भारत के लिए मालदीव से आई ‘खुशख़बरी’, ‘भारत समर्थित’ इब्राहिम सोलिह की राष्ट्रपति चुनाव में जीत
Monday - September 24, 2018 10:55 am ,
Category : WTN HINDI
मालदीव में ‘दमन’ का अंत, ‘लोकतंत्र’ की जीत
मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में ‘चीन समर्थक’ अब्दुल्ला यामीन की हार, भारत और अमेरिका ने जताई 'खुशी'
SEP 24 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश मालदीव से भारत के लिए एक ‘बढ़िया’ ख़बर आई है। ‘गड़बड़ी’ की तमाम ‘आशंकाओं’ के बीच हुए मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार इब्राहीम मोहम्मद सोलिह ने जीत हासिल की है। भारत के लिहाज़ से सोहिल की जीत ‘काफ़ी महत्वपूर्ण’ मानी जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक वहां के चुनाव आयोग के अनुसार, विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार इब्राहीम मोहम्मद सोलिह क़रीब 58.3 प्रतिशत वोटों के साथ विजयी हुए हैं।
भारत के लिहाज़ से यह जीत इसलिए ‘काफ़ी महत्वपूर्ण’ है, क्योंकि चुनाव में ‘चीन समर्थक’ माने जाने वाले निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की ‘हार’ हुई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों के अनुसार, सोलिह को 1,33,808 वोट और अब्दुल्ला यामीन को 95,526 वोट मिले हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मालदीव में हुए राष्ट्रपति चुनाव में इन दोनों के अलावा अन्य कोई उम्मीदवार ‘नहीं’ था, क्योंकि ज़्यादातार बागी नेता या तो जेल में हैं या देश से बाहर निर्वासन में।
भारत ने इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की जीत का ‘स्वागत’ किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, “हम इब्राहीम मोहम्मद सोलिह को तहेदिल से बधाई देते हैं। यह न सिर्फ़ मालदीव में लोकतांत्रिक ताकतों की जीत है, बल्कि वहां लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाता है।“
मालदीव में लगातार बढ़ रहे चीन के दबदबे से चिंतित अमेरिका ने भी मालदीव में शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न होने के लिए वहां की जनता को बधाई दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नाउर्ट ने इस बारे में कहा है, “अमेरिका मालदीव की जनता को बधाई देता है, जिन्होंने अपने देश के भविष्य के निर्धारण के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ उठाई है।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के दक्षिण में स्थित छोटे से देश मालदीव में लगातार विपक्ष के ‘दमन’ और लोगों की लोकतांत्रिक आज़ादी ‘छीनने’ की वजह से यामीन प्रशासन की पूरी दुनिया में काफ़ी ‘आलोचना’ हो रही थी। यामीन प्रशासन ने अदालतों पर भी अंकुश लगाया था और विरोधियों को जेल में डाल दिया था। इसी कारण से पूरी दुनिया को इन चुनावों के स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होने पर भी ‘संदेह’ था।
भारत के दृष्टिकोण से ‘चीन समर्थित’ यामीन की हार और ‘भारत समर्थित’ सोलिह की जीत काफ़ी महत्वपूर्ण है। काफ़ी समय से यामीन चीन के प्रभाव में ऐसी नीतियों को बढ़ावा दे रहे थे जो कि भारत ‘विरोधी’ थीं। कुछ समय पहले मालदीप ने भारत के दिए हैलिकॉप्टर और भारतीय नौसेना की एक टुकड़ी को वापस भारत जाने के निर्देश दिये थे। समय-समय पर मालदीव ऐसे कदम उठा रहा था जो कि भारत के ‘हितों के विपरीत’ थे। अब जबकि भारत समर्थित सोलिह की जीत हुए है, तो ऐसे में आशा की जा रही है कि मालदीव में चीन का दख़ल कम होगा और वहां से भारत विरोधी गतिविधियां पर ‘लगाम’ लगेगी।
SEP 24 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश मालदीव से भारत के लिए एक ‘बढ़िया’ ख़बर आई है। ‘गड़बड़ी’ की तमाम ‘आशंकाओं’ के बीच हुए मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार इब्राहीम मोहम्मद सोलिह ने जीत हासिल की है। भारत के लिहाज़ से सोहिल की जीत ‘काफ़ी महत्वपूर्ण’ मानी जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक वहां के चुनाव आयोग के अनुसार, विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार इब्राहीम मोहम्मद सोलिह क़रीब 58.3 प्रतिशत वोटों के साथ विजयी हुए हैं।
भारत के लिहाज़ से यह जीत इसलिए ‘काफ़ी महत्वपूर्ण’ है, क्योंकि चुनाव में ‘चीन समर्थक’ माने जाने वाले निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की ‘हार’ हुई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों के अनुसार, सोलिह को 1,33,808 वोट और अब्दुल्ला यामीन को 95,526 वोट मिले हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मालदीव में हुए राष्ट्रपति चुनाव में इन दोनों के अलावा अन्य कोई उम्मीदवार ‘नहीं’ था, क्योंकि ज़्यादातार बागी नेता या तो जेल में हैं या देश से बाहर निर्वासन में।
भारत ने इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की जीत का ‘स्वागत’ किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, “हम इब्राहीम मोहम्मद सोलिह को तहेदिल से बधाई देते हैं। यह न सिर्फ़ मालदीव में लोकतांत्रिक ताकतों की जीत है, बल्कि वहां लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाता है।“
मालदीव में लगातार बढ़ रहे चीन के दबदबे से चिंतित अमेरिका ने भी मालदीव में शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न होने के लिए वहां की जनता को बधाई दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नाउर्ट ने इस बारे में कहा है, “अमेरिका मालदीव की जनता को बधाई देता है, जिन्होंने अपने देश के भविष्य के निर्धारण के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ उठाई है।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के दक्षिण में स्थित छोटे से देश मालदीव में लगातार विपक्ष के ‘दमन’ और लोगों की लोकतांत्रिक आज़ादी ‘छीनने’ की वजह से यामीन प्रशासन की पूरी दुनिया में काफ़ी ‘आलोचना’ हो रही थी। यामीन प्रशासन ने अदालतों पर भी अंकुश लगाया था और विरोधियों को जेल में डाल दिया था। इसी कारण से पूरी दुनिया को इन चुनावों के स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होने पर भी ‘संदेह’ था।
भारत के दृष्टिकोण से ‘चीन समर्थित’ यामीन की हार और ‘भारत समर्थित’ सोलिह की जीत काफ़ी महत्वपूर्ण है। काफ़ी समय से यामीन चीन के प्रभाव में ऐसी नीतियों को बढ़ावा दे रहे थे जो कि भारत ‘विरोधी’ थीं। कुछ समय पहले मालदीप ने भारत के दिए हैलिकॉप्टर और भारतीय नौसेना की एक टुकड़ी को वापस भारत जाने के निर्देश दिये थे। समय-समय पर मालदीव ऐसे कदम उठा रहा था जो कि भारत के ‘हितों के विपरीत’ थे। अब जबकि भारत समर्थित सोलिह की जीत हुए है, तो ऐसे में आशा की जा रही है कि मालदीव में चीन का दख़ल कम होगा और वहां से भारत विरोधी गतिविधियां पर ‘लगाम’ लगेगी।