पत्रकार हत्याकाण्ड: बड़ा सवाल, क्या अमेरिका-सऊदी अरब रिश्तों में आएगी दरार?
Saturday - October 20, 2018 3:03 pm ,
Category : WTN HINDI
वाशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखते थे पत्रकार ख़ाशोज्जी, सऊदी सरकार के थे आलोचक
पत्रकार की हत्या से अमेरिका नाराज़, तुर्की ने खोली सऊदी अरब की पोल
OCT 20 (WTN) – अमेरिका के क़रीबी देशों में शुमार सऊदी अरब ने आख़िरकार दो सप्ताह से ज़्यादा समय के बाद इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उसके आलोचक रहे पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की इस्ताम्बुल स्थित वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ख़ाशोज्जी की गुमशुदगी के बाद से सऊदी अरब सरकार से पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी सवाल कर रही थी, लेकिन काफ़ी समय से सऊदी अरब इस पर चुप्पी साधे हुए था। सऊदी अरब की यह स्वीकारोक्ति तब आई है जब तुर्की के अधिकारियों ने शुक्रवार को अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इस्ताम्बुल शहर में एक जंगल की तलाशी ली थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की बात से लगातार इनकार करता आ रहा था, इसके बाद उसके सबसे बड़े समर्थक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह साबित हुआ कि पत्रकार की हत्या हुई है तो वह उस पर प्रतिबंध लगा सकता है।
अमेरिका से बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए आज सऊदी अरब ने यह स्वीकार कर लिया कि ख़ाशोज्जी की हत्या उसके अधिकारियों के हाथों हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जमाल ख़ाशोज्जी सऊदी अरब के नागरिक थे, लेकिन वे लम्बे समय से अमरीका में रह रहे थे। ख़ाशोज्जी को सऊदी की शाही सरकार का बड़ा आलोचक माना जाता था। वे अमरीका में वॉशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखते थे।
इधर सऊदी अरब ने उप खुफिया प्रमुख अहमद अल-असिरी और शाही अदालत के मीडिया सलाहकार सौद अल-काहतानी को बर्खास्त कर दिया है। ये दोनों, शहजादे मोहम्मद बिन सलमान के शीर्ष सहायक थे। वहीं सऊदी अरब के अटॉर्नी जनरल शेख साद-अल-मोजेब ने कहा कि दूतावास में ‘चर्चा’ के बहस में बदल जाने के बाद ख़ाशोज्जी की मौत हुई लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि पत्रकार का शव कहां है।
इधर पत्रकार ख़ाशोज्जी की मौत की पुष्टि होने पर अमेरिका का कहना है कि वह ‘दुखी’ है लेकिन उसने अपने प्रमुख सहयोगी देश के ख़िलाफ़ सम्भावित कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक रहे ख़ाशोज्जी को आखिरी बार दो अक्टूबर को इस्ताम्बुल में अपने देश के दूतावास में जाते देखा गया था उसके बाद से वह लापता थे। पत्रकार ख़ाशोज्जी के लापता होने पर रहस्य बन गया था। लगातार दबाव के बीच तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी अरब पर उनकी हत्या करने और उनके शव को विखण्डित करने का आरोप लगाया था।
वहीं ख़ाशोज्जी की मौत की पुष्टि करने के बाद, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और सऊदी के शाह ने टेलीफ़ोन पर की बातचीत में ख़ाशोज्जी के मामले की जांच में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। इससे पहले तुर्की लगातार यह बात कहता आ रहा था कि ख़ाशोज्जी की हत्या दूतावास में हो गई है, लेकिन सऊदी अरब इस बात से इनकार कर रहा था। इस बारे में सऊदी का कहना था कि ख़ाशोज्जी अपना निजी काम पूरा करने के बाद दूतावास से बाहर चले गए थे।
वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार ख़ाशोज्जी की सुनियोजित तरीक़े से हत्या के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच के रिश्तों में दरार आ सकती है। अमेरिका काफ़ी समय से ख़ाशोज्जी की जानकारी सऊदी अरब से मांग रहा था लेकिन सऊदी बार-बार इस मामले को टालता जा रहा था। कहा जा रहा है कि तुर्की ने इस मामले में सऊदी अरब का पर्दाफाश करके अमेरिका को खुश करने की कोशिश की है। जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय तुर्की और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव चल रहा है। अब देखना होगा कि सऊदी अरब पर किसी तरह की कार्रवाई अमेरिका करता है और क्या तुर्की के सहयोगात्मक रवैया की ईनाम अमेरिका उसे देगा।
OCT 20 (WTN) – अमेरिका के क़रीबी देशों में शुमार सऊदी अरब ने आख़िरकार दो सप्ताह से ज़्यादा समय के बाद इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उसके आलोचक रहे पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की इस्ताम्बुल स्थित वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ख़ाशोज्जी की गुमशुदगी के बाद से सऊदी अरब सरकार से पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी सवाल कर रही थी, लेकिन काफ़ी समय से सऊदी अरब इस पर चुप्पी साधे हुए था। सऊदी अरब की यह स्वीकारोक्ति तब आई है जब तुर्की के अधिकारियों ने शुक्रवार को अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इस्ताम्बुल शहर में एक जंगल की तलाशी ली थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की बात से लगातार इनकार करता आ रहा था, इसके बाद उसके सबसे बड़े समर्थक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह साबित हुआ कि पत्रकार की हत्या हुई है तो वह उस पर प्रतिबंध लगा सकता है।
अमेरिका से बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए आज सऊदी अरब ने यह स्वीकार कर लिया कि ख़ाशोज्जी की हत्या उसके अधिकारियों के हाथों हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जमाल ख़ाशोज्जी सऊदी अरब के नागरिक थे, लेकिन वे लम्बे समय से अमरीका में रह रहे थे। ख़ाशोज्जी को सऊदी की शाही सरकार का बड़ा आलोचक माना जाता था। वे अमरीका में वॉशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखते थे।
इधर सऊदी अरब ने उप खुफिया प्रमुख अहमद अल-असिरी और शाही अदालत के मीडिया सलाहकार सौद अल-काहतानी को बर्खास्त कर दिया है। ये दोनों, शहजादे मोहम्मद बिन सलमान के शीर्ष सहायक थे। वहीं सऊदी अरब के अटॉर्नी जनरल शेख साद-अल-मोजेब ने कहा कि दूतावास में ‘चर्चा’ के बहस में बदल जाने के बाद ख़ाशोज्जी की मौत हुई लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि पत्रकार का शव कहां है।
इधर पत्रकार ख़ाशोज्जी की मौत की पुष्टि होने पर अमेरिका का कहना है कि वह ‘दुखी’ है लेकिन उसने अपने प्रमुख सहयोगी देश के ख़िलाफ़ सम्भावित कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक रहे ख़ाशोज्जी को आखिरी बार दो अक्टूबर को इस्ताम्बुल में अपने देश के दूतावास में जाते देखा गया था उसके बाद से वह लापता थे। पत्रकार ख़ाशोज्जी के लापता होने पर रहस्य बन गया था। लगातार दबाव के बीच तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी अरब पर उनकी हत्या करने और उनके शव को विखण्डित करने का आरोप लगाया था।
वहीं ख़ाशोज्जी की मौत की पुष्टि करने के बाद, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और सऊदी के शाह ने टेलीफ़ोन पर की बातचीत में ख़ाशोज्जी के मामले की जांच में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। इससे पहले तुर्की लगातार यह बात कहता आ रहा था कि ख़ाशोज्जी की हत्या दूतावास में हो गई है, लेकिन सऊदी अरब इस बात से इनकार कर रहा था। इस बारे में सऊदी का कहना था कि ख़ाशोज्जी अपना निजी काम पूरा करने के बाद दूतावास से बाहर चले गए थे।
वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार ख़ाशोज्जी की सुनियोजित तरीक़े से हत्या के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच के रिश्तों में दरार आ सकती है। अमेरिका काफ़ी समय से ख़ाशोज्जी की जानकारी सऊदी अरब से मांग रहा था लेकिन सऊदी बार-बार इस मामले को टालता जा रहा था। कहा जा रहा है कि तुर्की ने इस मामले में सऊदी अरब का पर्दाफाश करके अमेरिका को खुश करने की कोशिश की है। जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय तुर्की और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव चल रहा है। अब देखना होगा कि सऊदी अरब पर किसी तरह की कार्रवाई अमेरिका करता है और क्या तुर्की के सहयोगात्मक रवैया की ईनाम अमेरिका उसे देगा।