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आख़िर क्यों कांग्रेस से नाराज़ है निर्वाचन आयोग?

Wednesday - September 19, 2018 12:28 pm , Category : WTN HINDI
जब निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के नेताओं को सुनाई खरी खरी
जब निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के नेताओं को सुनाई खरी खरी

निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था, इसके कामकाज में किसी भी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं – निर्वाचन आयोग

SEP 19 (WTN) – निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस को खरी-खरी सुनाते हुए साफ़ कर दिया है कि निर्वाचन आयोग चुनाव कराने के लिए एक संवैधानिक संस्था है और वो अपने तरीके से चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर मामला क्या है। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस नेता समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाते रहते हैं, जिसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस नेताओं को साफ़ कर दिया कि चुनाव कराने के लिए वे हैं।
 
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है, “कांग्रेस या उसके नेता जैसा चाहते हैं, उस तरीके से देश में चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग बाध्य नहीं है।“ मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की ओर से दायर याचिका का विरोध करते हुए निर्वाचन आयोग ने साफ़ किया है कि निर्वाचन आयोग को नियमों और कानून के अनुसार काम करना है क्योंकि वो एक संवैधानिक निकाय है। निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करना है।
 
निर्वाचन आयोग की ओर से दायर हलफ़नामे में कहा गया है, “भारत के निर्वाचन आयोग के काम करने के तरीके पर प्रश्न करना याचिकाकर्ता/ या उनकी पार्टी / संगठन के क्षेत्राधिकार में नहीं है।“ हलफ़नामे में आगे कहा गया है कि कमलनाथ और उनकी पार्टी कांग्रेस एक ही मुद्दे को बार-बार उठाकर सुप्रीम कोर्ट का समय खराब नहीं कर सकते हैं, साथ ही निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक निकाय के कामकाज में हस्तक्षेप भी नहीं कर सकते हैं।
 
अपनी नाराज़गी जताते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा, “कमलनाथ और उनकी पार्टी भारत के निर्वाचन आयोग को किसी विशेष तरीके से चुनाव आयोजित करने के लिए निर्देशित नहीं कर सकते हैं।“ इतना ही नहीं निर्वाचन आयोग ने कहा, “याचिका में आयोग पर लगाए गए आरोप गलत और बेबुनियाद हैं, क्योंकि वह निर्वाचन आयोग को अपनी निजी इच्छाओं और प्रशंसकों के अनुसार चुनाव करने के लिए निर्देशित कर रहे हैं।“
 
इतना ही नहीं, अपने हलफनामें में निर्वाचन आयोग ने कहा है, “याचिकाकर्ता और राजनीतिक दल/ संगठन द्वारा दिए गए सुझावों को स्वीकार करने के लिए निर्वाचन आयोग को बाध्य नहीं किया जा सकता है।“
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकसभा चुनाव में करारी हार और उसके बाद विधानसभा चुनावों में लगातार शिकस्त के बाद कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने ईवीएम और वीवीपीएटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत की थी और मांग की थी कि चुनाव बैलेट पेपेर से कराए जाएं।
 
समय समय पर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाते हुए राजननीतिक दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लगाई हैं, जिसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने साफ़ किया है कि वो चुनाव कराने के लिए एक संवैधानिक संस्था है और चुनाव कराना उसका विशेषाधिकार है जिसमें किसी का भी हस्तेक्षप स्वीकार नहीं है।
 
कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी, वहीं कई उपचुनावों में भी उसे जीत हासिल हुई है, तब कांग्रेस ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया। लेकिन जिस चुनाव में कांग्रेस की हार होती है कांग्रेस वहां पर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर देती है।
 
कांग्रेस के आधारहीन विरोध के कारण निर्वाचन आयोग ने नाराज़गी ज़ाहिर की है। कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर सवाल खड़े करके कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है।
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