‘संघ’ पर बुरी ‘फंसी’ मध्य प्रदेश कांग्रेस, भाजपा पर भी उठे ‘सवाल’
Monday - November 12, 2018 3:03 pm ,
Category : WTN HINDI
कांग्रेस ने दी सफ़ाई, “संघ की शाखा लगाने पर नहीं लगेगा प्रतिबंध”
सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर बवाल! कांग्रेस ने दिया सत्ता में आने पर ‘पाबंदी’ का ‘वचन’!
NOV 12 (WTN) – मध्य प्रदेश में अपने घोषणा पत्र में सरकारी परिसरों में संघ यानि कि RSS की शाखा लगाने पर प्रतिबंध और सरकारी कर्मचारियों के संघ की गतिविधियों में शामिल होने पर पाबंदी की घोषणा करने के बाद से कांग्रेस बैकफुट पर है। हर तरफ़ मचे सियासी बवाल के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने इस पूरे मामले पर सफ़ाई दी है। कमलनाथ ने संघ की शाखाओं के बारे में कहा, “हमने कभी नही कहा कि आरएसएस पर बैन लगाएंगे। बीजेपी वाले अपने शब्द हमारे मुंह में डालना चाहते हैं। हमने केवल सरकारी कर्मचारियों के प्रतिबंध के लिए कहा है। आरएसएस को शाखाएं लगाने की पूरी छूट है।”
आगे कमलनाथ ने कहा कि जब मध्य प्रदेश में उमा भारती और बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री थे उस वक़्त भी ये व्यवस्था थी कि सरकारी भवनों के परिसर में शाखा नहीं लग सकती। कमलनाथ का कहना है कि सरकारी भवनों के परिसरों में संघ की शाखा लगाने पर तो केंद्र सरकार की भी रोक है।
भाजपा पर पलटवार करते हुए कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा ध्यान मोड़ने की राजनीति कर रही है। चुनाव के बाद यह राजनीति खत्म हो जाएगी। कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा को सिर्फ़ चुनाव के समय ही राम मन्दिर याद आता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि यदि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो सरकारी भवनों के परिसर में लग रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। कांग्रेस के इस वादे के बाद से राज्य की राजनीति गर्मा गई है जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर बयानबाजी हो रही है।
इस मामले में भाजपा का कहना है कि कांग्रेस RSS के नाम पर सिर्फ अल्पसंख्यकों और अन्य लोगों के बीच संघ का दुष्प्रचार करती है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी वहां जाते हैं जहां पर देश विरोधी नारे लगते हैं लेकिन उन्हें संघ से विरोध है।
लेकिन कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले भाजपा को खुद के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को भी देखना चाहिए क्योंकि खुद भाजपा के दो मुख्यमंत्रियों उमा भारती और बाबूलाल गौर के समय सरकारी कर्मचारी के संघ की शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध था।
आपक जानकारी के लिए बता दें कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय पारित एक आदेश में साफ़ किया गया था कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा।”
दिग्विजय सिंह सरकार का यह आदेश साल 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद भी जारी रहा। उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तो उनके पहले कार्यकाल के दस महीने तक वही पुराना नियम लागू था। सितम्बर 2006 में शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में शासकीय कर्मचारियों पर लगे उस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है जिसके तहत वे आरएसएस के सदस्य नहीं बन सकते थे।
संघ के बहाने भाजपा कांग्रेस पर निशाना साध रही है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जनता के बीच भाजपा को इस सवाल का जवाब देना होगा कि उमा भारती और बाबूलाल गौर के समय भी तो सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की गतिविधियों में शरीक होने पर प्रतिबंध था। लेकिन लगता नहीं है कि प्रदेश की जनता को कुछ याद होगा और भाजपा चाहेगी भी नहीं कि पुरानी बातें दोहराई जाएं, क्योंकि यदि ऐसा होता है इससे भाजपा को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
लेकिन राजनीति के पण्डितों का कहना है कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में संघ का ज्रिक कर बैठे बैठाए आफ़त मोल ले ली है। भाजपा पूरी कोशिश करेगी कि इसे इस तरह से प्रचारित किया जाए कि कांग्रेस संघ और हिन्दू विरोधी है। यदि भाजपा अपनी इस कोशिश में सफ़ल हो गई तो कांग्रेस को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
NOV 12 (WTN) – मध्य प्रदेश में अपने घोषणा पत्र में सरकारी परिसरों में संघ यानि कि RSS की शाखा लगाने पर प्रतिबंध और सरकारी कर्मचारियों के संघ की गतिविधियों में शामिल होने पर पाबंदी की घोषणा करने के बाद से कांग्रेस बैकफुट पर है। हर तरफ़ मचे सियासी बवाल के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने इस पूरे मामले पर सफ़ाई दी है। कमलनाथ ने संघ की शाखाओं के बारे में कहा, “हमने कभी नही कहा कि आरएसएस पर बैन लगाएंगे। बीजेपी वाले अपने शब्द हमारे मुंह में डालना चाहते हैं। हमने केवल सरकारी कर्मचारियों के प्रतिबंध के लिए कहा है। आरएसएस को शाखाएं लगाने की पूरी छूट है।”
आगे कमलनाथ ने कहा कि जब मध्य प्रदेश में उमा भारती और बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री थे उस वक़्त भी ये व्यवस्था थी कि सरकारी भवनों के परिसर में शाखा नहीं लग सकती। कमलनाथ का कहना है कि सरकारी भवनों के परिसरों में संघ की शाखा लगाने पर तो केंद्र सरकार की भी रोक है।
भाजपा पर पलटवार करते हुए कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा ध्यान मोड़ने की राजनीति कर रही है। चुनाव के बाद यह राजनीति खत्म हो जाएगी। कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा को सिर्फ़ चुनाव के समय ही राम मन्दिर याद आता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि यदि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो सरकारी भवनों के परिसर में लग रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। कांग्रेस के इस वादे के बाद से राज्य की राजनीति गर्मा गई है जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर बयानबाजी हो रही है।
इस मामले में भाजपा का कहना है कि कांग्रेस RSS के नाम पर सिर्फ अल्पसंख्यकों और अन्य लोगों के बीच संघ का दुष्प्रचार करती है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी वहां जाते हैं जहां पर देश विरोधी नारे लगते हैं लेकिन उन्हें संघ से विरोध है।
लेकिन कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले भाजपा को खुद के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को भी देखना चाहिए क्योंकि खुद भाजपा के दो मुख्यमंत्रियों उमा भारती और बाबूलाल गौर के समय सरकारी कर्मचारी के संघ की शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध था।
आपक जानकारी के लिए बता दें कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय पारित एक आदेश में साफ़ किया गया था कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा।”
दिग्विजय सिंह सरकार का यह आदेश साल 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद भी जारी रहा। उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तो उनके पहले कार्यकाल के दस महीने तक वही पुराना नियम लागू था। सितम्बर 2006 में शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में शासकीय कर्मचारियों पर लगे उस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है जिसके तहत वे आरएसएस के सदस्य नहीं बन सकते थे।
संघ के बहाने भाजपा कांग्रेस पर निशाना साध रही है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जनता के बीच भाजपा को इस सवाल का जवाब देना होगा कि उमा भारती और बाबूलाल गौर के समय भी तो सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की गतिविधियों में शरीक होने पर प्रतिबंध था। लेकिन लगता नहीं है कि प्रदेश की जनता को कुछ याद होगा और भाजपा चाहेगी भी नहीं कि पुरानी बातें दोहराई जाएं, क्योंकि यदि ऐसा होता है इससे भाजपा को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
लेकिन राजनीति के पण्डितों का कहना है कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में संघ का ज्रिक कर बैठे बैठाए आफ़त मोल ले ली है। भाजपा पूरी कोशिश करेगी कि इसे इस तरह से प्रचारित किया जाए कि कांग्रेस संघ और हिन्दू विरोधी है। यदि भाजपा अपनी इस कोशिश में सफ़ल हो गई तो कांग्रेस को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ सकता है।