विश्लेषण: सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को किया संवैधानिक, क्या फ़ैसले से मोदी सरकार को मिली राहत
Wednesday - September 26, 2018 1:16 pm ,
Category : WTN HINDI
स्कूल में एडमिशन के लिए नहीं मांग सकते आधार कार्ड
आधार कार्ड हुआ संवैधानिक, लेकिन बैंक एकाउण्ट और मोबाइल नम्बर से लिंक करना ज़रूरी नहीं
SEP 26 (WTN) – केन्द्र की मोदी सरकार ने हर सरकारी योजना के लिए आधार कार्ड को लिंक करना अनिवार्य कर दिया था। मोबाइल नम्बर से लेकर बैंक अकाउण्ट और पेन कार्ड से लेकर स्कूल में एडमिशन तक हर कहीं आधार कार्ड को लिंक करना ज़रूरी था। लेकिन जब हर कहीं आधार कार्ड की अनिवार्यता का मामला देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में गया और आज इस पर एक ऐतिहासिक फ़ैसला आया है कि आधार कार्ड अब संवैधानिक हो गया है। मोदी सरकार हमेशा से आधार कार्ड के समर्थन में रही थी ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए राहत है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आधार कार्ड पर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है और इस पर हमला संविधान के ख़िलाफ़ है। अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये ज़रूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, कुछ अलग भी होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड ग़रीबों की ताक़त का ज़रिया बना है, इसमें डुप्लीकेसी की आशंका नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, आधार बनाने के लिए जो भी डेटा लिया जा रहा है वो काफ़ी कम है, उसके मुक़ाबले जो इससे फ़ायदा मिलता है वो काफ़ी ज़्यादा है। लेकिन कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि स्कूलों में आधार की अनिवार्यता नहीं होगी, वहीं मोबाइल नम्बरों और बैंक खातों को आधार से जोड़ना गैर संवैधानिक है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में साफ़ किया है कि आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आधार कार्ड के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। आधार एक्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे किसी की निजता पर सवाल खड़ा हो। लेकिन कोर्ट ने साफ़ किया कि निजी कम्पनियां अब आधार कार्ड नहीं मांग सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसला की बड़ी बातें
आधार कार्ड की संवैधानिकता बरकरार रहेगी।
सरकार को डेटा प्रोटेक्शन के लिए मज़बूत कानून बनाना होगा।
आधार लिंक करने का उपयोग सरकार योजनाओं का लोगों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए कर सकती है।
सरकार की सभी लाभकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।
आधार को मोबाइल नम्बर और बैंक अकाउंट से जोड़ना ज़रूरी नहीं है।
आधार को पैन कार्ड से जोड़ना ज़रूरी है। इससे अब सभी को अपने पैन कार्ड और आधार को लिंक करना होगा।
प्राइवेट कम्पनियां आपकी पहचान के लिए आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं।
स्कूल एडमिशन के लिए आधार कार्ड को नहीं मांग सकते।
CBSE और NEET और UGS जैसी परीक्षाओं के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
छोटे बच्चों को आधार कार्ड नहीं होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
मोदी सरकार ने आधार कार्ड के ज़रिये सरकार की लाभकारी योजनाओं को लिंक किया था। सरकार का उद्देश्य था कि इससे सही व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। वहीं मोबाइल नम्बर लिंक करने के पीछे मक़सद था कि इससे अपराध पर लगाम लगेगी तो बैंक अकाउण्ट को लिंक करने के पीछे मक़सद था कि इससे सही व्यक्ति तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार को संवैधानिक कर दिया है लेकिन सरकार से कई सवाल भी किये हैं। सुप्रीम कोर्ट का आधार कार्ड पर फ़ैसला मोदी सरकार के आधा समर्थन और आधा विरोध में कहा जा सकता है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मोदी सरकार क्या रुख होता है।
SEP 26 (WTN) – केन्द्र की मोदी सरकार ने हर सरकारी योजना के लिए आधार कार्ड को लिंक करना अनिवार्य कर दिया था। मोबाइल नम्बर से लेकर बैंक अकाउण्ट और पेन कार्ड से लेकर स्कूल में एडमिशन तक हर कहीं आधार कार्ड को लिंक करना ज़रूरी था। लेकिन जब हर कहीं आधार कार्ड की अनिवार्यता का मामला देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में गया और आज इस पर एक ऐतिहासिक फ़ैसला आया है कि आधार कार्ड अब संवैधानिक हो गया है। मोदी सरकार हमेशा से आधार कार्ड के समर्थन में रही थी ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए राहत है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आधार कार्ड पर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है और इस पर हमला संविधान के ख़िलाफ़ है। अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये ज़रूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, कुछ अलग भी होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड ग़रीबों की ताक़त का ज़रिया बना है, इसमें डुप्लीकेसी की आशंका नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, आधार बनाने के लिए जो भी डेटा लिया जा रहा है वो काफ़ी कम है, उसके मुक़ाबले जो इससे फ़ायदा मिलता है वो काफ़ी ज़्यादा है। लेकिन कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि स्कूलों में आधार की अनिवार्यता नहीं होगी, वहीं मोबाइल नम्बरों और बैंक खातों को आधार से जोड़ना गैर संवैधानिक है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में साफ़ किया है कि आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आधार कार्ड के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। आधार एक्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे किसी की निजता पर सवाल खड़ा हो। लेकिन कोर्ट ने साफ़ किया कि निजी कम्पनियां अब आधार कार्ड नहीं मांग सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसला की बड़ी बातें
आधार कार्ड की संवैधानिकता बरकरार रहेगी।
सरकार को डेटा प्रोटेक्शन के लिए मज़बूत कानून बनाना होगा।
आधार लिंक करने का उपयोग सरकार योजनाओं का लोगों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए कर सकती है।
सरकार की सभी लाभकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।
आधार को मोबाइल नम्बर और बैंक अकाउंट से जोड़ना ज़रूरी नहीं है।
आधार को पैन कार्ड से जोड़ना ज़रूरी है। इससे अब सभी को अपने पैन कार्ड और आधार को लिंक करना होगा।
प्राइवेट कम्पनियां आपकी पहचान के लिए आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं।
स्कूल एडमिशन के लिए आधार कार्ड को नहीं मांग सकते।
CBSE और NEET और UGS जैसी परीक्षाओं के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
छोटे बच्चों को आधार कार्ड नहीं होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
मोदी सरकार ने आधार कार्ड के ज़रिये सरकार की लाभकारी योजनाओं को लिंक किया था। सरकार का उद्देश्य था कि इससे सही व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। वहीं मोबाइल नम्बर लिंक करने के पीछे मक़सद था कि इससे अपराध पर लगाम लगेगी तो बैंक अकाउण्ट को लिंक करने के पीछे मक़सद था कि इससे सही व्यक्ति तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार को संवैधानिक कर दिया है लेकिन सरकार से कई सवाल भी किये हैं। सुप्रीम कोर्ट का आधार कार्ड पर फ़ैसला मोदी सरकार के आधा समर्थन और आधा विरोध में कहा जा सकता है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मोदी सरकार क्या रुख होता है।