जानिए आधार एक्ट के सेक्शन 33(2), 47 और 57, जिस पर मचा था बवाल
Wednesday - September 26, 2018 2:31 pm ,
Category : WTN HINDI
आधार कार्ड को सुप्रीम कोर्ट ने किया संवैधानिक
सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन 57 को किया अवैधानिक, अब निजी कम्पनियां नहीं मांग सकेंगी अनिवार्य रूप से आधार
SEP 26 (WTN) – आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद सभी तरफ़ इसकी चर्चा है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली बेंच ने 3-2 से माना है कि आधार संवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि आधार में दर्ज कुछ जानकारियों से निजता पर असर पड़ता है, लेकिन व्यापक रूप में आधार कार्ड काफ़ी मायने में अद्भुत है।
मोबाइल नम्बर, बैंक एकाउण्ट, स्कूल में एडमिशन समेत कई सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की अनिवार्यता की समाप्त कर दिया है। अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट से जुड़े तीन प्रावधानों सेक्शन 33(2), सेक्शन 47 और और सेक्शन 57 को खारिज कर उन्हें अवैधानिक घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने भी इन तीनों सेक्शन के खारिज होने पर केन्द्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आइये जानते हैं कि आखिर क्या है यह तीनों सेक्शन।
सेक्शन 33(2)
आधार एक्ट के सेक्शन 33(2) में प्रावधान था कि किसी भी शख्स की जानकारी के बारे में खुलासा किया जा सकता है। लेकिन इसमें ये व्यवस्था थी कि केंद्र सरकार की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी से नीचे का अधिकारी किसी भी शख्स के बारे में आधार के ज़रिए जानकारी हासिल नहीं कर सकता है। लेकिन अब उस सेक्शन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सेक्शन-47
ऐतिहासिक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन-47 को भी अवैधानिक करार दिया है। इस एक्ट के तहत डेटा ब्रीच के लिए आपराधिक मुकदमे को सिर्फ यूआईडीएआई ही दायर कर सकती थी। इस मामले में किसी शख्स को आपराधिक मुकदमे को दर्ज कराने की इजाज़त नहीं थी। लेकिन अब कोई भी शख्स, अगर उसे लगता है कि उसके डेटा का ग़लत प्रयोग किया जा रहा है, तो वो आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है।
सेक्शन 57
सेक्शन 57 के तहत किसी शख्स की पहचान को सत्यापित करने के लिए आधार की जानकारी को इस्तेमाल करने की इजाजत थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ये अवैधानिक हो चुका है। यानि कि कोई भी निजी कम्पनी जैसे कि पेटीएम या अन्य मोबाइल कम्पनियां अनिवार्य रूप से आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक निजी कम्पनियां किसी भी तरह की सर्विस देने से पहले आधार कार्ड मांगती थीं, जो अब नहीं मांग सकेंगी। अपने फ़ैसले में जजों ने कहा कि किसी शख्स के सत्यापन के लिए पहले से ही तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में आप इस तरह के सेक्शन के जरिए लोगों की निजता में दख़ल नहीं दे सकते हैं।
SEP 26 (WTN) – आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद सभी तरफ़ इसकी चर्चा है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली बेंच ने 3-2 से माना है कि आधार संवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि आधार में दर्ज कुछ जानकारियों से निजता पर असर पड़ता है, लेकिन व्यापक रूप में आधार कार्ड काफ़ी मायने में अद्भुत है।
मोबाइल नम्बर, बैंक एकाउण्ट, स्कूल में एडमिशन समेत कई सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की अनिवार्यता की समाप्त कर दिया है। अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट से जुड़े तीन प्रावधानों सेक्शन 33(2), सेक्शन 47 और और सेक्शन 57 को खारिज कर उन्हें अवैधानिक घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने भी इन तीनों सेक्शन के खारिज होने पर केन्द्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आइये जानते हैं कि आखिर क्या है यह तीनों सेक्शन।
सेक्शन 33(2)
आधार एक्ट के सेक्शन 33(2) में प्रावधान था कि किसी भी शख्स की जानकारी के बारे में खुलासा किया जा सकता है। लेकिन इसमें ये व्यवस्था थी कि केंद्र सरकार की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी से नीचे का अधिकारी किसी भी शख्स के बारे में आधार के ज़रिए जानकारी हासिल नहीं कर सकता है। लेकिन अब उस सेक्शन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सेक्शन-47
ऐतिहासिक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन-47 को भी अवैधानिक करार दिया है। इस एक्ट के तहत डेटा ब्रीच के लिए आपराधिक मुकदमे को सिर्फ यूआईडीएआई ही दायर कर सकती थी। इस मामले में किसी शख्स को आपराधिक मुकदमे को दर्ज कराने की इजाज़त नहीं थी। लेकिन अब कोई भी शख्स, अगर उसे लगता है कि उसके डेटा का ग़लत प्रयोग किया जा रहा है, तो वो आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है।
सेक्शन 57
सेक्शन 57 के तहत किसी शख्स की पहचान को सत्यापित करने के लिए आधार की जानकारी को इस्तेमाल करने की इजाजत थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ये अवैधानिक हो चुका है। यानि कि कोई भी निजी कम्पनी जैसे कि पेटीएम या अन्य मोबाइल कम्पनियां अनिवार्य रूप से आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक निजी कम्पनियां किसी भी तरह की सर्विस देने से पहले आधार कार्ड मांगती थीं, जो अब नहीं मांग सकेंगी। अपने फ़ैसले में जजों ने कहा कि किसी शख्स के सत्यापन के लिए पहले से ही तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में आप इस तरह के सेक्शन के जरिए लोगों की निजता में दख़ल नहीं दे सकते हैं।