एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सवर्णों के ‘कड़े तेवरों’ से उड़ी शिवराज सरकार की नींद, अब ‘मनाने’ की कवायद
Saturday - September 8, 2018 1:50 pm ,
Category : WTN HINDI
‘नाराज़’ सवर्णों और पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश
SEP 08 (WTN) – लगता है मध्य प्रदेश में भाजपा को एससी-एसटी एक्ट में किये गये संशोधन के बाद नाराज़ सवर्णों के कड़े तेवर से विधानसभा चुनाव में हार का ख़तरा दिखने लगा है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस वर्ग को साधने के लिए कोशिश करना शुरू कर दी है। भोपाल में भाजपा की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बार-बार दोहराया कि उनकी सरकार ने हर वर्ग के लिए काम किया है।
सवर्णों की नाराज़गी को भांपते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उनकी सरकार ने सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर काम किया है, जिसका लाभ सभी को मिला है। जैसा कि आप जानते हैं कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से सवर्ण समाज और पिछ़ड़ा वर्ग में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। जिसके बाद 6 सितम्बर को सपाक्स के बैनर तले पूरे मध्य प्रदेश में महाबंद इतना सफ़ल हुआ था जिससे शिवराज सरकार को पसीने आ गये थे।
लेकिन लगता है कि अभी भी शिवराज सरकार सोच रही है कि एससी-एसटी एक्ट का विरोध किसी पार्टी के कहने पर हो रहा है, जबकि सच्चाई है कि सवर्णों और पिछड़ों की इस लड़ाई में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं है। इतना होने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि कुछ लोग आपस में लड़वाने की साजिश रच रहे हैं। लगता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वास्तविकता को स्वीकार करना ही नहीं चाहते हैं।
राज्य की भाजपा सरकार खुलकर भले ही स्वीकार ना करे, लेकिन एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ जो गुस्सा सवर्णों में देखा जा रहा है उससे अंदर तक पार्टी हिल गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शिवराज सरकार सवर्णों को खुश करने के लिए कुछ कदम उठा सकती है, जैसे ब्राह्मणों को खुश करने के लिए पुजारियों का मानदेय बढ़ाना, मन्दिरों से सरकारी नियंत्रण वापस लेना आदि।
वहीं कहा जा रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज़ व्यापारी वर्ग तो भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी में है। ऐसे में इस वर्ग को खुश करने के लिए छोटे और मंझले व्यापारियों की महापंचायत बुलाई जा सकती है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेशस्तर के आला नेता बाहरी तौर पर आश्वस्त ज़रूर नज़र आ रहे हैं, लेकिन जिस तरह से सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ़ जो स्वस्फूर्त आंदोलन किया है, उससे सभी की नींद उड़ गई है। प्रदेश में इस वर्ग का 65 प्रतिशत वोट बैंक है, यदि यह वर्ग भाजपा से नाराज़ हो गया तो लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव में जीत भाजपा के लिए सपना ना बन जाए।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, संघ के अंदरूनी सर्वे ने साफ़ किया गया है कि भाजपा की हालत प्रदेश में खराब चल रही है। ऐसे में यदि समय रहते भाजपा ने सवर्णों और पिछड़ा वर्ग के लिए एससी-एसटी एक्ट में रियायत के लिए कुछ नहीं किया, तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस वर्ग की नाराज़गी काफ़ी भारी पड़ सकती है।
SEP 08 (WTN) – लगता है मध्य प्रदेश में भाजपा को एससी-एसटी एक्ट में किये गये संशोधन के बाद नाराज़ सवर्णों के कड़े तेवर से विधानसभा चुनाव में हार का ख़तरा दिखने लगा है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस वर्ग को साधने के लिए कोशिश करना शुरू कर दी है। भोपाल में भाजपा की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बार-बार दोहराया कि उनकी सरकार ने हर वर्ग के लिए काम किया है।
सवर्णों की नाराज़गी को भांपते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उनकी सरकार ने सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर काम किया है, जिसका लाभ सभी को मिला है। जैसा कि आप जानते हैं कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से सवर्ण समाज और पिछ़ड़ा वर्ग में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। जिसके बाद 6 सितम्बर को सपाक्स के बैनर तले पूरे मध्य प्रदेश में महाबंद इतना सफ़ल हुआ था जिससे शिवराज सरकार को पसीने आ गये थे।
लेकिन लगता है कि अभी भी शिवराज सरकार सोच रही है कि एससी-एसटी एक्ट का विरोध किसी पार्टी के कहने पर हो रहा है, जबकि सच्चाई है कि सवर्णों और पिछड़ों की इस लड़ाई में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं है। इतना होने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि कुछ लोग आपस में लड़वाने की साजिश रच रहे हैं। लगता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वास्तविकता को स्वीकार करना ही नहीं चाहते हैं।
राज्य की भाजपा सरकार खुलकर भले ही स्वीकार ना करे, लेकिन एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ जो गुस्सा सवर्णों में देखा जा रहा है उससे अंदर तक पार्टी हिल गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शिवराज सरकार सवर्णों को खुश करने के लिए कुछ कदम उठा सकती है, जैसे ब्राह्मणों को खुश करने के लिए पुजारियों का मानदेय बढ़ाना, मन्दिरों से सरकारी नियंत्रण वापस लेना आदि।
वहीं कहा जा रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज़ व्यापारी वर्ग तो भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी में है। ऐसे में इस वर्ग को खुश करने के लिए छोटे और मंझले व्यापारियों की महापंचायत बुलाई जा सकती है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेशस्तर के आला नेता बाहरी तौर पर आश्वस्त ज़रूर नज़र आ रहे हैं, लेकिन जिस तरह से सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ़ जो स्वस्फूर्त आंदोलन किया है, उससे सभी की नींद उड़ गई है। प्रदेश में इस वर्ग का 65 प्रतिशत वोट बैंक है, यदि यह वर्ग भाजपा से नाराज़ हो गया तो लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव में जीत भाजपा के लिए सपना ना बन जाए।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, संघ के अंदरूनी सर्वे ने साफ़ किया गया है कि भाजपा की हालत प्रदेश में खराब चल रही है। ऐसे में यदि समय रहते भाजपा ने सवर्णों और पिछड़ा वर्ग के लिए एससी-एसटी एक्ट में रियायत के लिए कुछ नहीं किया, तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस वर्ग की नाराज़गी काफ़ी भारी पड़ सकती है।