मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों की मुस्लिम प्रत्याशियों से ‘दूरी’
Tuesday - November 13, 2018 12:47 pm ,
Category : WTN HINDI
भाजपा ने दिया पूर्व विधायक रसूल अहमद सिद्दीकी की बेटी फ़ातिमा को टिकट
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: क्या भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को मुस्लिम प्रत्याशियों पर ‘नहीं’ है जीत का ‘भरोसा’?
NOV 13 (WTN) – भाजपा पर हमेशा से मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगता रहता है। कहा जाता है कि भाजपा चुनावों में मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट नहीं देती है। मध्य प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मात्र एक ही मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया था। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोपाल-उत्तर सीट से आरिफ़ बेग को कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील के ख़िलाफ़ चुनाव में खड़ा किया था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील ने भाजपा उम्मीदवार आरिफ़ बेग को 6,664 मतों से पराजित किया था।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोपाल-उत्तर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील के ख़िलाफ़ महिला मुस्लिम उम्मीदवार को खड़ा किया है ताक़ि आरिफ़ अक़ील को घेरा जा सके। भाजपा की एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी फ़ातिमा रसूल सिद्दीकी राज्य के पूर्व मंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता रहे रसूल अहमद सिद्दीकी की बेटी हैं। फ़ातिमा पिछले गुरुवार को ही भाजपा में शामिल हुईं और भाजपा ने उन्हें टिकट दे दिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल-उत्तर सीट से आरिफ़ अक़ील 1990, 1998, 2003, 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। साल 1993 में आरिफ़ अक़ील को भाजपा के रमेश शर्मा से हार का सामना करना पड़ा था। भोपाल-उत्तर कांग्रेस की काफ़ी मज़बूत स्थिति वाली सीट है और इस सीट को जीतने के लिए भाजपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी को इस बार फ़िर से मैदान में उतारा है ताक़ि कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाई जा सके।
पेशे से दांतों की डॉक्टर फ़ातिमा के पिता की मृत्यु बीस साल पहले हो गई थी। रसूल अहमद सिद्दीकी की मौत के बाद उनकी पत्नी ने भोपाल-उत्तर सीट से कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें यह नहीं मिला जिसके बाद से सिद्दीकी परिवार का कांग्रेस से सम्बन्ध ख़त्म हो गया। कहा जा रहा है कि भाजपा फ़ातिमा सिद्दीकी के ज़रिये आरिफ़ अक़ील को घेरने की रणनीति बना रही है। भोपाल-उत्तर सीट सालों से कांग्रेस का मज़बूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट को जीतने के लिए भाजपा अपने बड़े मुस्लिम नेताओं को भोपाल-उत्तर में चुनाव प्रचार के लिए उतार सकती है।
फ़ातिमी सिद्दीकी के अलावा भाजपा ने किसी अन्य मुस्लिम को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया है। भाजपा का इस बारे में कहना है कि यदि कोई जीतने वाला और जनाधार वाला मुस्लिम प्रत्याशी होता तो भाजपा उसे ज़रुर प्रत्याशी बनाती। कांग्रेस जो कि मुस्लिमों के हितों की बात करती है उसने भी मध्य प्रदेश में 230 में से सिर्फ़ तीन सीटों पर ही मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिये हैं वो भी उन सीटों पर जहां पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज़्यादा है।
कांग्रेस ने भोपाल-उत्तर से आरिफ़ अक़ील को टिकट दिया है तो भोपाल-मध्य से आरिफ़ मसूद को अपना उम्मीदवार बनाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल-मध्य सीट से आरिफ़ मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर पिछली बार भी चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्रनाथ सिंह से हार गए थे। वहीं कांग्रेस ने विदिशा ज़िले की सिरोंज विधानसभा सीट से मसर्रत शाहिद को अपना प्रत्याशी बनाया है। मसर्रत शाहिद पहले भी सिरोंज सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
अब देखना होगा कि इस विधानसभा में कितने मुस्लिम प्रत्याशी चुनकर विधायक बनते हैं। पिछली विधानसभा में सिर्फ़ आरिफ़ अक़ील ही एकमात्र मुस्लिम विधायक थे। जहां तक भोपाल उत्तर सीट की बात है तो कहा जा रहा है कि इस बार यहां पर आरिफ़ अक़ील को कड़ी टक्कर मिल सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा प्रत्याशी फ़ातिमा रसूल सिद्दीकी के परिवार का राजनीति से पुराना सम्बन्ध है और मुस्लिम और महिला प्रत्याशी होने के कारण मुस्लिम बाहुल्य भोपाल-उत्तर सीट से फ़ातिमा को काफ़ी समर्थन मिलने की उम्मीद भाजपा ने लगाई है।
NOV 13 (WTN) – भाजपा पर हमेशा से मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगता रहता है। कहा जाता है कि भाजपा चुनावों में मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट नहीं देती है। मध्य प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मात्र एक ही मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया था। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोपाल-उत्तर सीट से आरिफ़ बेग को कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील के ख़िलाफ़ चुनाव में खड़ा किया था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील ने भाजपा उम्मीदवार आरिफ़ बेग को 6,664 मतों से पराजित किया था।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोपाल-उत्तर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ़ अक़ील के ख़िलाफ़ महिला मुस्लिम उम्मीदवार को खड़ा किया है ताक़ि आरिफ़ अक़ील को घेरा जा सके। भाजपा की एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी फ़ातिमा रसूल सिद्दीकी राज्य के पूर्व मंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता रहे रसूल अहमद सिद्दीकी की बेटी हैं। फ़ातिमा पिछले गुरुवार को ही भाजपा में शामिल हुईं और भाजपा ने उन्हें टिकट दे दिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल-उत्तर सीट से आरिफ़ अक़ील 1990, 1998, 2003, 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। साल 1993 में आरिफ़ अक़ील को भाजपा के रमेश शर्मा से हार का सामना करना पड़ा था। भोपाल-उत्तर कांग्रेस की काफ़ी मज़बूत स्थिति वाली सीट है और इस सीट को जीतने के लिए भाजपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी को इस बार फ़िर से मैदान में उतारा है ताक़ि कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाई जा सके।
पेशे से दांतों की डॉक्टर फ़ातिमा के पिता की मृत्यु बीस साल पहले हो गई थी। रसूल अहमद सिद्दीकी की मौत के बाद उनकी पत्नी ने भोपाल-उत्तर सीट से कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें यह नहीं मिला जिसके बाद से सिद्दीकी परिवार का कांग्रेस से सम्बन्ध ख़त्म हो गया। कहा जा रहा है कि भाजपा फ़ातिमा सिद्दीकी के ज़रिये आरिफ़ अक़ील को घेरने की रणनीति बना रही है। भोपाल-उत्तर सीट सालों से कांग्रेस का मज़बूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट को जीतने के लिए भाजपा अपने बड़े मुस्लिम नेताओं को भोपाल-उत्तर में चुनाव प्रचार के लिए उतार सकती है।
फ़ातिमी सिद्दीकी के अलावा भाजपा ने किसी अन्य मुस्लिम को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया है। भाजपा का इस बारे में कहना है कि यदि कोई जीतने वाला और जनाधार वाला मुस्लिम प्रत्याशी होता तो भाजपा उसे ज़रुर प्रत्याशी बनाती। कांग्रेस जो कि मुस्लिमों के हितों की बात करती है उसने भी मध्य प्रदेश में 230 में से सिर्फ़ तीन सीटों पर ही मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिये हैं वो भी उन सीटों पर जहां पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज़्यादा है।
कांग्रेस ने भोपाल-उत्तर से आरिफ़ अक़ील को टिकट दिया है तो भोपाल-मध्य से आरिफ़ मसूद को अपना उम्मीदवार बनाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल-मध्य सीट से आरिफ़ मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर पिछली बार भी चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्रनाथ सिंह से हार गए थे। वहीं कांग्रेस ने विदिशा ज़िले की सिरोंज विधानसभा सीट से मसर्रत शाहिद को अपना प्रत्याशी बनाया है। मसर्रत शाहिद पहले भी सिरोंज सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
अब देखना होगा कि इस विधानसभा में कितने मुस्लिम प्रत्याशी चुनकर विधायक बनते हैं। पिछली विधानसभा में सिर्फ़ आरिफ़ अक़ील ही एकमात्र मुस्लिम विधायक थे। जहां तक भोपाल उत्तर सीट की बात है तो कहा जा रहा है कि इस बार यहां पर आरिफ़ अक़ील को कड़ी टक्कर मिल सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा प्रत्याशी फ़ातिमा रसूल सिद्दीकी के परिवार का राजनीति से पुराना सम्बन्ध है और मुस्लिम और महिला प्रत्याशी होने के कारण मुस्लिम बाहुल्य भोपाल-उत्तर सीट से फ़ातिमा को काफ़ी समर्थन मिलने की उम्मीद भाजपा ने लगाई है।