मध्य प्रदेश में टिकट के दावेदारों के लिए कांग्रेस की ‘नई शर्त’
Tuesday - September 4, 2018 11:13 am ,
Category : WTN HINDI
टिकट वितरण के लिए कांग्रेस की ‘रणनीति’
SEP 04 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में जीत के लिए पूरी कोशिश कर रही है। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस अब हर स्तर पर रणनीति बना रही है ताकि जीत हासिल की जा सके। कहा जा रहा है कि इस बार कांग्रेस काफ़ी छानबीन के बाद ही टिकट वितरण करने वाली है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी उसी दावेदार को टिकट देगी जिसका जनता के बीच जनाधार होगा।
चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी टिकट के दावेदारों की दावेदारी को तरह-तरह से परख रही है। कांग्रेस से टिकट पाने के लिए अभी तक कई शर्तें सामने आईं थीं। लेकिन अब नई शर्त सामने आई है। अब कांग्रेस से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट पाने के दावेदारों में उसका दावा मज़बूत माना जाएगा जिनके सोशल मीडिया यानि कि ट्वीटर और फेसबुक पर कम से कम 20 हज़ार फालोअर हों।
कहा जा रहा है कि जनता के बीच जिनकी ज़्यादा पहुंच है ऐसे दावेदारों की पहचान अब सोशल मीडिया के द्वारा की जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, अब मौजूदा विधायकों, टिकट के लिए दावेदारी करने वाले पूर्व विधायकों और अन्य नेताओं 15 सितम्बर तक सोशल मीडिया पर सक्रियता का डाटा तैयार किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक इसके लिए बाकायदा सभी शहर व ग्रामीण ज़िला अध्यक्षों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में ज़िले की विधानसभा सीटों के दावेदारों से उनके ट्वीटर-फेसबुक फालोअर्स की संख्या और व्हाट्सअप पर सक्रियता की जानकारी मांगी गई है। सभी दावेदारों से यह जानकारी लेकर 15 सितम्बर तक पीसीसी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
नई शर्त के मुताबिक, फेसबुक पेज पर 15,000 लाइक्स, ट्विटर पर 5,000 फॉलोवर और सभी के पास बूथ के लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप बने होना अनिवार्य है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश कांग्रेस के ट्विटर/आईएनसीएपपी के सभी ट्वीट को री-ट्वीट और लाइक करना और मध्यप्रदेश कांग्रेस के फेसबुक पेज आईएनसीमध्यप्रदेश के सभी पोस्ट को शेयर और लाइक करना कांग्रेस पदाधिकारियों, वर्तमान विधायकों एवं टिकट के सभी दावेदारों के लिए अनिवार्य है।
कांग्रेस इस बार काफी सोच समझकर टिकट वितरण करने की रणनीति पर काम कर रही है। कहा जा रहा है कि जिस दावेदार का जितना ज़्यादा जनाधार लोगों के बीच में और सोशल मीडिया में होगा उसे टिकट मिलने की सम्भावना उतनी ज़्यादा है। लेकिन देखा गया है कि कई नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं ऐसे में इन नेताओं की दावेदारी कमज़ोर पड़ सकती।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान देखना चाहती है कि देश दुनिया में घट रही घटनाओं से कांग्रेस नेता कितने सक्रिय हैं और सोशल मीडिया के द्वारा वे जनता से कितना जुड़े रहते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने जो नई शर्त टिकट पाने के लिए रखी है उसे टिकट के दावेदार 98 प्रतिशत नेता पूरा नहीं कर पाएंगे। स्थानीय स्तर के नेताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता खासकर फेसबुक और ट्वीटर पर काफी कम है। ऐसे में देखना होगा कि टिकट के कितने दावेदार इस नई शर्त को पूरा कर पाते हैं।
SEP 04 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में जीत के लिए पूरी कोशिश कर रही है। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस अब हर स्तर पर रणनीति बना रही है ताकि जीत हासिल की जा सके। कहा जा रहा है कि इस बार कांग्रेस काफ़ी छानबीन के बाद ही टिकट वितरण करने वाली है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी उसी दावेदार को टिकट देगी जिसका जनता के बीच जनाधार होगा।
चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी टिकट के दावेदारों की दावेदारी को तरह-तरह से परख रही है। कांग्रेस से टिकट पाने के लिए अभी तक कई शर्तें सामने आईं थीं। लेकिन अब नई शर्त सामने आई है। अब कांग्रेस से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट पाने के दावेदारों में उसका दावा मज़बूत माना जाएगा जिनके सोशल मीडिया यानि कि ट्वीटर और फेसबुक पर कम से कम 20 हज़ार फालोअर हों।
कहा जा रहा है कि जनता के बीच जिनकी ज़्यादा पहुंच है ऐसे दावेदारों की पहचान अब सोशल मीडिया के द्वारा की जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, अब मौजूदा विधायकों, टिकट के लिए दावेदारी करने वाले पूर्व विधायकों और अन्य नेताओं 15 सितम्बर तक सोशल मीडिया पर सक्रियता का डाटा तैयार किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक इसके लिए बाकायदा सभी शहर व ग्रामीण ज़िला अध्यक्षों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में ज़िले की विधानसभा सीटों के दावेदारों से उनके ट्वीटर-फेसबुक फालोअर्स की संख्या और व्हाट्सअप पर सक्रियता की जानकारी मांगी गई है। सभी दावेदारों से यह जानकारी लेकर 15 सितम्बर तक पीसीसी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
नई शर्त के मुताबिक, फेसबुक पेज पर 15,000 लाइक्स, ट्विटर पर 5,000 फॉलोवर और सभी के पास बूथ के लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप बने होना अनिवार्य है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश कांग्रेस के ट्विटर/आईएनसीएपपी के सभी ट्वीट को री-ट्वीट और लाइक करना और मध्यप्रदेश कांग्रेस के फेसबुक पेज आईएनसीमध्यप्रदेश के सभी पोस्ट को शेयर और लाइक करना कांग्रेस पदाधिकारियों, वर्तमान विधायकों एवं टिकट के सभी दावेदारों के लिए अनिवार्य है।
कांग्रेस इस बार काफी सोच समझकर टिकट वितरण करने की रणनीति पर काम कर रही है। कहा जा रहा है कि जिस दावेदार का जितना ज़्यादा जनाधार लोगों के बीच में और सोशल मीडिया में होगा उसे टिकट मिलने की सम्भावना उतनी ज़्यादा है। लेकिन देखा गया है कि कई नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं ऐसे में इन नेताओं की दावेदारी कमज़ोर पड़ सकती।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान देखना चाहती है कि देश दुनिया में घट रही घटनाओं से कांग्रेस नेता कितने सक्रिय हैं और सोशल मीडिया के द्वारा वे जनता से कितना जुड़े रहते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने जो नई शर्त टिकट पाने के लिए रखी है उसे टिकट के दावेदार 98 प्रतिशत नेता पूरा नहीं कर पाएंगे। स्थानीय स्तर के नेताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता खासकर फेसबुक और ट्वीटर पर काफी कम है। ऐसे में देखना होगा कि टिकट के कितने दावेदार इस नई शर्त को पूरा कर पाते हैं।