BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

केन्द्र और राज्य सरकार चाहें तो, फिर ऐसे हो सकता है पेट्रोल-डीज़ल सस्ता

Tuesday - September 11, 2018 2:04 pm , Category : WTN HINDI

लेने होंगे कुछ फैसले, 10 से 15 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीज़ल

SEP 11 (WTN) – देश में पेट्रोल और डीज़ल के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं। यदि ऐसा ही होता रहा तो कुछ ही दिनों बाद भारत में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर तक बिक सकता है। आज ही के दिन महाराष्ट्र में पेट्रोल का भाव 90 रुपए प्रति लीटर को पार कर गया है। दरअसल केन्द्र और राज्य सरकारों का टैक्स इतना है कि जिसके कारण पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
 
यह सही है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और कच्चे तेल के महंगा होने के कारण पेट्रोल-डीज़ल के दाम रोज़ बढ़  रहे हैं, लेकिन सच यह भी है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के टैक्स भी काफ़ी ज़्यादा हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले चार सालों में पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी क़रीब दोगुना हो गया है। साल 2014-15 में केन्द्र सरकार ने इससे 99,184 करोड़ रुपए कमाए थे, वहीं 2017-18 में ये कमाई बढ़कर 2,29,019 करोड़ रुपए हो गई।
 
राज्य सरकारें भी पेट्रोल और डीज़ल पर अपने-अपने टैक्स लगाती हैं। राज्यों की आय भी 4 साल में 1.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
 
इधर अर्थशास्त्रियों का सुझाव है यदि केन्द्र और राज्य सरकारें कुछ टैक्स कम करें और कुछ नीतियों में बदलाव किया जाए तो पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम हो सकते हैं।
 
सबसे पहले पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के तहत लाना बहुत ज़रूरी है। अभी पेट्रोल की कीमत में केंद्र और राज्य सरकार का क़रीब 50 प्रतिशत टैक्स जुड़ता है। जीएसटी की सबसे ऊंची दर 28 प्रतिशत की है। अगर पेट्रोल और डीज़ल के लिए 35 या 40 प्रतिशत का एक अलग ब्रैकेट भी बनाया जाए तो इनकी क़ीमत में कमी आ सकती है।
 
ONGC यानि कि ऑयल एण्ड नेचुरल गैस ऑर्गेनाइजेशन देश की मांग का 20 प्रतिशत कच्चा तेल सप्लाई करती है। यदि सरकार इस कम्पनी को रिटेलर्स को सस्ता पेट्रोल-डीज़ल बेचने को कहे, तो इससे भी ईंधन सस्ता हो सकता है। इतना ही नहीं सरकार ONGC से कम डिविडेंड ले सकती है।
 
एक सलाह सरकार को यह भी है कि सरकार पेट्रोल और डीज़ल की फ्यूचर्स ट्रेडिंग भी शुरू कर सकती है। इससे इसकी सही क़ीमत तय करने में मदद मिलेगी। इनके फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च किए जा सकते हैं। ग्राहक इन कॉन्ट्रैक्ट को अभी की कीमत पर खरीद कर भविष्य में एक तय तारीख पर इनकी डिलीवरी ले सकते हैं।
 
वहीं देखा गया है कि यूरोपीय देशों के मुकाबले ओपेके यानि कि पेट्रोलियम आयात करने वाले देशों का समूह,  भारत समेत एशियाई देशों को कच्चा तेल महंगा बेचता है। इसको एशियन प्रीमियम कहते हैं। यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे एशियाई देशों को अपने साथ लेकर OPEC पर दबाव डालें तो भारत को भी कच्चा तेल सस्ते दामों पर मिलने लगेगा, जिससे तेल की क़ीमतें पर लगाम लगाई जी सकती है।
 
यदि सरकार इतना भी नहीं कर सकती तो कम से कम केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार वैट टैक्स को कम कर दे। नीति आयोग भी कह चुका है कि राज्य सरकारों को 15 प्रतिशत तक वैट कम करना चाहिए। पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों से रियायत देना केन्द्र और राज्य सरकार के हाथ में है, लेकिन लगता है इच्छा शक्ति की कमी है।
 
Leave a Comment
* Name
* Email (will not be published)
*
* - Required fields