सपाक्स के प्रति धीरे-धीरे बढ़ता लोगों का रुझान, टिकट मांगने वालों की तादात बढ़ी
Thursday - October 18, 2018 4:25 pm ,
Category : WTN HINDI
सपाक्स के कारण भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की उड़ी नींद
साफ़ सुथरी छवि वालों को ही टिकट देने का सपाक्स का दावे
OCT 18 (WTN) – भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों की नीदें हराम करने वाली सपाक्स पार्टी के प्रति धीरे-धीरे लोगों को रुझान बढ़ता जा रहा है। आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के विरोध में अस्तित्व में आई सपाक्स से मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट चाहने वालों के फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ टिकट की इच्छा रखने वाले लोगों के कई आवेदन सपाक्स के पास आ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों से अलग दिखने की राह पर चल रही सपाक्स टिकट के लिए आए सभी आवेदनों का स्थानीय स्तर पर बारीकी से परीक्षण करा रही है। पार्टी इसमें यह देख रही है कि टिकट की उम्मीद लगाने वाला आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है।
सपाक्स के मुताबिक वे जातिगत आरक्षण के पूरी तरफ़ से ख़िलाफ़ हैं और वे इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है। इधर सपाक्स पार्टी ने एट्रोसिटी एक्ट में हुए संशोधन पर भी स्थिति साफ़ कर दी है और कहा है कि वो इसके ख़िलाफ़ है।
सपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी का कहना है कि पार्टी का फ़िलहाल किसी राजनीतिक दल से कोई गठबंधन नहीं है। समय आने पर पार्टी चुनाव बाद मुद्दों पर आधारित समर्थन देने पर विचार करेगी। सपाक्स का एक बड़ा दावा यह है कि भाजपा और कांग्रेस के कई नेता पर्दे के पीछे सपाक्स से जुड़ रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पार्टी को अभी तक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं मिली है। और इसके लिए सपाक्स ने चुनाव आयोग से एक चुनाव चिन्ह देने की मांग की है। कहा जा रहा है कि अक्टूबर के आख़िरी तक इस पर कोई फ़ैसला हो सकता है।
OCT 18 (WTN) – भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों की नीदें हराम करने वाली सपाक्स पार्टी के प्रति धीरे-धीरे लोगों को रुझान बढ़ता जा रहा है। आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के विरोध में अस्तित्व में आई सपाक्स से मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट चाहने वालों के फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ टिकट की इच्छा रखने वाले लोगों के कई आवेदन सपाक्स के पास आ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों से अलग दिखने की राह पर चल रही सपाक्स टिकट के लिए आए सभी आवेदनों का स्थानीय स्तर पर बारीकी से परीक्षण करा रही है। पार्टी इसमें यह देख रही है कि टिकट की उम्मीद लगाने वाला आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है।
सपाक्स के मुताबिक वे जातिगत आरक्षण के पूरी तरफ़ से ख़िलाफ़ हैं और वे इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है। इधर सपाक्स पार्टी ने एट्रोसिटी एक्ट में हुए संशोधन पर भी स्थिति साफ़ कर दी है और कहा है कि वो इसके ख़िलाफ़ है।
सपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी का कहना है कि पार्टी का फ़िलहाल किसी राजनीतिक दल से कोई गठबंधन नहीं है। समय आने पर पार्टी चुनाव बाद मुद्दों पर आधारित समर्थन देने पर विचार करेगी। सपाक्स का एक बड़ा दावा यह है कि भाजपा और कांग्रेस के कई नेता पर्दे के पीछे सपाक्स से जुड़ रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पार्टी को अभी तक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं मिली है। और इसके लिए सपाक्स ने चुनाव आयोग से एक चुनाव चिन्ह देने की मांग की है। कहा जा रहा है कि अक्टूबर के आख़िरी तक इस पर कोई फ़ैसला हो सकता है।