जानिए क्यों हटाना चाहते हैं फेसबुक के शेयरहोल्डर्स मार्क जुकेरबर्ग को?
Thursday - October 18, 2018 1:04 pm ,
Category : WTN HINDI
फेसबुक सीईओ पद से जुकरबर्ग को हटाना नहीं है आसान!
मार्क जुकेरबर्ग के पास हैं फेसबुक के क़रीब 60 प्रतिशत वोटिंग अधिकार!
OCT 18 (WTN) – आप यदि फेसबुक का उपयोग करते हैं तो आपने मार्क जुकेरबर्ग का नाम तो ज़रूर ही सुना ही होगा। फेसबुक और मार्क जुकेरबर्ग एक दूसरे के पर्याय बन गये हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि फेसबुक के शेयर होल्डर्स मार्क जुकेरबर्ग को कम्पनी के सीईओ पद से हटाना चाहते हैं, तो आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्या हो गया है कि फेसबुक कम्पनी के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर मार्क जुकेरबर्ग को हटाने की बात चल रही है। क्या है यह पूरा मामला हम आपको बताते हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, कुछ शेयरहोल्डर्स ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें फेसबुक कम्पनी के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर मार्क जुकरबर्ग को हटाने की बात कही गई है। जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि कुछ हाई प्रोफाइल स्कैंडल्स पर जुकरबर्ग ने सही तरह से काम नहीं किया है। मार्क जुकेरबर्ग को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन, इलिनॉयस, रोड आइसलैण्ड और पेनसिल्वेनिया के राज्य कोषागार के अलावा न्यूयॉर्क सिटी पेँशन फण्ड ने संयुक्त रूप से किया है। हालांकि जुकरबर्ग को हटाने का फैसला अगले साल मई में होगा, जब उसके शेयरधारकों की वार्षिक बैठक में इस प्रस्ताव पर मतदान किया जाएगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फेसबुक की तरफ से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इधर, शेयरहोल्डर्स के प्रस्ताव में कहा गया है कि बोर्ड के अध्यक्ष के स्वतंत्र ना रहने और निरीक्षण की कमी के चलते अमेरिकी चुनाव में रूस के हस्तक्षेप और कैम्ब्रिज एनालिटिका डाटा लीक सरीखे मामले पर फेसबुक ने सही से काम नहीं किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यही वो दो मामले हैं जिनके कारण मार्क जुकेरबर्ग को काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अपने ख़िलाफ़ अभियान के बावजूद फेसबुक के चेयरमैन मार्क जुकरबर्ग का पलड़ा काफ़ी भारी नज़र आ रहा है। अप्रैल में कम्पनी की तरफ़ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग के पास करीब 60 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं। उन्हें हटाने का प्रस्ताव देने वाली कम्पनियों में न्यूयॉर्क सिटी पेंशन फण्ड के पास 31 जुलाई तक 45 लाख शेयर, जबकि पेनिसिल्वेनिया के राज्य कोषागार के पास 38,737 शेयर मौजूद थे। वहीं ट्रिलियम एसेट मैनेजमेंट के पास फेसबुक के 53,000 शेयर हैं। इलिनॉयस के पास 1,90,712 शेयर और रोड आइसलैण्ड के पास 1,68,230 शेयरों की जानकारी है।
लेकिन लगता नहीं है कि फेसबुक कम्पनी के शेयर होल्डर्स मार्क जुकेरबर्ग को उनके पद से हटा पाएंगे। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस समय जुकेरबर्ग के पास 60 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं जिसके आधार पर वे अपने पद पर बने रह सकते हैं। वहीं अमेरिकी चुनाव में रूस के हस्तक्षेप और कैम्ब्रिज एनालिटिका डाटा लीक सरीखे मामलों में लगे आरोपों के बाद जुकेरबर्ग बाक़ायदा सफाई दे चुके हैं। वहीं फेसबुक में शेयरहोल्डर्स के द्वारा मतदान शक्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए इसी तरह के प्रस्ताव पहले भी किए गए हैं, हालांकि इनमें से कोई भी पास नहीं हुआ है।
OCT 18 (WTN) – आप यदि फेसबुक का उपयोग करते हैं तो आपने मार्क जुकेरबर्ग का नाम तो ज़रूर ही सुना ही होगा। फेसबुक और मार्क जुकेरबर्ग एक दूसरे के पर्याय बन गये हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि फेसबुक के शेयर होल्डर्स मार्क जुकेरबर्ग को कम्पनी के सीईओ पद से हटाना चाहते हैं, तो आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर ऐसा क्या हो गया है कि फेसबुक कम्पनी के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर मार्क जुकेरबर्ग को हटाने की बात चल रही है। क्या है यह पूरा मामला हम आपको बताते हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, कुछ शेयरहोल्डर्स ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें फेसबुक कम्पनी के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफ़िसर मार्क जुकरबर्ग को हटाने की बात कही गई है। जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि कुछ हाई प्रोफाइल स्कैंडल्स पर जुकरबर्ग ने सही तरह से काम नहीं किया है। मार्क जुकेरबर्ग को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन, इलिनॉयस, रोड आइसलैण्ड और पेनसिल्वेनिया के राज्य कोषागार के अलावा न्यूयॉर्क सिटी पेँशन फण्ड ने संयुक्त रूप से किया है। हालांकि जुकरबर्ग को हटाने का फैसला अगले साल मई में होगा, जब उसके शेयरधारकों की वार्षिक बैठक में इस प्रस्ताव पर मतदान किया जाएगा।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फेसबुक की तरफ से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इधर, शेयरहोल्डर्स के प्रस्ताव में कहा गया है कि बोर्ड के अध्यक्ष के स्वतंत्र ना रहने और निरीक्षण की कमी के चलते अमेरिकी चुनाव में रूस के हस्तक्षेप और कैम्ब्रिज एनालिटिका डाटा लीक सरीखे मामले पर फेसबुक ने सही से काम नहीं किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यही वो दो मामले हैं जिनके कारण मार्क जुकेरबर्ग को काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अपने ख़िलाफ़ अभियान के बावजूद फेसबुक के चेयरमैन मार्क जुकरबर्ग का पलड़ा काफ़ी भारी नज़र आ रहा है। अप्रैल में कम्पनी की तरफ़ से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग के पास करीब 60 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं। उन्हें हटाने का प्रस्ताव देने वाली कम्पनियों में न्यूयॉर्क सिटी पेंशन फण्ड के पास 31 जुलाई तक 45 लाख शेयर, जबकि पेनिसिल्वेनिया के राज्य कोषागार के पास 38,737 शेयर मौजूद थे। वहीं ट्रिलियम एसेट मैनेजमेंट के पास फेसबुक के 53,000 शेयर हैं। इलिनॉयस के पास 1,90,712 शेयर और रोड आइसलैण्ड के पास 1,68,230 शेयरों की जानकारी है।
लेकिन लगता नहीं है कि फेसबुक कम्पनी के शेयर होल्डर्स मार्क जुकेरबर्ग को उनके पद से हटा पाएंगे। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस समय जुकेरबर्ग के पास 60 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं जिसके आधार पर वे अपने पद पर बने रह सकते हैं। वहीं अमेरिकी चुनाव में रूस के हस्तक्षेप और कैम्ब्रिज एनालिटिका डाटा लीक सरीखे मामलों में लगे आरोपों के बाद जुकेरबर्ग बाक़ायदा सफाई दे चुके हैं। वहीं फेसबुक में शेयरहोल्डर्स के द्वारा मतदान शक्ति को पुनः प्राप्त करने के लिए इसी तरह के प्रस्ताव पहले भी किए गए हैं, हालांकि इनमें से कोई भी पास नहीं हुआ है।