जानिए आपके लिए क्यों ज़रूरी है अपनी गाड़ी का बीमा
Wednesday - September 19, 2018 10:48 am ,
Category : WTN HINDI
एक सितम्बर से व्हीकल इंश्योरेन्स के नये नियम हो चुके हैं लागू
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गाड़ियों के लिए लॉन्ग-टर्म थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स हो गया है अनिवार्य
SEP 19 (SEP) – आज हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों आपके लिए अपनी गाड़ी का बीमा करना ज़रूरी है। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक सितम्बर 2018 से बाइक के लिए तीन साल और कार के लिए पांच साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेन्स लेना ज़रूरी हो गया है। काफ़ी लोग जानना चाहते हैं कि आखिर एक के बजाय तीन और पांच साल की बाध्यता क्यों रखी गई है। तो हम बता दें कि इसके पीछे बहुत से कारण हैं, जिनमें से एक कारण है आपका फ़ायदा। आखिर क्या है आपका फ़ायदा, और इसे एक साल से बढ़ाकर क्यों तीन और पांच साल किया गया है, आइये आपको बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी जनरल इंश्योरर्स के लिए एक सितम्बर या उसके बाद बेचे जाने वाले नए वाहनों के लिए लॉन्ग-टर्म थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स देना अनिवार्य कर दिया है। यानि कि अगर आप एक फ़ोर व्हीलर खरीदते हैं, तो आपको तीन साल के लिए थर्ड-पार्टी लायबिलिटी वाले मोटर इंश्योरेन्स प्रीमियम का भुगतान करना होगा। वहीं टू व्हीलर्स के मामले में पांच साल के लिए प्रीमियम लायबिलिटी का भुगतान करना होगा।
नियमों के अनुसार, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स के बिना भारत में वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स से आपके मालिकाना हक वाले वाहन के चलते यदि किसी तीसरे पक्ष की सम्पत्ति या वाहन को नुकसान होता है तो उसका कवर मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से वाहनों को लॉन्ग-टर्म कवर मिलना सुनिश्चित होगा। ऐसा होने से वाहन मालिकों को हर साल इंश्योरेन्स को रिन्यूअल कराने से मुक्ति मिलेगी और सड़कों पर चलने वाले बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्हीकल इंश्योरेन्स के दो भाग होते हैं। एक थर्ड-पार्टी और दूसरा ओन डैमेज (ख़ुद का नुकसान)। ओन डैमेज कम्पोनेन्ट के लिए प्रीमियम में किसी भी तरह का कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। वहीं थर्ड-पार्टी कम्पोनेन्ट के लिए प्रीमियम का निर्धारण इरडा (IRDA) द्वारा किया गया है, जो कि तीन से पांच साल के लिए समान रहेगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि नए वाहन खरीददारों के लिए शुरुआती प्रीमियम अधिक होगा, क्योंकि प्रीमियम का भुगतान एक से ज़्यादा वर्षों के लिए होगा। हालांकि, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स के लिए प्रीमियम की राशि सस्ती होगी क्योंकि इरडा द्वारा सालाना आधार पर दरों का निर्धारण किया जाएगा।
अब एक काम की बात, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स में ओन डैमेज (खुद का नुकसान) कवर नहीं होता है। हमारी आपको सलाह है कि आप कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स लें। कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स जिसमें थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स शामिल है, इसमें दुर्घटना के साथ-साथ चोरी, सेंधमारी, आगजनी, दंगा, प्राकृतिक आपदा, आदि के ख़िलाफ़ भी कवर प्रदान किया जाता है। इस पॉलिसी का प्रीमियम कार के मॉडल, वाहन के उद्देश्य, कार की सेफ़्टी डिवाइस और इंश्योरेन्स ज़ोन को देखकर किया जाता है।
हमारी आपको सलाह है कि आप बिना कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स के सड़क पर गाड़ी ना चलाएं। आप अपनी गाड़ी का ऐसा बीमा कराएं, जिससे आपको और सामने वाले व्यक्ति या उसकी गाड़ी या सम्पत्ति का कोई भी नुकसान होता है तो उसका पूरा कवर हो। आपको बीमा का प्रीमियम महंगा ज़रूर लगेगा, लेकिन यदि कोई दुर्घटना होती है तो यही बीमा आपका सबसे बड़ा सहारा होता है।
SEP 19 (SEP) – आज हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों आपके लिए अपनी गाड़ी का बीमा करना ज़रूरी है। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक सितम्बर 2018 से बाइक के लिए तीन साल और कार के लिए पांच साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेन्स लेना ज़रूरी हो गया है। काफ़ी लोग जानना चाहते हैं कि आखिर एक के बजाय तीन और पांच साल की बाध्यता क्यों रखी गई है। तो हम बता दें कि इसके पीछे बहुत से कारण हैं, जिनमें से एक कारण है आपका फ़ायदा। आखिर क्या है आपका फ़ायदा, और इसे एक साल से बढ़ाकर क्यों तीन और पांच साल किया गया है, आइये आपको बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी जनरल इंश्योरर्स के लिए एक सितम्बर या उसके बाद बेचे जाने वाले नए वाहनों के लिए लॉन्ग-टर्म थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स देना अनिवार्य कर दिया है। यानि कि अगर आप एक फ़ोर व्हीलर खरीदते हैं, तो आपको तीन साल के लिए थर्ड-पार्टी लायबिलिटी वाले मोटर इंश्योरेन्स प्रीमियम का भुगतान करना होगा। वहीं टू व्हीलर्स के मामले में पांच साल के लिए प्रीमियम लायबिलिटी का भुगतान करना होगा।
नियमों के अनुसार, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स के बिना भारत में वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स से आपके मालिकाना हक वाले वाहन के चलते यदि किसी तीसरे पक्ष की सम्पत्ति या वाहन को नुकसान होता है तो उसका कवर मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से वाहनों को लॉन्ग-टर्म कवर मिलना सुनिश्चित होगा। ऐसा होने से वाहन मालिकों को हर साल इंश्योरेन्स को रिन्यूअल कराने से मुक्ति मिलेगी और सड़कों पर चलने वाले बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्हीकल इंश्योरेन्स के दो भाग होते हैं। एक थर्ड-पार्टी और दूसरा ओन डैमेज (ख़ुद का नुकसान)। ओन डैमेज कम्पोनेन्ट के लिए प्रीमियम में किसी भी तरह का कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। वहीं थर्ड-पार्टी कम्पोनेन्ट के लिए प्रीमियम का निर्धारण इरडा (IRDA) द्वारा किया गया है, जो कि तीन से पांच साल के लिए समान रहेगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि नए वाहन खरीददारों के लिए शुरुआती प्रीमियम अधिक होगा, क्योंकि प्रीमियम का भुगतान एक से ज़्यादा वर्षों के लिए होगा। हालांकि, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स के लिए प्रीमियम की राशि सस्ती होगी क्योंकि इरडा द्वारा सालाना आधार पर दरों का निर्धारण किया जाएगा।
अब एक काम की बात, थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स में ओन डैमेज (खुद का नुकसान) कवर नहीं होता है। हमारी आपको सलाह है कि आप कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स लें। कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स जिसमें थर्ड-पार्टी इंश्योरेन्स शामिल है, इसमें दुर्घटना के साथ-साथ चोरी, सेंधमारी, आगजनी, दंगा, प्राकृतिक आपदा, आदि के ख़िलाफ़ भी कवर प्रदान किया जाता है। इस पॉलिसी का प्रीमियम कार के मॉडल, वाहन के उद्देश्य, कार की सेफ़्टी डिवाइस और इंश्योरेन्स ज़ोन को देखकर किया जाता है।
हमारी आपको सलाह है कि आप बिना कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेन्स के सड़क पर गाड़ी ना चलाएं। आप अपनी गाड़ी का ऐसा बीमा कराएं, जिससे आपको और सामने वाले व्यक्ति या उसकी गाड़ी या सम्पत्ति का कोई भी नुकसान होता है तो उसका पूरा कवर हो। आपको बीमा का प्रीमियम महंगा ज़रूर लगेगा, लेकिन यदि कोई दुर्घटना होती है तो यही बीमा आपका सबसे बड़ा सहारा होता है।