एससी-एसटी एक्ट संशोधन के खिलाफ कल मध्य प्रदेश में ‘महाविरोध’, उड़ी सरकार की नींद
Wednesday - September 5, 2018 11:28 am ,
Category : WTN HINDI
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ कल मध्य प्रदेश में ‘महाबंद’
SEP 05 (WTN) – मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे विरोध को लेकर राज्य की शिवराज सरकार की नींद उड़ गई है। जगह-जगह नेताओं के विरोध और कल यानि 6 सितम्बर को बंद को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। जोरदार विरोध की आहट को देखते हुए शिवराज कैबिनेट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे विरोध पर चिंता जताई है। कैबिनेट ने सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं नेताओं से भी कहा गया है कि वो समझदारी और शांति से काम लें।
शिवराज कैबिनेट के मंत्रियों में सवर्ण आंदोलन और विरोध की घटनाओं पर चिंता छाई हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में नेताओं को जनता के भारी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। पूरे मध्य प्रदेश में जगह-जगह नेताओं और मंत्रियों का घेराव किया जा रहा है और उन्हें काले झण्डे दिखाए गये हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, जातिगत आधार पर आरक्षण और प्रमोशन के ख़िलाफ पूरे प्रदेश में तेज़ी से माहौल बन रहा है। सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों की तरफ से छह सितम्बर को बंद की घोषणा की गई है। ये बंद राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई नेताओं का एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आधार पर आरक्षण को लेकर विरोध शुरू हो गया है।
मध्य प्रदेश में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत, केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर समेत कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को विरोध का सामना करना पड़ा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि यदि यह विरोध प्रदर्शन बढ़ता गया तो नेताओं के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
इधर सोशल मीडिया पर चुनाव में किसी भी पार्टी को वोट नहीं देने और नोटा का प्रयोग करने का प्रचार जोरशोर से किया जा रहा है। इससे भी नेताओं की नींद उड़ गई है। मध्य प्रदेश में वोटों के लिहाज से सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि इन दोनों समाज ने नोटा के लिए मुहिम चला दी तो राजनेताओं की राजनीति पर ताला लग जाएगा।
प्रदेश में 6 सितम्बर का बंद यदि सफल रहता है तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के नेताओं को सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा। एससी-एसटी एक्ट में किये गये संशोधन के खिलाफ धीरे-धीरे पूरे देश में मौहाल बनता जा रहा है। जगह-जगह पर जनप्रतिनिधियों का विरोध हो रहा है। ऐसे में जिस तरह से नोटा का प्रचार किया जा रहा है उससे सभी राजनीतिक पार्टियां सोचने पर मजबूर हो गईं हैं कि कहीं उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर कोई गलती तो नहीं कर दी है।
चूंकि विरोध सभी दलों का हो रहा है इसलिए इसे किसी पार्टी विशेष का विरोध नहीं का जा सकता है। मध्य प्रदेश में सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग की तादात इतनी है कि वे किसी भी सरकार का तख्ता चुनाव में पलट सकते हैं। राजनीतिक दलों ने वोट बैंक के लिए समय-समय पर जातिवादी राजनीति की है जिसका खामियाजा आज उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि 6 सितम्बर के बाद एससी-एसटी एक्ट का विरोध और भी बढ़ेगा और दीर्घकालीन बंद या हड़ताल की योजना भी बन सकती है। ऐसे में देखना होगा कि इस महाविरोध का सामना राजनीतिक दल किस तरह से करते हैं।
SEP 05 (WTN) – मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे विरोध को लेकर राज्य की शिवराज सरकार की नींद उड़ गई है। जगह-जगह नेताओं के विरोध और कल यानि 6 सितम्बर को बंद को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। जोरदार विरोध की आहट को देखते हुए शिवराज कैबिनेट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे विरोध पर चिंता जताई है। कैबिनेट ने सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं नेताओं से भी कहा गया है कि वो समझदारी और शांति से काम लें।
शिवराज कैबिनेट के मंत्रियों में सवर्ण आंदोलन और विरोध की घटनाओं पर चिंता छाई हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में नेताओं को जनता के भारी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। पूरे मध्य प्रदेश में जगह-जगह नेताओं और मंत्रियों का घेराव किया जा रहा है और उन्हें काले झण्डे दिखाए गये हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, जातिगत आधार पर आरक्षण और प्रमोशन के ख़िलाफ पूरे प्रदेश में तेज़ी से माहौल बन रहा है। सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों की तरफ से छह सितम्बर को बंद की घोषणा की गई है। ये बंद राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई नेताओं का एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आधार पर आरक्षण को लेकर विरोध शुरू हो गया है।
मध्य प्रदेश में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत, केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर समेत कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को विरोध का सामना करना पड़ा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि यदि यह विरोध प्रदर्शन बढ़ता गया तो नेताओं के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
इधर सोशल मीडिया पर चुनाव में किसी भी पार्टी को वोट नहीं देने और नोटा का प्रयोग करने का प्रचार जोरशोर से किया जा रहा है। इससे भी नेताओं की नींद उड़ गई है। मध्य प्रदेश में वोटों के लिहाज से सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि इन दोनों समाज ने नोटा के लिए मुहिम चला दी तो राजनेताओं की राजनीति पर ताला लग जाएगा।
प्रदेश में 6 सितम्बर का बंद यदि सफल रहता है तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के नेताओं को सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा। एससी-एसटी एक्ट में किये गये संशोधन के खिलाफ धीरे-धीरे पूरे देश में मौहाल बनता जा रहा है। जगह-जगह पर जनप्रतिनिधियों का विरोध हो रहा है। ऐसे में जिस तरह से नोटा का प्रचार किया जा रहा है उससे सभी राजनीतिक पार्टियां सोचने पर मजबूर हो गईं हैं कि कहीं उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर कोई गलती तो नहीं कर दी है।
चूंकि विरोध सभी दलों का हो रहा है इसलिए इसे किसी पार्टी विशेष का विरोध नहीं का जा सकता है। मध्य प्रदेश में सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग की तादात इतनी है कि वे किसी भी सरकार का तख्ता चुनाव में पलट सकते हैं। राजनीतिक दलों ने वोट बैंक के लिए समय-समय पर जातिवादी राजनीति की है जिसका खामियाजा आज उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि 6 सितम्बर के बाद एससी-एसटी एक्ट का विरोध और भी बढ़ेगा और दीर्घकालीन बंद या हड़ताल की योजना भी बन सकती है। ऐसे में देखना होगा कि इस महाविरोध का सामना राजनीतिक दल किस तरह से करते हैं।