भारत का ‘रक्षा कवच’ साबित होगा एस-400 डिफेंस सिस्टम
Thursday - October 4, 2018 11:48 am ,
Category : WTN HINDI
रूस से 5 बिलियन डॉलर में होगा एस-400 का सौदा
जानिए क्यों और कितना महत्वपूर्ण है एस-400 डिफेंस सिस्मट भारत के लिए?
OCT 04 (WTN) – भारत और रूस के बीच एस-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर समझौता होने जा रहा है। कहा जा रहा है कि यदि एस-400 डिफेंस सिस्टम भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया तो यह एक बहुत बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर क्यों और कितना महतव्पूर्ण है एस-400 डिफेंस सिस्टम।
भारत के अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से युद्ध हो चुके हैं। ऐसे में भारत को इन देशों से सतर्क रहन की काफ़ी ज़रूरत है। ज़मीन पर तो भारतीय सेना काफ़ी मज़बूत है जो कि पाकिस्तान और चीन की थलसेना को आसानी से टक्कर दे सकती है। लेकिन वायुसेना के मामले में फ़िलहाल भारत चीन से काफ़ी कमज़ोर है। भारत को काफ़ी लम्बे समय से ऐसे डिफेंस सिस्टम की ज़रूरत थी जिससे कि भारत पर हमला करने आ रहे लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को भारत पर हमला करने से पहले ही मारा गिराया जाए। अपनी इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए भारत रूस से एस-400 डिफेंस सिस्टम ख़रीद रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एस-400 डिफेंस फाइटर एअरक्राफ्ट, सर्विलांस एअरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को 400 मीटर के दायरे में दुश्मन के हवाई क्षेत्र में ही मार गिराने में सक्षम है। कहा जा रहा है कि भारत अपनी ज़रूरत के हिसाब से फिलहाल अभी रूस से पांच एस-400 डिफेंस सिस्टम हासिल करने की कोशिश में है।
एस-400 डिफेंस सिस्टम की सीमा में पाकिस्तान का पूरा हवाई क्षेत्र और चीन का कुछ हवाई क्षेत्र आएगा। चूंकि चीन ने इस तरह का डिफेंस सिस्टम पहले से ही तैनात कर रखा है, इसलिए एस-400 डिफेंस सिस्टम मिलने से भारतीय वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
जानकारी के मुताबिक़ एस-400 डिफेंस सिस्टम एक साथ 36 मिसाइलों को मार गिरा सकता है। यदि पाकिस्तान और चीन भारत पर एक साथ भी हमला करते हैं तो इस स्थिति में इस सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। चीन के पास यह सिस्टम पहले से है और उसने भी यह सिस्टम रूस से ही खरीदा है। फिलहाल चीन की आर्मी इसका इस्तेमाल करती है।
एस-400 एक विमान भेदी मिसाइल है जिसे कि रूस की सेना में साल 2007 में शामिल किया गया था। एस-400 डिफेंस सिस्टम से विमानों, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
एस-400 डिफेंस सिस्टम की मिसाइलें 400 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। कहा जाता है कि इसके पास अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट एफ़-35 को भी मार गिराने की क्षमता है।
इस सिस्टम से एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं। मिसाइल से लेकर ड्रोन तक कोई भी हवाई हमला इससे आसानी से नाकाम किया जा सकता है। पाकिस्तान या चीन की परमाणु हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों को भी मार गिराने में एस-400 सिस्टम सक्षम है।
OCT 04 (WTN) – भारत और रूस के बीच एस-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर समझौता होने जा रहा है। कहा जा रहा है कि यदि एस-400 डिफेंस सिस्टम भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया तो यह एक बहुत बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर क्यों और कितना महतव्पूर्ण है एस-400 डिफेंस सिस्टम।
भारत के अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से युद्ध हो चुके हैं। ऐसे में भारत को इन देशों से सतर्क रहन की काफ़ी ज़रूरत है। ज़मीन पर तो भारतीय सेना काफ़ी मज़बूत है जो कि पाकिस्तान और चीन की थलसेना को आसानी से टक्कर दे सकती है। लेकिन वायुसेना के मामले में फ़िलहाल भारत चीन से काफ़ी कमज़ोर है। भारत को काफ़ी लम्बे समय से ऐसे डिफेंस सिस्टम की ज़रूरत थी जिससे कि भारत पर हमला करने आ रहे लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को भारत पर हमला करने से पहले ही मारा गिराया जाए। अपनी इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए भारत रूस से एस-400 डिफेंस सिस्टम ख़रीद रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एस-400 डिफेंस फाइटर एअरक्राफ्ट, सर्विलांस एअरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को 400 मीटर के दायरे में दुश्मन के हवाई क्षेत्र में ही मार गिराने में सक्षम है। कहा जा रहा है कि भारत अपनी ज़रूरत के हिसाब से फिलहाल अभी रूस से पांच एस-400 डिफेंस सिस्टम हासिल करने की कोशिश में है।
एस-400 डिफेंस सिस्टम की सीमा में पाकिस्तान का पूरा हवाई क्षेत्र और चीन का कुछ हवाई क्षेत्र आएगा। चूंकि चीन ने इस तरह का डिफेंस सिस्टम पहले से ही तैनात कर रखा है, इसलिए एस-400 डिफेंस सिस्टम मिलने से भारतीय वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
जानकारी के मुताबिक़ एस-400 डिफेंस सिस्टम एक साथ 36 मिसाइलों को मार गिरा सकता है। यदि पाकिस्तान और चीन भारत पर एक साथ भी हमला करते हैं तो इस स्थिति में इस सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। चीन के पास यह सिस्टम पहले से है और उसने भी यह सिस्टम रूस से ही खरीदा है। फिलहाल चीन की आर्मी इसका इस्तेमाल करती है।
एस-400 एक विमान भेदी मिसाइल है जिसे कि रूस की सेना में साल 2007 में शामिल किया गया था। एस-400 डिफेंस सिस्टम से विमानों, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
एस-400 डिफेंस सिस्टम की मिसाइलें 400 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। कहा जाता है कि इसके पास अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट एफ़-35 को भी मार गिराने की क्षमता है।
इस सिस्टम से एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं। मिसाइल से लेकर ड्रोन तक कोई भी हवाई हमला इससे आसानी से नाकाम किया जा सकता है। पाकिस्तान या चीन की परमाणु हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों को भी मार गिराने में एस-400 सिस्टम सक्षम है।