मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में जीत के लिए दिन में ‘सपने’ देखती भाजपा
Wednesday - October 3, 2018 1:44 pm ,
Category : WTN HINDI
लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने के कोशिश में भाजपा
जनता की ‘नब्ज़’ पहचानने में ‘ग़लती’ कर रही है भाजपा
OCT 03 (WTN) – मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार 15 सालों से सत्ता में है और लगातार चौथी बार जीत के लिए भाजपा पूरी कोशिश में है। 2003 से 2018 के बीच के इन सालों में मध्य प्रदेश में काफ़ी कुछ बदला है, लेकिन पिछले तीन महीनों से जिस तरह से मध्य प्रदेश में घटनाक्रम घटा है, उससे लगता है कि भाजपा ने कोई भी सबक़ नहीं सीखा है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके मोदी सरकार ने अपने परम्परगत वोट बैंक सवर्ण वर्ग और ओबीसी को नाराज़ कर दिया है। इतना ही नहीं इन लोगों की लड़ाई लड़ रही सपाक्स ने अब नया राजनीति दल भी बना लिया है जो कि साफ़तौर पर भाजपा के ही वोट काटेगा, लेकिन इतना होने के बाद भी भाजपा नेता मध्य प्रदेश में जीत का सपना देख रहे हैं।
जबलपुर सांसद और मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह पूरी ताक़त लगा रहे हैं कि इस बार फ़िर से भाजपा को जीत दिलाई जा सके। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राकेश सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेमिसाल काम के आगे कांग्रेस को जनता नकार रही है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर निशाना साधते हुए राकेश सिंह ने कहा, “पहले तो कांग्रेस अध्यक्ष बने कमलनाथ को कांग्रेस ने चार बैसाखियां दीं, फ़िर महागठबंधन बनाकर बैसाखी में चुनाव जीतने की तैयारी की और अब कांग्रेस भाजपा के बागियों की बैसाखी के सहारे सत्ता में आने के सपने देख रही है।“
वहीं राकेश सिंह ने साफ़ किया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ़ ‘जीतने’ वाले उम्मीदवार पर दांव लगाएगी और काम को ‘तवज्जो’ दी जाएगी किसी चेहरे को नहीं। पार्टी में गुटबाज़ी और टिकट के दावेदारों की संख्या अधिक होने के सवाल पर राकेश सिंह ने कहा, “भाजपा का हर कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर काम करता है और मेरे हिसाब से टिकट के लिए दावेदारी करना पार्टी के लिए एक शुभ संकेत है क्योंकि इससे योग्य उम्मीदवार सामने आते हैं, लेकिन एक बार पार्टी जिसको अपना उम्मीदवार तय करती है, उसके बाद कार्यकर्ता और संगठन उसकी जीत के लिए पूरी ताक़त से जुट जाते हैं।”
प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के लिए कहना आसान है लेकिन ज़मीनी हक़ीकत है कि भाजपा का परम्परागत वोट बैंक अब भाजपा से बुरी तरह से ‘नाराज़’ हो गया है। भावांतर योजना, मण्डी में नगद में भुगतान नहीं होने और फसलों के सही दाम नहीं मिलने से नाराज़ किसानों का भाजपा से मोहभंग हो गया है। वहीं नोटबंदी और जीएसटी लागू करने में जल्दबाज़ी के कारण व्यापारी भी काफ़ी समय से भाजपा से नाराज़ चल रहा है। सरकारी कर्मचारी भी प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सरकार अस्पष्ट रूख़ से खफ़ा है। बाक़ी सवर्ण वर्ग और ओबीसी, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से भाजपा को सबक सिखाने के मूड में हैं। यदि सवर्ण, ओबीसी और अल्पसंख्यकों ने भाजपा को सबक़ सिखाने का मूड बना लिया तो केवल एससी-एसटी के दम पर भाजपा चुनाव किसी भी क़ीमत पर नहीं जीत सकती है।
ऐसे में जबकि किसान से लेकर व्यापारी हर कोई भाजपा से नाराज़ चल रहा है और उसे सबक़ सिखाने की बातें कर रहा है फ़िर भी ना जाने किस आधार पर भाजपा नेता दिन में ही जीत का सपना देख रहे हैं। कहा जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से अंदर ही अंदर भाजपा के ख़िलाफ़ जनता में गुस्से का माहौल है। 15 सालों की सत्ताविरोधी लहर और जनता की नाराज़गी भाजपा को काफ़ी भारी पड़ने वाली है, लेकिन ना जाने क्यों फ़िर भी भाजपा नेता सच्चाई को समझना नहीं चाहते हैं या फिर समझ गये हैं तो उसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।
OCT 03 (WTN) – मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार 15 सालों से सत्ता में है और लगातार चौथी बार जीत के लिए भाजपा पूरी कोशिश में है। 2003 से 2018 के बीच के इन सालों में मध्य प्रदेश में काफ़ी कुछ बदला है, लेकिन पिछले तीन महीनों से जिस तरह से मध्य प्रदेश में घटनाक्रम घटा है, उससे लगता है कि भाजपा ने कोई भी सबक़ नहीं सीखा है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके मोदी सरकार ने अपने परम्परगत वोट बैंक सवर्ण वर्ग और ओबीसी को नाराज़ कर दिया है। इतना ही नहीं इन लोगों की लड़ाई लड़ रही सपाक्स ने अब नया राजनीति दल भी बना लिया है जो कि साफ़तौर पर भाजपा के ही वोट काटेगा, लेकिन इतना होने के बाद भी भाजपा नेता मध्य प्रदेश में जीत का सपना देख रहे हैं।
जबलपुर सांसद और मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह पूरी ताक़त लगा रहे हैं कि इस बार फ़िर से भाजपा को जीत दिलाई जा सके। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राकेश सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेमिसाल काम के आगे कांग्रेस को जनता नकार रही है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर निशाना साधते हुए राकेश सिंह ने कहा, “पहले तो कांग्रेस अध्यक्ष बने कमलनाथ को कांग्रेस ने चार बैसाखियां दीं, फ़िर महागठबंधन बनाकर बैसाखी में चुनाव जीतने की तैयारी की और अब कांग्रेस भाजपा के बागियों की बैसाखी के सहारे सत्ता में आने के सपने देख रही है।“
वहीं राकेश सिंह ने साफ़ किया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ़ ‘जीतने’ वाले उम्मीदवार पर दांव लगाएगी और काम को ‘तवज्जो’ दी जाएगी किसी चेहरे को नहीं। पार्टी में गुटबाज़ी और टिकट के दावेदारों की संख्या अधिक होने के सवाल पर राकेश सिंह ने कहा, “भाजपा का हर कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर काम करता है और मेरे हिसाब से टिकट के लिए दावेदारी करना पार्टी के लिए एक शुभ संकेत है क्योंकि इससे योग्य उम्मीदवार सामने आते हैं, लेकिन एक बार पार्टी जिसको अपना उम्मीदवार तय करती है, उसके बाद कार्यकर्ता और संगठन उसकी जीत के लिए पूरी ताक़त से जुट जाते हैं।”
प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के लिए कहना आसान है लेकिन ज़मीनी हक़ीकत है कि भाजपा का परम्परागत वोट बैंक अब भाजपा से बुरी तरह से ‘नाराज़’ हो गया है। भावांतर योजना, मण्डी में नगद में भुगतान नहीं होने और फसलों के सही दाम नहीं मिलने से नाराज़ किसानों का भाजपा से मोहभंग हो गया है। वहीं नोटबंदी और जीएसटी लागू करने में जल्दबाज़ी के कारण व्यापारी भी काफ़ी समय से भाजपा से नाराज़ चल रहा है। सरकारी कर्मचारी भी प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सरकार अस्पष्ट रूख़ से खफ़ा है। बाक़ी सवर्ण वर्ग और ओबीसी, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से भाजपा को सबक सिखाने के मूड में हैं। यदि सवर्ण, ओबीसी और अल्पसंख्यकों ने भाजपा को सबक़ सिखाने का मूड बना लिया तो केवल एससी-एसटी के दम पर भाजपा चुनाव किसी भी क़ीमत पर नहीं जीत सकती है।
ऐसे में जबकि किसान से लेकर व्यापारी हर कोई भाजपा से नाराज़ चल रहा है और उसे सबक़ सिखाने की बातें कर रहा है फ़िर भी ना जाने किस आधार पर भाजपा नेता दिन में ही जीत का सपना देख रहे हैं। कहा जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद से अंदर ही अंदर भाजपा के ख़िलाफ़ जनता में गुस्से का माहौल है। 15 सालों की सत्ताविरोधी लहर और जनता की नाराज़गी भाजपा को काफ़ी भारी पड़ने वाली है, लेकिन ना जाने क्यों फ़िर भी भाजपा नेता सच्चाई को समझना नहीं चाहते हैं या फिर समझ गये हैं तो उसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।