बड़ा सवाल: क्या शराब पर टैक्स बढ़ाकर पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम करना एक अच्छा विकल्प है?
Thursday - September 20, 2018 3:15 pm ,
Category : WTN HINDI
पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम करने ‘नया फॉर्मूला’
पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों से जनता परेशान, महाराष्ट्र में शराब पर टैक्स बढ़ाकर जनता को राहत देने की कवायद
SEP 20 (WTN) – डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर होते रुपये और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में महंगे होते क्रूड ऑयल के कारण लगभग हर दिन भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं। पेट्रोल और डीज़ल के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं जिस कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार पेट्रोल के दाम घटाने को लेकर नई योजना लाने पर विचार कर रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, अपनी इस योजना के तहत महाराष्ट्र सरकार देश में बनी हुई विदेशी शराब पर एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि शराब पर टैक्स बढ़ाकर सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स घटाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र में IMFL (Indian Made Foreign Liquor) यानि की भारत में बनी विदेशी शराब पर साल 2013 से टैक्स में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार विचार कर रही है कि आईएमएफ़एल पर आबकारी शुल्क बढ़ाया जाए, जिससे सरकार को अधिक राजस्व मिल सके। सरकार इस बढ़े हुए राजस्व का उपयोग करके पेट्रोल और डीज़ल पर करों में कटौती कर सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने बियर पर साल 2017 में एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाई थी। वहीं देशी शराब और मिलिट्री कैंटीन में मिलने वाली शराब पर साल 2015 में ड्यूटी बढ़ाई गई थी। ऊंचे वैट टैक्स और अन्य कारणों से महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमतें पूरे देश में सबसे ज़्यादा है। महाराष्ट्र की राज्य सरकार देश के किसी भी राज्य के मुक़ाबले पेट्रोल और डीज़ल पर सबसे ज्यादा वैट वसूलती है। महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल 91.6 रुपए प्रति लीटर में मिल रहा है, तो वहीं डीज़ल 80 रुपए के करीब पहुंच गया है।
मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के कुछ सुझाव लोगों ने सरकार को दिए हैं कि शराब पर आबकारी शुल्क बढ़ा दिया जाए और उससे जो राजस्व मिले उसका उपयोग पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स कम कर किया जा सकता है। खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी राज्य की शिवराज सरकार को सुझाव दिया है कि जो टैक्स सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर जनता से वसूल रही है, वही टैक्स वो शराब पर लगाकर भी वसूल सकती है। इससे राजस्व का घाटा भी नहीं होगा और लोगों को राहत भी मिलेगी।
खैर हर कोई यह सुझाव दे रहा है कि शराब पर टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाया जाए और उससे पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम किये जाएं। कहने को यह सुझाव बड़े अच्छे हैं, लेकिन हक़ीकत है पेट्रोल-डीज़ल की ख़पत की तुलना में शराब की खपत उतनी नहीं है जितने राजस्व की कल्पना की जा रही है। यदि पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम करना है तो उसका एक ही उपाय है, सरकार को ग़ैर ज़रूरी खर्चों को कम करना चाहिए और लोक लुभावन योजनाओं को खत्म कर देना चाहिए।
SEP 20 (WTN) – डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर होते रुपये और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में महंगे होते क्रूड ऑयल के कारण लगभग हर दिन भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं। पेट्रोल और डीज़ल के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं जिस कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार पेट्रोल के दाम घटाने को लेकर नई योजना लाने पर विचार कर रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, अपनी इस योजना के तहत महाराष्ट्र सरकार देश में बनी हुई विदेशी शराब पर एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि शराब पर टैक्स बढ़ाकर सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स घटाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र में IMFL (Indian Made Foreign Liquor) यानि की भारत में बनी विदेशी शराब पर साल 2013 से टैक्स में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार विचार कर रही है कि आईएमएफ़एल पर आबकारी शुल्क बढ़ाया जाए, जिससे सरकार को अधिक राजस्व मिल सके। सरकार इस बढ़े हुए राजस्व का उपयोग करके पेट्रोल और डीज़ल पर करों में कटौती कर सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने बियर पर साल 2017 में एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाई थी। वहीं देशी शराब और मिलिट्री कैंटीन में मिलने वाली शराब पर साल 2015 में ड्यूटी बढ़ाई गई थी। ऊंचे वैट टैक्स और अन्य कारणों से महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमतें पूरे देश में सबसे ज़्यादा है। महाराष्ट्र की राज्य सरकार देश के किसी भी राज्य के मुक़ाबले पेट्रोल और डीज़ल पर सबसे ज्यादा वैट वसूलती है। महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल 91.6 रुपए प्रति लीटर में मिल रहा है, तो वहीं डीज़ल 80 रुपए के करीब पहुंच गया है।
मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के कुछ सुझाव लोगों ने सरकार को दिए हैं कि शराब पर आबकारी शुल्क बढ़ा दिया जाए और उससे जो राजस्व मिले उसका उपयोग पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स कम कर किया जा सकता है। खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी राज्य की शिवराज सरकार को सुझाव दिया है कि जो टैक्स सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर जनता से वसूल रही है, वही टैक्स वो शराब पर लगाकर भी वसूल सकती है। इससे राजस्व का घाटा भी नहीं होगा और लोगों को राहत भी मिलेगी।
खैर हर कोई यह सुझाव दे रहा है कि शराब पर टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाया जाए और उससे पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम किये जाएं। कहने को यह सुझाव बड़े अच्छे हैं, लेकिन हक़ीकत है पेट्रोल-डीज़ल की ख़पत की तुलना में शराब की खपत उतनी नहीं है जितने राजस्व की कल्पना की जा रही है। यदि पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम करना है तो उसका एक ही उपाय है, सरकार को ग़ैर ज़रूरी खर्चों को कम करना चाहिए और लोक लुभावन योजनाओं को खत्म कर देना चाहिए।