शिवराज सिंह का खुद की ही पार्टी में ‘विरोध’ शुरू, सांसद उदित राज ने कहा, “एससी-एसटी एक्ट में जांच के बाद गिरफ़्तारी वाला बयान वापस लें शिवराज”
Friday - September 21, 2018 1:05 pm ,
Category : WTN HINDI
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद बुरी ‘फंसी’ भाजपा
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सवर्ण और पिछड़ा वर्ग का ‘विरोध’ जारी, विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेताओं को आया ‘पसीना’
SEP (WTN) – एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधन के बाद ‘विरोध’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे मामले में यदि सबसे ज़्यादा ‘किरकिरी’ हो रही है तो भाजपा की। बात करें मध्य प्रदेश की तो यहां पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग दोनों ही वर्ग ‘खुलकर’ एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सामने आ गए हैं। चूंकि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, इसलिए भाजपा नेताओं को जगह-जगह ‘विरोध’ का सामना करना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश में सामान्य और पिछड़ा वर्ग का वोटबैंक क़रीब 60 प्रतिशत से ज़्यादा है, और वे इस स्थिति में है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार आसानी से गिरा सकते हैं। ऐसे में इन वर्गों का गुस्सा देखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल एक ट्वीट के ज़रिये इन लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की थी। लेकिन लगता है कि शिवराज सिंह का यह दांव ‘उल्टा’ पड़ गया है क्योंकि उन्हीं के पार्टी के सांसद और केन्द्र में सहयोगी पार्टी के एक मंत्री ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
कल शाम को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के लोगों का ‘भरोसा’ जीतने की कोशिश की थी। अपने ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा था, “एमपी में नहीं होगा एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग, बिना जांच के नहीं होगी गिरफ़्तारी।“
शिवराज सिंह चौहान के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में भाजपा समर्थकों ने ‘प्रचारित’ करना शुरू कर दिया कि मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच की गिरफ़्तारी नहीं होगी। लेकिन शिवराज सिंह के इस कदम का उन्हीं की पार्टी में ‘विरोध’ शुरू हो गया है।
भाजपा सांसद उदित राज का इस बारे में कहना है, “इस मामले में मैं तकलीफ़ महसूस कर रहा हूं कि ऐसा बयान क्यों दिया है। हमारी सरकार कानून मज़बूत करती है और हमारे मुख्यमंत्री उसे कमज़ोर करते हैं। इससे बड़ी बेचैनी महसूस कर रहा हूं।“
आगे सांसद उदित राज ने कहा, “मैं बात पार्टी में भी रखूंगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बातचीत करूंगा। मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी बात करूंगा। मैं शिवराज सिंह चौहान को कहूंगा कि वह इस मामले को वापस लें, इस बयान को वापस लें।”
इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान के ख़िलाफ़ आरपीआई नेता और केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले भी उतर गए हैं। अठावले ने कहा, “हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान ने अपना बयान अगड़ी जातियों को खुश करने के लिए दिया हो। लेकिन उन्हें ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए जिससे अनुसूचित जाति के लोगों में भय या असुरक्षा की भावना पैदा हो।“ अठावले ने आगे कहा, “शिवराज सिंह चौहान को अपना बयान वापस लेना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री अगड़े और पिछड़े दोनों के लिए होते हैं।“
धीरे-धीरे भाजपा के लिए एससी-एसटी एक्ट में संशोधन एक बड़ी ‘मुसीबत’ बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश में कुछ ही दिनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि एससी-एसटी एक्ट में कोई बड़ा फैसला भाजपा ने सवर्णों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में नहीं उठाया तो यह वर्ग भाजपा को 2018 के विधानसभा चुनाव में ‘करारी शिकस्त’ दे सकता है।
सवर्ण, पिछड़ा और अल्पसंख्यकों को वोटबैंक मध्य प्रदेश में क़रीब 60 प्रतिशत से ज़्यादा है। सवर्ण और पिछड़े हमेशा से भाजपा के परम्परागत वोट बैंक रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से यह वर्ग भाजपा से काफ़ी नाराज़ चल रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने इस एक्ट में बिना जांच के गिरफ़्तारी की बात कहकर इस वर्ग को खुश करने की कोशिश तो की है, लेकिन ऐसा होता है तो जिस अनुसूचित जाति के वोटों के लिए भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले तक को बदल दिया है वो उससे नाराज़ हो जाएगा।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज सवर्ण और पिछड़ा समाज ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने तक की बात कह दी है। जगह-जगह पर मध्य प्रदेश में मंत्रियों और भाजपा सांसदों-विधायकों का विरोध हो रहा है। लगता है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके भाजपा ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।
SEP (WTN) – एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधन के बाद ‘विरोध’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे मामले में यदि सबसे ज़्यादा ‘किरकिरी’ हो रही है तो भाजपा की। बात करें मध्य प्रदेश की तो यहां पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग दोनों ही वर्ग ‘खुलकर’ एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सामने आ गए हैं। चूंकि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, इसलिए भाजपा नेताओं को जगह-जगह ‘विरोध’ का सामना करना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश में सामान्य और पिछड़ा वर्ग का वोटबैंक क़रीब 60 प्रतिशत से ज़्यादा है, और वे इस स्थिति में है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार आसानी से गिरा सकते हैं। ऐसे में इन वर्गों का गुस्सा देखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल एक ट्वीट के ज़रिये इन लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की थी। लेकिन लगता है कि शिवराज सिंह का यह दांव ‘उल्टा’ पड़ गया है क्योंकि उन्हीं के पार्टी के सांसद और केन्द्र में सहयोगी पार्टी के एक मंत्री ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
कल शाम को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के लोगों का ‘भरोसा’ जीतने की कोशिश की थी। अपने ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा था, “एमपी में नहीं होगा एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग, बिना जांच के नहीं होगी गिरफ़्तारी।“
शिवराज सिंह चौहान के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में भाजपा समर्थकों ने ‘प्रचारित’ करना शुरू कर दिया कि मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच की गिरफ़्तारी नहीं होगी। लेकिन शिवराज सिंह के इस कदम का उन्हीं की पार्टी में ‘विरोध’ शुरू हो गया है।
भाजपा सांसद उदित राज का इस बारे में कहना है, “इस मामले में मैं तकलीफ़ महसूस कर रहा हूं कि ऐसा बयान क्यों दिया है। हमारी सरकार कानून मज़बूत करती है और हमारे मुख्यमंत्री उसे कमज़ोर करते हैं। इससे बड़ी बेचैनी महसूस कर रहा हूं।“
आगे सांसद उदित राज ने कहा, “मैं बात पार्टी में भी रखूंगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बातचीत करूंगा। मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी बात करूंगा। मैं शिवराज सिंह चौहान को कहूंगा कि वह इस मामले को वापस लें, इस बयान को वापस लें।”
इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान के ख़िलाफ़ आरपीआई नेता और केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले भी उतर गए हैं। अठावले ने कहा, “हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान ने अपना बयान अगड़ी जातियों को खुश करने के लिए दिया हो। लेकिन उन्हें ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए जिससे अनुसूचित जाति के लोगों में भय या असुरक्षा की भावना पैदा हो।“ अठावले ने आगे कहा, “शिवराज सिंह चौहान को अपना बयान वापस लेना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री अगड़े और पिछड़े दोनों के लिए होते हैं।“
धीरे-धीरे भाजपा के लिए एससी-एसटी एक्ट में संशोधन एक बड़ी ‘मुसीबत’ बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश में कुछ ही दिनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यदि एससी-एसटी एक्ट में कोई बड़ा फैसला भाजपा ने सवर्णों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में नहीं उठाया तो यह वर्ग भाजपा को 2018 के विधानसभा चुनाव में ‘करारी शिकस्त’ दे सकता है।
सवर्ण, पिछड़ा और अल्पसंख्यकों को वोटबैंक मध्य प्रदेश में क़रीब 60 प्रतिशत से ज़्यादा है। सवर्ण और पिछड़े हमेशा से भाजपा के परम्परागत वोट बैंक रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से यह वर्ग भाजपा से काफ़ी नाराज़ चल रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने इस एक्ट में बिना जांच के गिरफ़्तारी की बात कहकर इस वर्ग को खुश करने की कोशिश तो की है, लेकिन ऐसा होता है तो जिस अनुसूचित जाति के वोटों के लिए भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले तक को बदल दिया है वो उससे नाराज़ हो जाएगा।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज सवर्ण और पिछड़ा समाज ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने तक की बात कह दी है। जगह-जगह पर मध्य प्रदेश में मंत्रियों और भाजपा सांसदों-विधायकों का विरोध हो रहा है। लगता है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके भाजपा ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।