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72 के रिकॉर्ड स्तर पर रुपया, वित्तमंत्री जेटली ने वैश्विक कारणों को बताया ज़िम्मेदार

Thursday - September 6, 2018 3:19 pm , Category : WTN HINDI

रुपये में गिरावट जारी, रिज़र्व बैंक के उपाय भी नाकाफ़ी

SEP 06 (WTN) – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। रुपया आज डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक 72 पर पहुंच गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपए का अब तक का यह सबसे निचला स्तर है। इससे पहले रुपए ने 71 का नया रिकॉर्ड बनाया था। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में डॉलर लगातार मज़बूत होता जा रहा है। रुपए की मज़बूती से भारत की दिक्कत बढ़ती ही जा रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत विदेश से काफ़ी आयात करता है, लेकिन रुपए के कमज़ोर होने से आयात महंगा पड़ रहा है।
 
आज सुबह रुपया 72.1 पर ट्रेड कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी और उभरती हुई इकोनॉमी में कमज़ोरी के कारण डॉलर लगातार मज़बूत होता जा रहा है। वैसे रुपए की गिरावट को थामने के लिए रिज़र्व बैंक ने कल कुछ उपाय ज़रुर किए थे, लेकिन उनका ज़्यादा असर देखने को नहीं मिला। इतना ही नहीं, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध की आशंका के चलते भी डॉलर में तेज़ी देखी जा रही है।
 
इधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कल कहा था कि रुपए में गिरावट वैश्विक कारणों से आ रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये की स्थिति बेहतर है। बुधवार को पिछले छह कारोबारी सत्रों में रुपया 165 पैसे टूट चुका है। इस बारे में वित्त मंत्री का कहना है, “यदि आप घरेलू आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्थिति को देखें, तो इसके पीछे कोई घरेलू कारक नज़र नहीं आएगा। इसके पीछे वजह वैश्विक है।“
 
वित्त जेटली ने आगे कहा, “डॉलर लगभग सभी मुद्राओं की तुलना में मज़बूत हुआ है। वहीं दूसरी ओर रुपया मज़बूत हुआ है या सीमित दायरे में रहा है।“ उन्होंने कहा, “रुपया कमज़ोर नहीं हुआ है। यह अन्य मुद्राओं मसलन पाउंड और यूरो की तुलना में मज़बूत हुआ है।“
 
रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमज़ोर होता जा रहा है और इसके पीछे के कारण वैश्विक हैं, लेकिन कमज़ोर होते रुपये का नुकसान भारतीय जनता को उठाना पड़ रहा है। भारत अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत पेट्रोल-डीज़ल आयात करता है और जिसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। रुपया कमज़ोर होने कारण आए दिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। डीज़ल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ रहा है जिसके कारण महंगाई बढ़ रही है। यदि केन्द्र की भाजपा सरकार ने इस पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया तो साल के आखिरी में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है।
 
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