकल लिवइन रिलेशन को पसंद करने लगे हैं। मेट्रो सिटीज के बाद मध्य प्रदेश के इन्दौर और भोपाल जैसे शहरों में भी लिवइन रिलेशन में युवा रहने लगे हैं। लिवइन रिलेशन में शारीरिक सम्बन्ध बनना स्वाभाविक है। लेकिन कई बार देखा गया है कि आपसी सहमति के बाद बनने वाले शारीरिक सम्बन्धों के बाद दुष्कर्म का केस कर दिया जाता है। ऐसे में लिवइन रिलेशन के सम्बन्ध में मध्य प्रदेश में अब आईपीसी में नई धारा का प्रावधान किया गया है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शादी का झांसा और लिवइन के दौरान सम्बन्ध बनाने और बाद में शादी नहीं करने के मामलों में अब दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज नहीं होगा। इसके लिए आईपीसी में अब नई धारा 493(क) शामिल की गई है। अब इससे सम्बन्धित मामले इसी धारा में दर्ज होंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने या लिवइन में रहने वाले केस में पुलिस अभी तक आईपीसी की धारा 376 में प्रकरण दर्ज करती थी और यह एक गैरजमानती धारा है। जानकारी के लिए बता दें कि धारा 376 केस की सुनवाई सेशन कोर्ट में चलती है।
लेकिन अब इस तरह के अपराध को जमानती अपराध माना जाएगा और ट्रायल भी सेशन कोर्ट के बजाय जेएमएफसी कोर्ट में होगा। एक तरफ़ दुष्कर्म की धारा में जहां अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है, तो वहीं इस धारा में अपराध साबित होने पर अधिकतम सज़ा सिर्फ तीन साल की मिलेगी, इसके साथ ही जुर्माना भी लगेगा।
आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में साल 2017 में दुष्कर्म के 5,310 केस दर्ज हुए थे। देखा गया है कि दुष्कर्म की धारा में दर्ज होने वाले क़रीब 20 से 25 प्रतिशत केस ऐसे मामलों के होते हैं, जिसमें शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगता है, जबकि इस तरह के केस में ज़्यादातर शारीरिक सम्बन्धों में आपसी सहमति ही होती है।
आईपीसी में नई धारा शामिल होने से ऐसे मामलों में रोक लगाने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि इस नई धारा के आईपीसी में शामिल होने के बाद दुष्कर्म के झूठे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही इसका फायदा लिवइन में रहने वालों को भी मिलेगा। देखा गया है कि कई बार झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाकर ब्लैकमेलिंग की घटनाएं भी सामने आईं थीं।
सरकार के इस कदम की सराहना करनी होगी। क्योंकि कई बार देखा गया है कि लिवइन के मामलों में आपसी सहमति के बाद शारीरिक सम्बन्ध होने के बाद भी दुष्कर्म का आरोप लगा दिया जाता है। ऐसे में अब नई धारा के तहत केस दर्ज होने से दुष्कर्म के झूठे आरोप से मुक्ति मिलेगी।
SEP 01 (WTN) – विदेशी संस्कृति इन दिनों भारत में धीरे-धीरे लोगों को पसंद आ रही है। टूटती शादियां और ज़िम्मेदारी से बचने के लिए युवा आजकल लिवइन रिलेशन को पसंद करने लगे हैं। मेट्रो सिटीज के बाद मध्य प्रदेश के इन्दौर और भोपाल जैसे शहरों में भी लिवइन रिलेशन में युवा रहने लगे हैं। लिवइन रिलेशन में शारीरिक सम्बन्ध बनना स्वाभाविक है। लेकिन कई बार देखा गया है कि आपसी सहमति के बाद बनने वाले शारीरिक सम्बन्धों के बाद दुष्कर्म का केस कर दिया जाता है। ऐसे में लिवइन रिलेशन के सम्बन्ध में मध्य प्रदेश में अब आईपीसी में नई धारा का प्रावधान किया गया है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शादी का झांसा और लिवइन के दौरान सम्बन्ध बनाने और बाद में शादी नहीं करने के मामलों में अब दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज नहीं होगा। इसके लिए आईपीसी में अब नई धारा 493(क) शामिल की गई है। अब इससे सम्बन्धित मामले इसी धारा में दर्ज होंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने या लिवइन में रहने वाले केस में पुलिस अभी तक आईपीसी की धारा 376 में प्रकरण दर्ज करती थी और यह एक गैरजमानती धारा है। जानकारी के लिए बता दें कि धारा 376 केस की सुनवाई सेशन कोर्ट में चलती है।
लेकिन अब इस तरह के अपराध को जमानती अपराध माना जाएगा और ट्रायल भी सेशन कोर्ट के बजाय जेएमएफसी कोर्ट में होगा। एक तरफ़ दुष्कर्म की धारा में जहां अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है, तो वहीं इस धारा में अपराध साबित होने पर अधिकतम सज़ा सिर्फ तीन साल की मिलेगी, इसके साथ ही जुर्माना भी लगेगा।
आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में साल 2017 में दुष्कर्म के 5,310 केस दर्ज हुए थे। देखा गया है कि दुष्कर्म की धारा में दर्ज होने वाले क़रीब 20 से 25 प्रतिशत केस ऐसे मामलों के होते हैं, जिसमें शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगता है, जबकि इस तरह के केस में ज़्यादातर शारीरिक सम्बन्धों में आपसी सहमति ही होती है।
आईपीसी में नई धारा शामिल होने से ऐसे मामलों में रोक लगाने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि इस नई धारा के आईपीसी में शामिल होने के बाद दुष्कर्म के झूठे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही इसका फायदा लिवइन में रहने वालों को भी मिलेगा। देखा गया है कि कई बार झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाकर ब्लैकमेलिंग की घटनाएं भी सामने आईं थीं।
सरकार के इस कदम की सराहना करनी होगी। क्योंकि कई बार देखा गया है कि लिवइन के मामलों में आपसी सहमति के बाद शारीरिक सम्बन्ध होने के बाद भी दुष्कर्म का आरोप लगा दिया जाता है। ऐसे में अब नई धारा के तहत केस दर्ज होने से दुष्कर्म के झूठे आरोप से मुक्ति मिलेगी।