नवम्बर से ईरान को भारतीय रुपये में होगा कच्चे तेल का पेमेंट, बड़ा सवाल, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीज़ल?
Friday - September 21, 2018 3:22 pm ,
Category : WTN HINDI
भारतीय रुपये में भुगतान लेने तैयार हुआ ईरान
भारत रुपये में करेगा ईरान को क्रूड ऑयल का भुगतान, यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक के ज़रिये होगा भुगतान
SEP 21 (WTN) – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होते रुपये और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में महंगे होते क्रूड ऑयल के कारण लगभग हर दिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपया और भी कमज़ोर होगा साथ ही क्रूड ऑयल भी महंगा होगा ऐसे में भारत में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर तक जा सकते हैं।
लेकिन यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो नवम्बर के बाद भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम होने की आशा की जा रही है। इसका कारण है कि भारत, ईरान से आयातित तेल का भुगतान भारतीय रुपयों में करेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध चार नवम्बर से लागू हो रहे हैं। जिसके बाद ईरान के साथ बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल करते हुये अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना मुश्किल होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय तेल कम्पनियां अभी भारतीय स्टेट बैंक और जर्मनी की एक बैंक के माध्यम से ईरान को यूरो में तेल का भुगतान कर रही हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध को देखने हुए एसबीआई ने तेल कम्पनियों से कह दिया है कि वह नवम्बर से अपना भुगतान रोक देगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक ईरान तेल के लिये भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार है। ईरान इस राशि का इस्तेमाल भारत से खरीदे जाने वाले उपकरणों और खाद्य पदार्थों के भुगतान के लिए कर सकता है। इस सबके बीच ईरान को भुगतान के लिए यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक को चुना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में दोनों की उपस्थिति ना के बराबर है। भारत इस समय ईरान को यूरोपीय बैंकिंग चैनल के ज़रिये यूरो में भुगतान करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ये चैनल नवम्बर के काम करना बंद कर देंगे।
अपने तीसरे सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता देश ईरान से कच्चा तेल लेने के लिए भारत के तेलशोधक कारखानों ने सितम्बर के अलावा अक्तूबर के लिए भी तेल की बुकिंग करायी है। चुंकि ईरान भुगतान के लिए 60 दिन का समय देता है, ऐसे में सितम्बर में खरीदे गए तेल का भुगतान नवम्बर में होगा। इसलिए भारत नवम्बर से अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद भारतीय रुपयों में भुगतान कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसी साल मई के महीने में घोषणा की थी कि अमेरिका, ईरान के साथ 2015 के परमाणु करार से पीछे हट रहा है और उस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। ईरान पर अमेरिका के कुछ प्रतिबंध छह अगस्त से लागू हो गए हैं, जबकि तेहरान के तेल एवं बैंकिंग सेक्टर से जुड़े प्रतिबंध चार नवम्बर से प्रभावी होंगे।
लेकिन बड़ा सवाल है कि ईरान को भारतीय रुपये में कच्चे तेल का भुगतान करने के बाद क्या भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम होंगे। वैसे भारत ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ईरान से ढाई करोड़ टन कच्चे तेल के आयात की योजना बनाई थी जो कि पिछले साल के 2.26 करोड़ टन के मुकाबले ज़्यादा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि वास्तविक आयात इससे कहीं कम होने का अनुमान है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कम्पनियों ने ईरान से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है, वहीं कुछ और कम्पनियां भी आयात में काफ़ी कमी कर रही हैं।
अब चुंकि ईरान को भारतीय रुपये में भुगतान जाएगा, इसलिए आशा है कि शायद ईरान से आयात किया जाने वाला तेल सस्ता मिले। यदि ऐसा होता है तो भारतीय जनता को काफ़ी राहत मिल सकती है। लेकिन देखना होगा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से कच्चे तेल का आयात सुचारू रूप से चालू रह पाता है कि नहीं। यदि आयात चालू रहा और भारतीय रुपयों में भुगतान होता रहा तो हो सकता है कि देश में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम हो जाएं।
SEP 21 (WTN) – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होते रुपये और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में महंगे होते क्रूड ऑयल के कारण लगभग हर दिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपया और भी कमज़ोर होगा साथ ही क्रूड ऑयल भी महंगा होगा ऐसे में भारत में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर तक जा सकते हैं।
लेकिन यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो नवम्बर के बाद भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम होने की आशा की जा रही है। इसका कारण है कि भारत, ईरान से आयातित तेल का भुगतान भारतीय रुपयों में करेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध चार नवम्बर से लागू हो रहे हैं। जिसके बाद ईरान के साथ बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल करते हुये अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना मुश्किल होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय तेल कम्पनियां अभी भारतीय स्टेट बैंक और जर्मनी की एक बैंक के माध्यम से ईरान को यूरो में तेल का भुगतान कर रही हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध को देखने हुए एसबीआई ने तेल कम्पनियों से कह दिया है कि वह नवम्बर से अपना भुगतान रोक देगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक ईरान तेल के लिये भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार है। ईरान इस राशि का इस्तेमाल भारत से खरीदे जाने वाले उपकरणों और खाद्य पदार्थों के भुगतान के लिए कर सकता है। इस सबके बीच ईरान को भुगतान के लिए यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक को चुना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में दोनों की उपस्थिति ना के बराबर है। भारत इस समय ईरान को यूरोपीय बैंकिंग चैनल के ज़रिये यूरो में भुगतान करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ये चैनल नवम्बर के काम करना बंद कर देंगे।
अपने तीसरे सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता देश ईरान से कच्चा तेल लेने के लिए भारत के तेलशोधक कारखानों ने सितम्बर के अलावा अक्तूबर के लिए भी तेल की बुकिंग करायी है। चुंकि ईरान भुगतान के लिए 60 दिन का समय देता है, ऐसे में सितम्बर में खरीदे गए तेल का भुगतान नवम्बर में होगा। इसलिए भारत नवम्बर से अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद भारतीय रुपयों में भुगतान कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसी साल मई के महीने में घोषणा की थी कि अमेरिका, ईरान के साथ 2015 के परमाणु करार से पीछे हट रहा है और उस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। ईरान पर अमेरिका के कुछ प्रतिबंध छह अगस्त से लागू हो गए हैं, जबकि तेहरान के तेल एवं बैंकिंग सेक्टर से जुड़े प्रतिबंध चार नवम्बर से प्रभावी होंगे।
लेकिन बड़ा सवाल है कि ईरान को भारतीय रुपये में कच्चे तेल का भुगतान करने के बाद क्या भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम होंगे। वैसे भारत ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ईरान से ढाई करोड़ टन कच्चे तेल के आयात की योजना बनाई थी जो कि पिछले साल के 2.26 करोड़ टन के मुकाबले ज़्यादा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि वास्तविक आयात इससे कहीं कम होने का अनुमान है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कम्पनियों ने ईरान से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है, वहीं कुछ और कम्पनियां भी आयात में काफ़ी कमी कर रही हैं।
अब चुंकि ईरान को भारतीय रुपये में भुगतान जाएगा, इसलिए आशा है कि शायद ईरान से आयात किया जाने वाला तेल सस्ता मिले। यदि ऐसा होता है तो भारतीय जनता को काफ़ी राहत मिल सकती है। लेकिन देखना होगा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से कच्चे तेल का आयात सुचारू रूप से चालू रह पाता है कि नहीं। यदि आयात चालू रहा और भारतीय रुपयों में भुगतान होता रहा तो हो सकता है कि देश में पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम हो जाएं।