दशहरे पर करें विधि विधान से पूजा, धन-धान्य की नहीं होगी कमी
Friday - October 19, 2018 10:00 am ,
Category : WTN HINDI
दशहरा पर्व है जया और विजया देवियों का
रामरक्षास्तोत्र का पाठ करने से आसुरी शक्तियों का होता है नाश
19 OCT (WTN) – हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार आज दशहरे के दिन विशेष पूजा का महत्व रहता है। कई घरों में आज के दिन शस्त्र पूजा होती है तो कई घरों में कन्या भोज का आयोजन किया जाता है। यदि आप अपने घर में सुख और शांति की कामना कर रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कि किस विधि से पूजा करने से आपके घर सुख समृद्धि का वास होगा। इस विधि से पूजा करने से आपके जीवन में परेशानियां नहीं आएंगी और यदि आ भी गईं तो उनका शीघ्र निराकरण हो जाएगा।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दशहरे की पूजा के लिए एक अलग नियम है। दशहरा दोपहर का पर्व है ना कि सुबह या शाम का। दशहरे को विजयादशमी भी कहा गया है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार यह देवी जया और विजया का पर्व है और ये दोनो हीं देवी की सहचरी और योगनियां हैं। इस पर्व को विजय काल में ही मनाए जाने के विधान ग्रंथों में है, चूंकि विजयकाल दोपहर में ही पड़ता है इसलिए विजयादशमी की पूजा हमेशा दोपहर में ही की जानी चाहिए।
दशहरे के दिन दोपहर के समय घर में कुंवारी गाय का गोबर लाए और उसके चार गोल आकार में पिण्ड बनाएं। इसके बाद इन पिण्डों में से एक को भगवान राम, एक को लक्ष्मण, एक को भरत और एक को शत्रुघ्न मान कर उनकी सामान्य पूजा करें जैसी की रोज़ आप भगावन की करते हैं। पूजा करने के बाद चारों पिण्डों पर भीगा हुआ धान और चांदी का सिक्का रखें और उसे वस्त्र से ढक दें। इसके बाद इनकी गंध, पुष्प और द्रव्य आदि से पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करें।
इस विधि से पूजा करने से आपके घर में वर्षभर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होगी। और यदि कभी भी किसी भी तरह की परेशानी यदि आती है तो उसका शीघ्र ही समाधान हो जाएगा। इस पूजा के साथ ही दिन में रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने से आसुरी प्रभाव का नाश होता है। वहीं यदि मन में किसी भी तरह का भय हो तो दशहरे के दिन बगलामुखी अनुष्ठान करना लाभदायक रहता है।
19 OCT (WTN) – हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार आज दशहरे के दिन विशेष पूजा का महत्व रहता है। कई घरों में आज के दिन शस्त्र पूजा होती है तो कई घरों में कन्या भोज का आयोजन किया जाता है। यदि आप अपने घर में सुख और शांति की कामना कर रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कि किस विधि से पूजा करने से आपके घर सुख समृद्धि का वास होगा। इस विधि से पूजा करने से आपके जीवन में परेशानियां नहीं आएंगी और यदि आ भी गईं तो उनका शीघ्र निराकरण हो जाएगा।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दशहरे की पूजा के लिए एक अलग नियम है। दशहरा दोपहर का पर्व है ना कि सुबह या शाम का। दशहरे को विजयादशमी भी कहा गया है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार यह देवी जया और विजया का पर्व है और ये दोनो हीं देवी की सहचरी और योगनियां हैं। इस पर्व को विजय काल में ही मनाए जाने के विधान ग्रंथों में है, चूंकि विजयकाल दोपहर में ही पड़ता है इसलिए विजयादशमी की पूजा हमेशा दोपहर में ही की जानी चाहिए।
दशहरे के दिन दोपहर के समय घर में कुंवारी गाय का गोबर लाए और उसके चार गोल आकार में पिण्ड बनाएं। इसके बाद इन पिण्डों में से एक को भगवान राम, एक को लक्ष्मण, एक को भरत और एक को शत्रुघ्न मान कर उनकी सामान्य पूजा करें जैसी की रोज़ आप भगावन की करते हैं। पूजा करने के बाद चारों पिण्डों पर भीगा हुआ धान और चांदी का सिक्का रखें और उसे वस्त्र से ढक दें। इसके बाद इनकी गंध, पुष्प और द्रव्य आदि से पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करें।
इस विधि से पूजा करने से आपके घर में वर्षभर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होगी। और यदि कभी भी किसी भी तरह की परेशानी यदि आती है तो उसका शीघ्र ही समाधान हो जाएगा। इस पूजा के साथ ही दिन में रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने से आसुरी प्रभाव का नाश होता है। वहीं यदि मन में किसी भी तरह का भय हो तो दशहरे के दिन बगलामुखी अनुष्ठान करना लाभदायक रहता है।