पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी का ‘कबूलनामा’ कहा,“पाकिस्तान में सेना के इशारे पर काम करती हैं सरकारें”
Tuesday - September 25, 2018 11:50 am ,
Category : WTN HINDI
अब्बासी ने साधा इमरान खान और पाकिस्तान की सेना पर निशाना
पाकिस्तान की राजनीति में सेना ही ‘मुख्य खिलाड़ी’: शाहिद खकान अब्बासी
SEP 25 (WTN) – पाकिस्तान में एक कहावत है कि वहां पर दो ‘A’ की ‘दादागीरी’ चलती है। एक A से है ‘AMERICA’ और दूसरे A से है ‘ARMY’। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में चुनाव सिर्फ़ ‘दिखावा’ है वहां सत्ता की ‘असली ताक़त’ आर्मी के पास होती है। दुनिया भर से कर्ज़ मिलता रहे और बाकी देशों के साथ सम्बन्ध बने रहें इसके लिए पाकिस्तान में चुनी हुईं लोकतांत्रिक सरकार बस ‘दिखावा’ हैं, बाकी सारे काम तो सेना ‘पर्दे के पीछे’ से करती है।
“पाकिस्तान में सेना का दबदबा है और उसी के इशारे पर सरकारें काम करती हैं”, यह कहना है वहां के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी का। अब्बासी ने पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की सरकार को एक ‘कठपुतली सरकार’ बताते हुए कहा है कि पाकिस्तान में सेना अब भी ‘बॉस’ बनी हुई है। अब्बासी का कहना है कि पाकिस्तान में सेना राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ‘दख़ल’ दे रही है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ के नेता शाहिद खाकान अब्बासी पर जून 2008 में चुनावों में शामिल होने पर रोक लगा दी थी जिस पर काफ़ी विवाद भी हुआ था। तभी से पीएमएल के नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना देश के आंतरिक मामलों में ‘दख़ल’ दे रही है।
नवाज़ शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज़ और दामाद कैप्टन सफ़दर के जेल से रिहा होने के कुछ दिनों बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी ने फिर आरोप लगाया है कि देश की राजनीति में सेना ही ‘मुख्य खिलाड़ी’ है। पाकिस्तान के एक स्थानीय चैनल को दिए इंटरव्यू में अब्बासी ने कहा, “मीडिया पर अंकुश लगाया जा रहा है और अदालतें भी ऐसी ही शिकायत कर रही हैं।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि देश की राजनीति में उसकी कोई भूमिका है। लेकिन सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सेना की ‘इजाज़त’ के बिना सरकारें विदेशी क्या आंतरिक मसलों पर भी फ़ैसले लेने में ‘आज़ाद’ नहीं है।
वो वाक्या पूरी दुनिया ने टीवी पर देखा था, जब एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को उनके सम्बोधन के दौरान सेना का एक अधिकारी एक ‘पर्ची’ देने आया था जिसके बाद नवाज़ शरीफ़ को अपने भाषण में कुछ बदलाव करते पूरी दुनिया ने देखा था। इससे साफ़ ज़ाहिर हो गया था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना है यह भी वहां की सेना ‘तय’ करती है।
यह सभी जानते हैं कि इमरान खान सेना की ‘कठपुतली’ रहे हैं। पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना ने चुनाव में इमरान खान की ‘मदद’ की है जिसके कारण इमरान खान की पार्टी पीटीआई को जीत हासिल हुई। इशारों ही इशारों में पूर्व प्रधानमंत्री खाकानी का कहना है कि सेना देश में कानून से ऊपर है।
भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध हमेशा से ही ‘तनावपूर्ण’ रहे हैं। पाकिस्तान की सेना कभी नहीं चाहती है कि भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध सामान्य हों, क्योंकि यदि ऐसा होता है वहां पर सेना की ‘वेल्यू’ कम हो जाएगी। जब-जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की बात हुई है पाकिस्तान की सेना ने आईएसआई की सहायता से भारत में ‘आतंकी गतिविधियों’ को बढ़ावा दिया है। ऐसे में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी की बात ‘सच’ ही है।
SEP 25 (WTN) – पाकिस्तान में एक कहावत है कि वहां पर दो ‘A’ की ‘दादागीरी’ चलती है। एक A से है ‘AMERICA’ और दूसरे A से है ‘ARMY’। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में चुनाव सिर्फ़ ‘दिखावा’ है वहां सत्ता की ‘असली ताक़त’ आर्मी के पास होती है। दुनिया भर से कर्ज़ मिलता रहे और बाकी देशों के साथ सम्बन्ध बने रहें इसके लिए पाकिस्तान में चुनी हुईं लोकतांत्रिक सरकार बस ‘दिखावा’ हैं, बाकी सारे काम तो सेना ‘पर्दे के पीछे’ से करती है।
“पाकिस्तान में सेना का दबदबा है और उसी के इशारे पर सरकारें काम करती हैं”, यह कहना है वहां के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी का। अब्बासी ने पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की सरकार को एक ‘कठपुतली सरकार’ बताते हुए कहा है कि पाकिस्तान में सेना अब भी ‘बॉस’ बनी हुई है। अब्बासी का कहना है कि पाकिस्तान में सेना राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ‘दख़ल’ दे रही है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ के नेता शाहिद खाकान अब्बासी पर जून 2008 में चुनावों में शामिल होने पर रोक लगा दी थी जिस पर काफ़ी विवाद भी हुआ था। तभी से पीएमएल के नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना देश के आंतरिक मामलों में ‘दख़ल’ दे रही है।
नवाज़ शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज़ और दामाद कैप्टन सफ़दर के जेल से रिहा होने के कुछ दिनों बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी ने फिर आरोप लगाया है कि देश की राजनीति में सेना ही ‘मुख्य खिलाड़ी’ है। पाकिस्तान के एक स्थानीय चैनल को दिए इंटरव्यू में अब्बासी ने कहा, “मीडिया पर अंकुश लगाया जा रहा है और अदालतें भी ऐसी ही शिकायत कर रही हैं।“
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि देश की राजनीति में उसकी कोई भूमिका है। लेकिन सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सेना की ‘इजाज़त’ के बिना सरकारें विदेशी क्या आंतरिक मसलों पर भी फ़ैसले लेने में ‘आज़ाद’ नहीं है।
वो वाक्या पूरी दुनिया ने टीवी पर देखा था, जब एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को उनके सम्बोधन के दौरान सेना का एक अधिकारी एक ‘पर्ची’ देने आया था जिसके बाद नवाज़ शरीफ़ को अपने भाषण में कुछ बदलाव करते पूरी दुनिया ने देखा था। इससे साफ़ ज़ाहिर हो गया था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना है यह भी वहां की सेना ‘तय’ करती है।
यह सभी जानते हैं कि इमरान खान सेना की ‘कठपुतली’ रहे हैं। पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना ने चुनाव में इमरान खान की ‘मदद’ की है जिसके कारण इमरान खान की पार्टी पीटीआई को जीत हासिल हुई। इशारों ही इशारों में पूर्व प्रधानमंत्री खाकानी का कहना है कि सेना देश में कानून से ऊपर है।
भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध हमेशा से ही ‘तनावपूर्ण’ रहे हैं। पाकिस्तान की सेना कभी नहीं चाहती है कि भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध सामान्य हों, क्योंकि यदि ऐसा होता है वहां पर सेना की ‘वेल्यू’ कम हो जाएगी। जब-जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की बात हुई है पाकिस्तान की सेना ने आईएसआई की सहायता से भारत में ‘आतंकी गतिविधियों’ को बढ़ावा दिया है। ऐसे में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी की बात ‘सच’ ही है।