सामने आया चीन का दोहरा चरित्र, उइगर मुस्लिमों के साथ जुल्म की हदें पार
Monday - September 17, 2018 11:06 am ,
Category : WTN HINDI
चीन में कई तरह ही पाबंदियां हैं उइगर मुस्लिमों पर
उइगर लोगों पर अपनी संस्कृति थोपना चाहता है चीन, महिला ने एक आलेख में किया खुलासा
SEP 17 (WTN) – विस्तारवादी देश चीन का दोहरा और क्रूर चेहरा एक बार फिर से सामने आया है। एक तरफ चीन खुद के फ़ायदे के लिए पाकिस्तान के साथ दोस्ती का नाटक कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ वह मुस्लिमों पर अपने देश में बेइंतेहा जुल्म कर रहा है। वैसे तो चीन में रहने वाले उइगर मुस्लिमों के साथ होने वाले अत्याचार की कई ख़बरें मीडिया में आती रहती हैं, लेकिन इस बार इसी समाज की सताई गई एक महिला ने अपना दर्द बयां किया है।
दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेजी अख़बार में छपे एक आलेख में एक महिला ने अपना साथ बीती और आंखों देखी बातों का जिक्र किया है। अख़बार में छपे आलेख के मुताबिक, चीन, उइगर समाज के लोगों से बेइंतेहा नफ़रत करता है। चीन हर कहीं पर अपना धर्म और संस्कृति को थोपना चाहता है, इसी कारण चीनी लोग चाहते हैं कि उइगर लोग भी चीनी धर्म और संस्कृति को अपना लें। चीनी लोग इस्लाम से बुरी तरह नफ़रत करते हैं। उइगर लोग चुंकि खुद की सभ्यता-संस्कृति को छोड़ना नहीं चाहते हैं, इसलिए चीनी लोग उनपर जमकर अत्याचार करते हैं।
आलेख में लिखा है कि चीन में एक बच्चे का नियम ख़त्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी चीनी प्रशासन उइगर समाज के लोगों पर कड़ी नज़र रखता है। इस मामले में चीनी आतंक इतना है कि कभी भी इस समाज की किसी भी महिला का गर्भपात कर दिया जाता है, इसमें कई बार महिला की मृत्यु तक हो जाती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1949 में चीन ने पूर्वी तुर्कस्तान पर कब्जा कर लिया था। आरोप है कि उसके बाद से यहां के बच्चों को कुरान से दूर किया जाने लगा। इसके बाद मस्जिदों पर पाबंदी लगाई गई। धीरे-धीरे चीन की दखल इन लोगों के बीच बढ़ती गई जिसके बाद उइगर लोगों के रमजान में रोजे रखने, दाढ़ी बढ़ाने और बच्चों के इस्लामिक नाम रखने तक पर रोक लगा दी गई।
इतना ही नहीं, समाचार पत्र में छपे आलेख के अनुसार, उइगर समाज के लोगों को आर्थिक मोर्चे पर कमज़ोर करने के लिए चीन ने एक नई चाल चली। चीन शासन ने चीनी भाषा न आने पर इस समाज के लोगों को नौकरी देने से ही मना कर दिया।
इतना ही नहीं, इस आलेख में दावा किया गया है कि चीन में कैद किए जाने वाले उइगर लोगों के अंग भंग भी कर दिये जाते हैं और उनके अंगों की तस्करी तक की जाती है। आलेख लिखने वाली महिला का कहना है कि चीन में उइगर मुसलमानों के घर के बाहर क्यूआर कोड लगे होते हैं जिससे उनके घर की पूरी निगरानी की जाती है।
लेकिन सवाल उठता है कि भारत के मुस्लिम, इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर तो जमकर मुस्लिमों का साथ लेते हैं और इजरायल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ वहां की सरकार बेइंतेहा जुल्म कर रही है पर भारतीय मुस्लिम उसका विरोध नहीं करते हैं।
वहीं बुरे तरीके से आर्थिक संकट में घिरा पाकिस्तान भी चीन के सामने मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा नहीं उठाता है, क्योंकि सभी जानते हैं कि इस समय चीन के कर्ज़े पर ही पाकिस्तान की अर्थव्यस्था टिकी हुई है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यह दोहरा रवैया क्यों?
हालांकि समय-समय पर चीनी शासन उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार की ख़बरों को सिरे से नकारता रहा है, लेकिन बड़ा सवाल है कि आख़िर क्यों चीन उइगर लोगों के दूसरे देशों के जाने पर नज़र बनाए रखता है और वहां की सरकार पर उइगर लोगों को डिपोर्ट करने का दबाव डालता है। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब चीनी सरकार को देने चाहिए।
SEP 17 (WTN) – विस्तारवादी देश चीन का दोहरा और क्रूर चेहरा एक बार फिर से सामने आया है। एक तरफ चीन खुद के फ़ायदे के लिए पाकिस्तान के साथ दोस्ती का नाटक कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ वह मुस्लिमों पर अपने देश में बेइंतेहा जुल्म कर रहा है। वैसे तो चीन में रहने वाले उइगर मुस्लिमों के साथ होने वाले अत्याचार की कई ख़बरें मीडिया में आती रहती हैं, लेकिन इस बार इसी समाज की सताई गई एक महिला ने अपना दर्द बयां किया है।
दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेजी अख़बार में छपे एक आलेख में एक महिला ने अपना साथ बीती और आंखों देखी बातों का जिक्र किया है। अख़बार में छपे आलेख के मुताबिक, चीन, उइगर समाज के लोगों से बेइंतेहा नफ़रत करता है। चीन हर कहीं पर अपना धर्म और संस्कृति को थोपना चाहता है, इसी कारण चीनी लोग चाहते हैं कि उइगर लोग भी चीनी धर्म और संस्कृति को अपना लें। चीनी लोग इस्लाम से बुरी तरह नफ़रत करते हैं। उइगर लोग चुंकि खुद की सभ्यता-संस्कृति को छोड़ना नहीं चाहते हैं, इसलिए चीनी लोग उनपर जमकर अत्याचार करते हैं।
आलेख में लिखा है कि चीन में एक बच्चे का नियम ख़त्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी चीनी प्रशासन उइगर समाज के लोगों पर कड़ी नज़र रखता है। इस मामले में चीनी आतंक इतना है कि कभी भी इस समाज की किसी भी महिला का गर्भपात कर दिया जाता है, इसमें कई बार महिला की मृत्यु तक हो जाती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1949 में चीन ने पूर्वी तुर्कस्तान पर कब्जा कर लिया था। आरोप है कि उसके बाद से यहां के बच्चों को कुरान से दूर किया जाने लगा। इसके बाद मस्जिदों पर पाबंदी लगाई गई। धीरे-धीरे चीन की दखल इन लोगों के बीच बढ़ती गई जिसके बाद उइगर लोगों के रमजान में रोजे रखने, दाढ़ी बढ़ाने और बच्चों के इस्लामिक नाम रखने तक पर रोक लगा दी गई।
इतना ही नहीं, समाचार पत्र में छपे आलेख के अनुसार, उइगर समाज के लोगों को आर्थिक मोर्चे पर कमज़ोर करने के लिए चीन ने एक नई चाल चली। चीन शासन ने चीनी भाषा न आने पर इस समाज के लोगों को नौकरी देने से ही मना कर दिया।
इतना ही नहीं, इस आलेख में दावा किया गया है कि चीन में कैद किए जाने वाले उइगर लोगों के अंग भंग भी कर दिये जाते हैं और उनके अंगों की तस्करी तक की जाती है। आलेख लिखने वाली महिला का कहना है कि चीन में उइगर मुसलमानों के घर के बाहर क्यूआर कोड लगे होते हैं जिससे उनके घर की पूरी निगरानी की जाती है।
लेकिन सवाल उठता है कि भारत के मुस्लिम, इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर तो जमकर मुस्लिमों का साथ लेते हैं और इजरायल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ वहां की सरकार बेइंतेहा जुल्म कर रही है पर भारतीय मुस्लिम उसका विरोध नहीं करते हैं।
वहीं बुरे तरीके से आर्थिक संकट में घिरा पाकिस्तान भी चीन के सामने मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा नहीं उठाता है, क्योंकि सभी जानते हैं कि इस समय चीन के कर्ज़े पर ही पाकिस्तान की अर्थव्यस्था टिकी हुई है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यह दोहरा रवैया क्यों?
हालांकि समय-समय पर चीनी शासन उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार की ख़बरों को सिरे से नकारता रहा है, लेकिन बड़ा सवाल है कि आख़िर क्यों चीन उइगर लोगों के दूसरे देशों के जाने पर नज़र बनाए रखता है और वहां की सरकार पर उइगर लोगों को डिपोर्ट करने का दबाव डालता है। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब चीनी सरकार को देने चाहिए।