सोशल मीडिया पर अपने ही दिशा निर्देश को कांग्रेस ने लिया वापस
Saturday - September 8, 2018 4:42 pm ,
Category : WTN HINDI
फेसबुक और ट्विटर पर देखी जा रही थी टिकट के दावेदारों की सक्रियता
SEP 08 (WTN) – मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने उस आदेश या फिर कहें कि दिशा-निर्देश को निरस्त कर दिया है, जिसमें निर्देशित किया गया था कि विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए उन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी जो सोशल मीडिया यानि कि फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर सक्रिय होंगे।
इस बारे में कांग्रेस प्रभारी संगठन के उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने एक पत्र जारी कर साफ़ कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया से सम्बन्धित उनके द्वारा प्रेषित पत्र को निरस्त किया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस में टिकट के दावेदारों के साथ ही वर्तमान विधायकों और प्रदेश पदादिकरियों से सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता की रिपोर्ट मांगी गई थी। कहा गया था कि फेसबुक पेज पर 15 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर्स होना चाहिए, जबकि ट्विटर पर पांच हज़ार फॉलोअर्स होने चाहिए। इतना ही नहीं यह भी कहा गया था कि वॉट्सएप के ऐसे ग्रुप भी होने चाहिए जिसमें बूथ लेवल के कार्यकर्ता जुड़े हों।
कहा जाता है कि इस पैमाने पर कांग्रेस के 90 प्रतिशत से ज़्यादा नेता खरा नहीं उतर पा रहे थे। टिकट के दावेदार तो छोड़िए, बड़ी संख्या में विधायक और कई दिग्गज़ नेता भी फेसबुक और ट्विटर पर सक्रिय नहीं हैं जिसके कारण इस तरह के दिशा निर्देश को वापस लेने में ही कांग्रेस ने अपनी भलाई समझी है।
SEP 08 (WTN) – मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने उस आदेश या फिर कहें कि दिशा-निर्देश को निरस्त कर दिया है, जिसमें निर्देशित किया गया था कि विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए उन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी जो सोशल मीडिया यानि कि फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर सक्रिय होंगे।
इस बारे में कांग्रेस प्रभारी संगठन के उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने एक पत्र जारी कर साफ़ कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया से सम्बन्धित उनके द्वारा प्रेषित पत्र को निरस्त किया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस में टिकट के दावेदारों के साथ ही वर्तमान विधायकों और प्रदेश पदादिकरियों से सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता की रिपोर्ट मांगी गई थी। कहा गया था कि फेसबुक पेज पर 15 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर्स होना चाहिए, जबकि ट्विटर पर पांच हज़ार फॉलोअर्स होने चाहिए। इतना ही नहीं यह भी कहा गया था कि वॉट्सएप के ऐसे ग्रुप भी होने चाहिए जिसमें बूथ लेवल के कार्यकर्ता जुड़े हों।
कहा जाता है कि इस पैमाने पर कांग्रेस के 90 प्रतिशत से ज़्यादा नेता खरा नहीं उतर पा रहे थे। टिकट के दावेदार तो छोड़िए, बड़ी संख्या में विधायक और कई दिग्गज़ नेता भी फेसबुक और ट्विटर पर सक्रिय नहीं हैं जिसके कारण इस तरह के दिशा निर्देश को वापस लेने में ही कांग्रेस ने अपनी भलाई समझी है।