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विश्लेषण: आर्थिक मोर्चे पर क्या रंग लाई मोदी सरकार की मेहनत? देश में बढ़े करदाता

Tuesday - October 23, 2018 12:17 pm , Category : WTN HINDI
नोटबंदी और जीएसटी प्रधानमंत्री मोदी के परिवर्तनकारी फ़ैसले साबित हुए
नोटबंदी और जीएसटी प्रधानमंत्री मोदी के परिवर्तनकारी फ़ैसले साबित हुए

आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 80 प्रतिशत की वृद्धि
 
OCT 23 (WTN) – साल 2014 में अपनी सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि देश हित में कुछ ‘कड़वे फ़ैसले’ लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का आशय था कि देश को यदि आगे बढ़ना है तो कुछ ऐसे ‘कदम’ उठाए जाएंगे जिससे कुछ समय के लिए आम लोगों को ‘तक़लीफ़’ हो सकती है, लेकिन उसके ‘दूरगामी परिणाम’ काफ़ी ‘लाभदायक’ रहेंगे जो कि देश हित में होंगे
 
प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला काम देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने का किया और उसके लिए उन्होंने नोटबंदी जैसा ‘साहसी कदम’ उठाया। नोटबंदी के मोदी के फ़ैसले पर सभी चकित थे कि आख़िर प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता को ‘नाराज़’ करने का इतना बड़ा फ़ैसला क्यों लिया। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने आधार कार्ड को अपना ‘सबसे बड़ा हथियार’ बनाया और उसे बैंक एकाउण्ट से लिंक कर दिया। इतना ही नहीं आधार कार्ड को पेनकार्ड से भी लिंक कर दिया गया जिससे देश के हर व्यक्ति जिसके पास पैनकार्ड है उसकी पूरी आर्थिक जानकारी सरकार के पास थी। मोदी के इस फ़ैसले पर भी विपक्ष ने काफ़ी सवाल उठाए थे।
 
नोटबंदी के बाद मोदी सरकार ने देश में ‘एक देश-एक कर’ की अवधारण को लागू करने के लिए जीएसटी को लागू कराया। शुरू में जीएसटी काफ़ी पेचीदा था जिसके कारण व्यापारियों के साथ-साथ विपक्ष ने इसका काफ़ी विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे सरकार ने जीएसटी की पेचिदगियों को दूर किया और व्यापारियों की परेशानी दूर करने की पूरी कोशिश की।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने वोटबैंक की चिंता ना करते हुए देश की अर्थव्यवस्था के लिए कठोर फ़ैसले लिए जिसके बाद अब कहा जा सकता है प्रधानमंत्री मोदी के फ़ैसलों से देश को लाभ ही हुआ है और देश में पिछले चार सालों में करोड़पति आयकर दाताओं की संख्या में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार पिछले चार वित्तीय वर्षो के दौरान आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं इस दौरान एक करोड़ से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या 48,416 से बढ़कर 81,344 हो गई। है यानि कि करोड़पति करदाताओं की संख्या में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयकर विभाग के मुताबिक़ पिछले चार सालों में रिटर्न दाखिले में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में 3.79 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6.85 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए।
 
जानकारी के अनुसार पिछले तीन सालों में वेतनभोगी, गैर-वेतनभोगी और कॉरपोरेट करदाताओं की औसत आय में भी वृद्धि हुई है। वेतनभोगी करदाताओं की संख्या साल 2014-15 में 1.70 करोड़ थी जो कि साल 2017-18 में बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई। इस तरह देखा जाए तो पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वेतनभोगी करदाताओं की संख्या में 37 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान वेतनभोगी करदाताओं की औसत आय 5.76 लाख रुपये से 19 प्रतिशत बढ़कर 6.84 लाख रुपये हो गई।
 
वहीं बात करें गैर-वेतनभोगी करदाताओं की संख्या की तो पिछले इन तीन वर्षो में इनकी संख्या बढ़कर 1.95 करोड़ से बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई और उनकी औसत आय 4.11 लाख रुपए से 27 प्रतिशत बढ़कर 5.23 लाख रुपए हो गई।
 
वहीं कॉरपोरेट करदाताओं की संख्या साल 2014-15 में 32.28 लाख थी, जो कि साल 2017-18 में 55 प्रतिशत बढ़कर 49.95 लाख हो गई।
 
कहा जा सकता है मोदी सरकार के सख़्त आर्थिक अनुशासन और कठोर फ़ैसलों के कारण ही देश में करदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “बहुत से अर्थशास्त्री इस बात पर सहमत हैं कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत है। हमने अर्थव्यवस्था के लिए कड़े फैसले लिए हैं।” पिछले चार सालों में करोड़पति करदाताओं की संख्या में 68 प्रतिशत की वृद्धि यह बताती है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश के लोगों की आय में कमी नहीं बल्कि वृद्धि ही हुई है और नोटबंदी समेत जीएसटी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐसे फ़ैसले थे जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा और दिशा दी।
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