आरएसएस की नई ‘रणनीति’, राहुल गांधी को करारा ‘जवाब’ देने की तैयारी
Wednesday - September 12, 2018 12:05 pm ,
Category : WTN HINDI
राहुल गांधी को भी संघ भेज सकता है निमंत्रण, मुस्लिम ब्रदरहुड से तुलना पर आरएसएस दे सकता है ‘सांकेतिक उत्तर’
SEP 12 (WTN) – भारतीय राजनीति में हमेशा से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि कि आरएसएस का ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से दख़ल रहा है। देश में इस समय भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। देश के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, उप राष्ट्रपति से लेकर कई राज्यपाल, और कई केन्द्रीय मंत्रियों से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्री आरएसएस से स्वयंसेवक रहे हैं।
कांग्रेस हमेशा से ही संघ की विरोधी रही है। यह बात अलग है कि चीन युद्ध के समय आरएसएस की सेवा भावना को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 26 जनवरी की परेड में संघ की एक टुकड़ी को परेड में शामिल किया था। समय-समय पर कई कांग्रेसी नेता भी संघ के ‘अनुशासन’ की ‘प्रशंसा’ कर चुके हैं।
लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कोई भी ऐसा मौका नहीं छोड़ते हैं जब वो संघ पर निशाना ना साधें। कुछ दिनों पहले उन्होंने संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से करके एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया था। लेकिन लगता है कि संघ ने राहुल गांधी को अब एक ‘रणनीति’ के तहत ‘जवाब’ देने की योजना बना ली है।
जैसा कि आप जानते हैं कि संघ 'भविष्य का भारत' नाम के एक कार्यक्रम का आयोजित करना जा रहा है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आरएसएस की ओर से दुनियाभर के कुल 70 देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में एक पूरी लेक्चर सीरीज़ होगी, जिसे संघ प्रमुख मोहन भागवत भी सम्बोधित करेंगे। संघ जल्द ही सभी चिन्हित देशों को आधिकारिक तौर पर निमंत्रण देना शुरू करेगा। तीन दिनों का यह कार्यक्रम 17 सितम्बर से दिल्ली में शुरू होगा।
संघ का यह वही कार्यक्रम है जिसमें देश के कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बुलाने की चर्चा हो रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी बुलाया जा सकता है। जैसा कि आप जानते हैं कि इससे पहले नागपुर में संघ के एक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शामिल हुए थे तो कांग्रेस में काफ़ी ‘उथल पुथल’ मच गई थी।
राहुल गांधी संघ के विरोध में यहां तक कह चुके हैं कि संघ का साथ ‘ज़हर’ की तरह है। राहुल गांधी के बयानों का जवाब देने के लिए है संघ 70 देशों के प्रतिनिधियों को बुला रहा है ताकि राहुल गांधी को जवाब दिया जा सके कि संघ और मुस्लिम ब्रदरहुड में कितना अंतर है। संघ के साथ ‘अछूतों’ की तरह व्यवहार करने वाले राहुल गांधी जब संघ के मंच पर 70 देशों के प्रतिनिधियों को देखेंगे तो यह संघ का राहुल गांधी को ‘इशारों-इशारों’ में ही जवाब होगा कि संघ ‘अछूत’ नहीं है।
कहा जा रहा है कि संघ इस कार्यक्रम में राहुल गांधी को भी आमंत्रित कर सकता है, लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी संघ के साथ मंच साझा करेंगे। लेकिन यदि राहुल गांधी ऐसा नहीं करेंगे और दुनिया के 70 देशों के प्रतिनिधि आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे तो राहुल गांधी को अपने सवाल का जवाब अपने आप मिल जाएगा कि संघ और मुस्लिम ब्रदरहुड में कितना ‘अंतर’ है।
SEP 12 (WTN) – भारतीय राजनीति में हमेशा से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि कि आरएसएस का ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से दख़ल रहा है। देश में इस समय भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। देश के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, उप राष्ट्रपति से लेकर कई राज्यपाल, और कई केन्द्रीय मंत्रियों से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्री आरएसएस से स्वयंसेवक रहे हैं।
कांग्रेस हमेशा से ही संघ की विरोधी रही है। यह बात अलग है कि चीन युद्ध के समय आरएसएस की सेवा भावना को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 26 जनवरी की परेड में संघ की एक टुकड़ी को परेड में शामिल किया था। समय-समय पर कई कांग्रेसी नेता भी संघ के ‘अनुशासन’ की ‘प्रशंसा’ कर चुके हैं।
लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कोई भी ऐसा मौका नहीं छोड़ते हैं जब वो संघ पर निशाना ना साधें। कुछ दिनों पहले उन्होंने संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से करके एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया था। लेकिन लगता है कि संघ ने राहुल गांधी को अब एक ‘रणनीति’ के तहत ‘जवाब’ देने की योजना बना ली है।
जैसा कि आप जानते हैं कि संघ 'भविष्य का भारत' नाम के एक कार्यक्रम का आयोजित करना जा रहा है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आरएसएस की ओर से दुनियाभर के कुल 70 देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में एक पूरी लेक्चर सीरीज़ होगी, जिसे संघ प्रमुख मोहन भागवत भी सम्बोधित करेंगे। संघ जल्द ही सभी चिन्हित देशों को आधिकारिक तौर पर निमंत्रण देना शुरू करेगा। तीन दिनों का यह कार्यक्रम 17 सितम्बर से दिल्ली में शुरू होगा।
संघ का यह वही कार्यक्रम है जिसमें देश के कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बुलाने की चर्चा हो रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी बुलाया जा सकता है। जैसा कि आप जानते हैं कि इससे पहले नागपुर में संघ के एक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शामिल हुए थे तो कांग्रेस में काफ़ी ‘उथल पुथल’ मच गई थी।
राहुल गांधी संघ के विरोध में यहां तक कह चुके हैं कि संघ का साथ ‘ज़हर’ की तरह है। राहुल गांधी के बयानों का जवाब देने के लिए है संघ 70 देशों के प्रतिनिधियों को बुला रहा है ताकि राहुल गांधी को जवाब दिया जा सके कि संघ और मुस्लिम ब्रदरहुड में कितना अंतर है। संघ के साथ ‘अछूतों’ की तरह व्यवहार करने वाले राहुल गांधी जब संघ के मंच पर 70 देशों के प्रतिनिधियों को देखेंगे तो यह संघ का राहुल गांधी को ‘इशारों-इशारों’ में ही जवाब होगा कि संघ ‘अछूत’ नहीं है।
कहा जा रहा है कि संघ इस कार्यक्रम में राहुल गांधी को भी आमंत्रित कर सकता है, लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी संघ के साथ मंच साझा करेंगे। लेकिन यदि राहुल गांधी ऐसा नहीं करेंगे और दुनिया के 70 देशों के प्रतिनिधि आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे तो राहुल गांधी को अपने सवाल का जवाब अपने आप मिल जाएगा कि संघ और मुस्लिम ब्रदरहुड में कितना ‘अंतर’ है।