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मध्य प्रदेश राज्य के गठन से आपातकाल तक 8 लोग बने मुख्यमंत्री

Wednesday - October 24, 2018 10:34 am , Category : WTN HINDI
राजा नरेशचंद्र सिंह सिर्फ़ 13 दिनों तक रहे मुख्यमंत्री
राजा नरेशचंद्र सिंह सिर्फ़ 13 दिनों तक रहे मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ के तीन लोगों को मिला मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य

OCT 24 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां ज़ोरों पर हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां चुनाव जीतने के लिए पूरा दम लगा रही हैं। बात करें भाजपा की तो बीजेपी की तरफ़ से शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, लेकिन वहीं कांग्रेस की ओर से साफ़ नहीं है उनका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है। वैसे दो नाम चर्चा में हैं, एक तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया।
 
चलिये आज आपको बताते हैं कि मध्य प्रदेश में अब तक कौन-कौन से व्यक्ति मुख्यमंत्री बने हैं। आज की पहली कड़ी में हम आपको बताते हैं कि मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद से लेकर आपातकाल ख़त्म होने तक मध्य प्रदेश में कौन-कौन मुख्यमंत्री बना।
 
मध्य प्रदेश राज्य बनने के बाद प्रदेश का पहले मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य पण्डित रविशंकर शुक्ल को मिला। कांग्रेस के रविशंकर शुक्ल 1 नवम्बर 1956 से 31 दिसम्बर 1956 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पण्डित रविशंकर शुक्ल छत्तीसगढ़ के सरायपाली से विधायक थे।
 
पण्डित रविशंकर शुक्ल के बाद कांग्रेस के भगवंत राव मण्डलोई मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इनका कार्यकाल 9 जनवरी 1957 से 30 जनवरी 1957 तक रहा। मण्डलोई मध्य प्रदेश के खण्डवा से विधायक थे। मण्डलोई के बाद कांग्रेस के कैलाश नाथ काटजू 31 जनवरी 1957 से 14 मार्च 1957 और फ़िर 14 मार्च 1957 से 11 मार्च 1962 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। काटजू मध्य प्रदेश के जावरा से विधायक थे। कैलाश नाथ काटजू के बाद एक बार फ़िर से भगवंत राव मण्डलोई मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इस समय उनका कार्यकाल 12 मार्च 1962 से 29 सितम्बर 1963 तक रहा।
 
भगवंत राव मण्डलोई के बाद कांग्रेस के द्वारका प्रसाद मिश्र मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इनका पहला कार्यकाल 30 सितम्बर 1963 से 8 मार्च 1967 तक रहा। वहीं इनका दूसरा कार्यकाल 9 मार्च 1967 से 29 जुलाई 1967 तक रहा। द्वारका प्रसाद मिश्र मध्य प्रदेश के कटंगी से विधायक थे।
 
द्वारका प्रसाद मिश्र के बाद कांग्रेस के गोविन्द नारायण सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सिंह का कार्यकाल 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक रहा। गोविन्द नारायण सिंह मध्य प्रदेश के रामपुर-बघेलान से विधायक थे।
 
गोविन्द नारायण सिंह के बाद राजा नरेशचंद्र सिंह 13 मार्च 1969 से 25 मार्च 1969 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। ये मध्य प्रदेश के सबसे कम समय तक यानि कि सिर्फ़ 13 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। राजा नरेशचंद्र सिंह छत्तीसगढ़ के पुसौर से विधायक थे।
 
राजा नरेशचंद्र सिंह के बाद कांग्रेस के श्यामाप्रसाद शुक्ल मध्य प्रदेश के मुख्ममंत्री बने। शुक्ल का कार्यकाल 26 मार्च 1969 से 28 जनवरी 1972 तक रहा। शुक्ल छत्तीसगढ़ के राजिम से विधायक थे। श्यामाचरण शुक्ल के बाद प्रकाशचंद्र सेठी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इनका पहला कार्यकाल 29 जनवरी 1972 से 22 मार्च 1972 तक रहा। वहीं इनका दूसरा कार्यकाल 23 मार्च 1972 से 22 दिसम्बर 1975 तक रहा। सेठी मध्य प्रदेश के उज्जैन-उत्तर सीट से विधायक थे।
 
प्रकाशचंद्र सेठी के बाद एक बार फ़िर से श्यामाचरण शुक्ल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इस बार उनका कार्यकाल 23 दिसम्बर 1975 से 30 अप्रैल 1977 तक रहा। 30 अप्रैल 1977 को मध्य प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा, जिसके बाद आपातकाल ख़त्म हुआ और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार हुई।
 
मध्य प्रदेश राज्य के गठन से लेकर आपातकाल के बाद राष्ट्रपति शासन लगने तक मध्य प्रदेश में 8 लोगों को मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिला। इन 8 मुख्यमंत्रियों में से 3 मुख्यमंत्री पण्डित रविशंकर शुक्ल, राजा नरेशचंद्र सिंह और श्यामाप्रसाद शुक्ल छत्तीसगढ़ से थे जबकि बाक़ी पांचों मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश से थे।
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