मध्य प्रदेश के लिए अमित शाह की ‘चुनावी रणनीति’
Monday - October 15, 2018 3:03 pm ,
Category : WTN HINDI
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतना अमित शाह के लिए ‘बड़ी चुनौती’
‘हाफ़ पन्ना प्रमुख’ के ज़रिये कांग्रेस को ‘पटखनी’ देने की तैयारी में अमित शाह
OCT 15 (WTN) – भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपनी ‘चुनावी रणनीति’ के लिए काफ़ी जाने जाते हैं और उनकी इस रणनीति का ‘ख़ौफ़’ विपक्ष में साफ़ देखा जा सकता है। जब से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, तभी से हर चुनाव जीतने के लिए वे कुछ ना कुछ ‘नया प्रयोग’ करते रहते हैं और इसमें उन्हें कई बार ‘सफलता’ भी मिलती है। बात करें मध्य प्रदेश की तो मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर चुकी है, लेकिन इस बार उसे ‘सत्ताविरोधी’ लहर और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद नाराज़ सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग की ‘चिंता’ सता रही है। ऐसे में भाजपा ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कर्नाटक के ‘माइक्रो मैनेजमेंट प्लान’ को अपनाया है ताकि कांग्रेस को ‘शिकस्त’ दी जा सके।
आइये सबसे पहले आपको बताते हैं कि कर्नाटक का भाजपा का ‘माइक्रो मैनेजमेंट प्लान’ आख़िर क्या है? कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने बूथ स्तर पर ‘हाफ़ पेज प्रभारी’ नियुक्त किये थे। यानि कि हर बूथ के एक पन्ने पर दो कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया था। ये कार्यकर्ता अपने हिस्से के दस परिवारों यानि कि क़रीब 30 से 40 मतदाताओं से घर-घर जाकर ‘सम्पर्क’ करते थे और उन्हें भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए ‘अपील’ करते थे।
मध्य प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा ने भी कुछ ऐसी ही ‘रणनीति’ बनाई है। भाजपा ने हर बूथ पर ‘हाफ़ पेज प्रभारी’ को नियुक्त किया है और साथ ही एक कार्यकर्ता को दस परिवारों की ज़िम्मेदारी दी है कि वो इन्हें भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए इनसे ‘सम्पर्क’ करे। इतना ही नहीं, इन 30 से 40 मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने से लेकर पार्टी के पक्ष में वोटिंग कराने की जिम्मेदारी भी इसी कार्यकर्ता की ही रहेगी। किसी भी तरह की कोई भी ‘चूक’ ना हो इसलिए पार्टी ने इन सभी कार्यकर्ताओं को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अपने ‘सम्पर्क’ में रखा है और इसी के ज़रिये इन कार्यकर्ताओं को ‘प्रशिक्षण’ भी दिया जा रहा है।
भोपाल में कार्यकर्ता महाकुम्भ में नरेन्द्र मोदी ने भी सभी कार्यकर्ताओं को एक नारा दिया था और कहा था “मेरा बूथ सबसे मजबूत”। कहा जा सकता है कि पेज प्रभारी और हाफ़ पेज प्रभारी इसी तैयारी का एक हिस्सा है। भाजपा यह सब इसलिए कर रही है क्योंकि वो जानती है लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद इस बार चुनाव जीतना ‘काफ़ी मुश्किल’ है क्योंकि उसके ख़िलाफ़ ‘सत्ता विरोधी लहर’ का होना स्वाभाविक है। साथ ही भाजपा यह भी जानती है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद उसके परम्परागत वोट बैंक जैसे कि सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग उससे ‘नाराज़’ हैं।
ऐसे में भाजपा की ‘रणनीति’ है कि हर घर और हर मतदाता से पार्टी के कार्यकर्ता व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क करें ताक़ि यदि किसी भी तरह की कोई भी नाराज़गी मतादाताओं के बीच है तो उसे दूर किया जा सके। ख़ैर भाजपा की हाफ़ पेज प्रमुख से लेकर घर-घर सम्पर्क की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है यह तो चुनाव परिणाम के दिन ही पता चलेगा। लेकिन इतना तो तय है कि अमित शाह किसी भी चुनाव को छोटा नहीं समझते हैं और पूरी तैयारी के साथ ही चुनाव में उतरते हैं।
OCT 15 (WTN) – भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपनी ‘चुनावी रणनीति’ के लिए काफ़ी जाने जाते हैं और उनकी इस रणनीति का ‘ख़ौफ़’ विपक्ष में साफ़ देखा जा सकता है। जब से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, तभी से हर चुनाव जीतने के लिए वे कुछ ना कुछ ‘नया प्रयोग’ करते रहते हैं और इसमें उन्हें कई बार ‘सफलता’ भी मिलती है। बात करें मध्य प्रदेश की तो मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर चुकी है, लेकिन इस बार उसे ‘सत्ताविरोधी’ लहर और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद नाराज़ सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग की ‘चिंता’ सता रही है। ऐसे में भाजपा ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कर्नाटक के ‘माइक्रो मैनेजमेंट प्लान’ को अपनाया है ताकि कांग्रेस को ‘शिकस्त’ दी जा सके।
आइये सबसे पहले आपको बताते हैं कि कर्नाटक का भाजपा का ‘माइक्रो मैनेजमेंट प्लान’ आख़िर क्या है? कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने बूथ स्तर पर ‘हाफ़ पेज प्रभारी’ नियुक्त किये थे। यानि कि हर बूथ के एक पन्ने पर दो कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया था। ये कार्यकर्ता अपने हिस्से के दस परिवारों यानि कि क़रीब 30 से 40 मतदाताओं से घर-घर जाकर ‘सम्पर्क’ करते थे और उन्हें भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए ‘अपील’ करते थे।
मध्य प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा ने भी कुछ ऐसी ही ‘रणनीति’ बनाई है। भाजपा ने हर बूथ पर ‘हाफ़ पेज प्रभारी’ को नियुक्त किया है और साथ ही एक कार्यकर्ता को दस परिवारों की ज़िम्मेदारी दी है कि वो इन्हें भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए इनसे ‘सम्पर्क’ करे। इतना ही नहीं, इन 30 से 40 मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने से लेकर पार्टी के पक्ष में वोटिंग कराने की जिम्मेदारी भी इसी कार्यकर्ता की ही रहेगी। किसी भी तरह की कोई भी ‘चूक’ ना हो इसलिए पार्टी ने इन सभी कार्यकर्ताओं को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अपने ‘सम्पर्क’ में रखा है और इसी के ज़रिये इन कार्यकर्ताओं को ‘प्रशिक्षण’ भी दिया जा रहा है।
भोपाल में कार्यकर्ता महाकुम्भ में नरेन्द्र मोदी ने भी सभी कार्यकर्ताओं को एक नारा दिया था और कहा था “मेरा बूथ सबसे मजबूत”। कहा जा सकता है कि पेज प्रभारी और हाफ़ पेज प्रभारी इसी तैयारी का एक हिस्सा है। भाजपा यह सब इसलिए कर रही है क्योंकि वो जानती है लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद इस बार चुनाव जीतना ‘काफ़ी मुश्किल’ है क्योंकि उसके ख़िलाफ़ ‘सत्ता विरोधी लहर’ का होना स्वाभाविक है। साथ ही भाजपा यह भी जानती है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद उसके परम्परागत वोट बैंक जैसे कि सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग उससे ‘नाराज़’ हैं।
ऐसे में भाजपा की ‘रणनीति’ है कि हर घर और हर मतदाता से पार्टी के कार्यकर्ता व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क करें ताक़ि यदि किसी भी तरह की कोई भी नाराज़गी मतादाताओं के बीच है तो उसे दूर किया जा सके। ख़ैर भाजपा की हाफ़ पेज प्रमुख से लेकर घर-घर सम्पर्क की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है यह तो चुनाव परिणाम के दिन ही पता चलेगा। लेकिन इतना तो तय है कि अमित शाह किसी भी चुनाव को छोटा नहीं समझते हैं और पूरी तैयारी के साथ ही चुनाव में उतरते हैं।