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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी की ‘नई रणनीति’

Monday - October 22, 2018 12:05 pm , Category : WTN HINDI
पिछले विधानसभा चुनाव में सपा का नहीं खुला था खाता, 2003 में जीतीं थीं 7 सीटें
पिछले विधानसभा चुनाव में सपा का नहीं खुला था खाता, 2003 में जीतीं थीं 7 सीटें

सपा का हो सकता है कांग्रेस के साथ ‘गठबंधन’, बसपा से करेगी ‘दोस्ताना मुक़ाबला’

OCT 22 (WTN) – 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी इस बार के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लिए पूरी कोशिश करती दिख रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन काफ़ी खराब रहा था और उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी थी। पुरानी हार को भुलाते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अब मध्य प्रदेश में नये सिरे से समाजवादी पार्टी को मज़बूत बनाने की कवायद कर रहे हैं।
 
कहा जा रहा है कि इस बार समाजवादी पार्टी पूरी दमखम के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने वाली है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशियों की सूची लखनऊ में तैयार कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अभी तक कुल 9 प्रत्याशियों का ऐलान किया है, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष के नाम भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि अगली सूची में यूपी से लगे छतरपुर और टीकमगढ़ ज़िले के प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती है।
 
यूपी की सियायत की बड़ी खिलाड़ी सपा अभी तक मध्य प्रदेश में दो किस्तों में 9 प्रत्याशियों का एलान कर चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी दावेदारों के आवेदन लखनऊ मंगा लिए हैं। जानकारी के मुताबिक़, प्रदेश इकाई क़रीब 600 आवेदन अखिलेश यादव के पास भेज चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगले सप्ताह अखिलेश यादव छत्तीसगढ़ दौरे के समय छतरपुर और टीकमगढ़ ज़िले के कुछ प्रत्याशियों की घोषणा कर सकते हैं।
 
कहा जा रहा है कि सपा उम्मीदवारों की सूची में देरी का कारण मायावती की पार्टी बसपा के साथ सम्भावित ‘दोस्ताना मुक़ाबला’ भी हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ़ कर दिया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ किसी भी भी तरह का कोई भी गठबंधन नहीं होगा, लेकिन कहा जा रहा है ऐन मौक़े पर कांग्रेस के साथ भी सपा गठबंधन कर सकती है।
 
ऐसा इसलिए क्योंकि अखिलेश यादव ने कुछ दिनों पहले छतरपुर में कहा था कि कांग्रेस से जिसे टिकट नहीं मिलता है वो समाजवादी पार्टी में आ जाए, पार्टी उसे टिकट देगी। कहा जा रहा है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस किसी भी तरह का कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है, इसलिए भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण ना हो, किसी ना किसी तरह सपा से गठबंधन के रास्ते कांग्रेस ने खुले छोड़े हैं। कहा ये भी जा रहा है कि कांग्रेस ने अपनी सूची इसलिए ही जारी नहीं की है कि यदि सपा से गठबंधन होता है तो उसे कुछ सीटों दी जाएं।
 
यूपी में हुए कुछ उपचुनावों में बसपा-सपा-कांग्रेस के गठजोड़ ने भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त दी थी जिसके बाद माना जा रहा था कि मध्य प्रदेश में भी भाजपा विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए तीनों पार्टियां मिल कर चुनाव लड़ेंगी, लेकिन अभी तक की स्थिति में तीनों ही पार्टियों के बीच किसी भी तरह का कोई भी गठबंधन नहीं हो सका है।
 
बसपा ने गठबंधन ना होने के पीछे दिग्विजय सिंह समेत कुछ नेताओं पर आरोप लगाया था तो वहीं सपा ने कांग्रेस द्वारा चर्चा में हो रही देरी को गठबंधन ना होने के लिए ज़िम्मेदार बताया था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी, बसपा के साथ गठबंधन भले ही ना करें लेकिन वो दोस्ताना मुक़ाबला करेगी।
 
पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन काफ़ी खराब रहा था। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी थी। सपा के 161 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई । इस चुनाव में सपा को 1.20 प्रतिशत वोट ही मिले थे।
 
उससे पहले साल 2008 के विधानसभा चुनाव में एक सीट तो साल 2003 के विधानसभा चुनाव में सपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी। सपा की इस बार पूरी कोशिश है कि भाजपा के ख़िलाफ़ 15 सालों की सत्ता विरोधी लहर और एसी-एसी एक्ट में संशोधन से नाराज़ चल रहे पिछड़ा वर्ग को वोट बैंक के सहारे कुछ सीटों पर जीत हासिल की जाए।
 
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