अब ब्राह्मणों को मनाने की ‘कोशिश’ में मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार
Thursday - September 13, 2018 4:57 pm ,
Category : WTN HINDI
चुनावी साल में याद आए ब्राह्मण
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज़ चल रहे ब्राह्मणों को ‘खुश’ करने की कवायद
SEP 13 (WTN) – एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद ब्राह्मणों के विरोध का सामना कर रही मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने अब ब्राह्मणों को खुश करने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के चलते सीएम शिवराज सिंह चौहान जल्द ही पुजारियों की पंचायत बुलाकर मन्दिरों से सरकारी नियंत्रण पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य के मन्दिरों की हज़ारों एकड़ कृषि भूमि की नीलामी को लेकर प्रदेश सरकार सालों से परेशान है। कहा जा रहा है कि साधु-संतों के सम्भावित विरोध के चलते राज्य सरकार इस मामले में फैसला नहीं कर पा रही है।
जानकारी के मुताबिक, धर्मस्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के पास मन्दिरों की ज़मीन को नीलाम करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन मामला संवेदनशील होने के कारण मंत्री यशोधरा राजे ने इसे सीएम शिवराज के पास चर्चा के लिए भेज दिया था। तभी से उस पर कोई भी फैसला नहीं लिया जा सका है।
मीडिया से मिली जानकारी अनुसार, उस प्रस्ताव में साफ कहा गया था कि मन्दिरों की ज़मीन का उपयोग वहां के पुजारी कर रहे हैं। यदि सरकार दस एकड़ भूमि को छोड़कर शेष भूमि को राजस्व पुस्तक परिपत्र के नियमों के अनुसार नीलाम कर लीज़ पर दे दी जाए तो मंदिरों का बेहतर रख-रखाव और जीर्णोद्धार किया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2008 से पहले राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के अनुसार, दस एकड़ से ज़्यादा कृषि भूमि को नीलाम या लीज पर देकर मन्दिरों का रखरखाव किया जाता था। पुजारियों को अपने भरण-पोषण के लिए 10 एकड़ ज़मीन के उपयोग की अनुमति दी जाती थी। इतना ही नहीं इसके अलावा पुजारियों को प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से ब्राह्मण समाज भाजपा से नाराज़ चल रहा है। हो सकता है इस समाज को खुश करने के लिए शिवराज सिंह चौहान कोई सौगात इस समाज को दे।
SEP 13 (WTN) – एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद ब्राह्मणों के विरोध का सामना कर रही मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने अब ब्राह्मणों को खुश करने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के चलते सीएम शिवराज सिंह चौहान जल्द ही पुजारियों की पंचायत बुलाकर मन्दिरों से सरकारी नियंत्रण पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य के मन्दिरों की हज़ारों एकड़ कृषि भूमि की नीलामी को लेकर प्रदेश सरकार सालों से परेशान है। कहा जा रहा है कि साधु-संतों के सम्भावित विरोध के चलते राज्य सरकार इस मामले में फैसला नहीं कर पा रही है।
जानकारी के मुताबिक, धर्मस्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के पास मन्दिरों की ज़मीन को नीलाम करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन मामला संवेदनशील होने के कारण मंत्री यशोधरा राजे ने इसे सीएम शिवराज के पास चर्चा के लिए भेज दिया था। तभी से उस पर कोई भी फैसला नहीं लिया जा सका है।
मीडिया से मिली जानकारी अनुसार, उस प्रस्ताव में साफ कहा गया था कि मन्दिरों की ज़मीन का उपयोग वहां के पुजारी कर रहे हैं। यदि सरकार दस एकड़ भूमि को छोड़कर शेष भूमि को राजस्व पुस्तक परिपत्र के नियमों के अनुसार नीलाम कर लीज़ पर दे दी जाए तो मंदिरों का बेहतर रख-रखाव और जीर्णोद्धार किया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2008 से पहले राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के अनुसार, दस एकड़ से ज़्यादा कृषि भूमि को नीलाम या लीज पर देकर मन्दिरों का रखरखाव किया जाता था। पुजारियों को अपने भरण-पोषण के लिए 10 एकड़ ज़मीन के उपयोग की अनुमति दी जाती थी। इतना ही नहीं इसके अलावा पुजारियों को प्रतिमाह मानदेय देने का प्रावधान है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से ब्राह्मण समाज भाजपा से नाराज़ चल रहा है। हो सकता है इस समाज को खुश करने के लिए शिवराज सिंह चौहान कोई सौगात इस समाज को दे।