विश्लेषण: राफेल डील पर आरोपों को ‘सही’ साबित करने की बड़ी ज़िम्मेदारी राहुल गांधी पर
Tuesday - November 13, 2018 3:24 pm ,
Category : WTN HINDI
दसॉल्ट कम्पनी के सीईओ ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया ‘झूठा’
राहुल गांधी ने फ़िर से प्रधानमंत्री मोदी का कहा ‘चोर’, दसॉल्ट के सीईओ ने आरोपों को बताया ‘बेबुनियाद’
NOV 13 (WTN) – राफेल के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक लड़ाई अब ‘चरम’ पर है। कल यानि सोमवार को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील से जुड़ी ‘ज़रूरी’ जानकारी सौंपी। जिसके बाद आज राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए फ़िर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से ‘चोर’ कहा है। इस सबके बीच दसॉल्ट के सीईओ का इंटरव्यू सामने आया है जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर ‘निराधार’ आरोप लगाने की बात कही है।
राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट में मोदीजी ने अपनी चोरी मान ली है। हलफनामे में सरकार ने माना कि उन्होंने बिना वायुसेना से पूछे कॉन्ट्रैक्ट बदला और 30,000 करोड़ रुपये अम्बानी की जेब में डाले। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।”
राहुल गांधी के आरोपों के बीच फ्रांस की कम्पनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने एक समाचार एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में राफेल डील पर उठ रहे हर एक सवाल का जवाब दिया। अपने इंटरव्यू में ट्रैपियर ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप को ‘झूठा’ करार दिया।
एरिक ट्रैपियर ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं। राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर के बारे में सरासर झूठ बोला है। डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है वह बिल्कुल सही है, क्योंकि वे झूठ नहीं बोलते हैं।”
राफेल के दाम के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा, “जो अभी एयरक्राफ्ट मिल रहे हैं, वह क़रीब 9 प्रतिशत सस्ते हैं। जो 36 विमान का रेट है, वह मौजूदा 18 के बिल्कुल समान है। ये दाम दोगुना हो सकता था, लेकिन ये समझौता सरकार से सरकार के बीच का है इसलिए दाम नहीं बढ़ाया गया। बल्कि दाम 9 प्रतिशत सस्ता ही हुआ है। सीईओ ट्रैपियर ने बताया कि उड़ने के लिए तैयार स्थिति में 36 कॉन्ट्रैक्ट वाले राफेल का दाम 126 कॉन्ट्रैक्ट वाले दाम से काफी सस्ता है।”
HAL के साथ क़रार टूटने पर उन्होंने कहा, “जब 126 राफेल विमानों के क़रार की बात चल रही थी, तब HAL से क़रार की ही बात थी, लेकिन डील सही तरीके से आगे बढ़ती तो क़रार HAL को ही मिलता। लेकिन 126 विमान का क़रार सही नहीं हुआ इसलिए 36 विमान के कॉन्ट्रैक्ट पर बात हुई। जिसके बाद ये क़रार रिलायंस के साथ आगे बढ़ा।” आगे ट्रैम्पिर ने बताया, “आखिरी दिनों में HAL ने खुद कहा था कि वह इस ऑफसेट में शामिल होने का इच्छुक नहीं हैं और रिलायंस के साथ करार का रास्ता पूरी तरह से साफ़ हो गया।”
इस बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिये अपने हलफनामे में साफ़ किया कि आख़िर क्यों देश को राफेल विमान खरीदने की ज़रूरत पड़ी। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्यम श्रेणी के बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमान प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में पहले की यूपीए सरकार ने काफ़ी देरी कर दी। इस दौरान देश के दुश्मनों ने चौथी और पांचवी पीढ़ी के विमानों को बेड़े में शामिल कर लिया। इसी कारण से भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की संख्या में आयी गिरावट को तुरंत दूर करने की ज़रूरत थी।
यह पूरी जानकारी उस दस्तावेज में दी गई जिसे केंद्र सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को उचित ठहराने के लिए सार्वजनिक किया है। दस्तावेज में कहा गया है कि एमएमआरसीए खरीदने का प्रस्ताव भारतीय वायु सेना ने सरकार को भेजा था और 2007 में 126 लड़ाकू विमानों के लिए निविदा जारी की गयी थी। इस दौरान 126 बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) खरीद प्रक्रिया में लम्बे समय तक अनिर्णय से हमारे दुश्मनों ने आधुनिक विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया और पुराने संस्करणों का उन्नयन किया।
आगे दस्तावेज में कहा गया है कि उपलब्ध सूचना के मुताबिक दुश्मनों ने साल 2010 से 2015 के दौरान 400 से अधिक लड़ाकू विमानों को शामिल किया। हमारे विरोधी लड़ाकू विमानों को लेकर अपनी क्षमता बढ़ा रहे थे और हमारे लड़ाकू विमानों की क्षमता घट रही थी उससे स्थिति बहुत नाजुक हो गयी थी। भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की गिरती संख्या को तुरंत दूर करने और लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गयी। इसके लिए पहले से चल रही प्रक्रिया के तहत शर्तों के साथ उड़ान भरने की स्थिति में 36 राफेल विमानों (दो स्कवाड्रन) को खरीदने का इरादा बनाया गया।
केन्द्र सरकार ने राफेल विमानों के बारे में अपनी स्थिति साफ़ कर दी है वहीं राहुल गांधी लगातार राफेल मुद्दे पर मोदी सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। तो केन्द्र की मोदी सरकार और दसॉल्ट कम्पनी बार बार कह रही है कि राफेल सौदे में किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है। जिस तरह से राहुल गांधी लगातार सरकार पर राफेल डील पर आरोप लगा रहे हैं, यदि वे अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाए तो उन्हें देश को इसका जवाब देना होगा क्योंकि देश की वायुसेना का कहना है कि राफेल की डील भारतीय वायुसेना के लिए फायदे का सौदा है।
NOV 13 (WTN) – राफेल के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक लड़ाई अब ‘चरम’ पर है। कल यानि सोमवार को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील से जुड़ी ‘ज़रूरी’ जानकारी सौंपी। जिसके बाद आज राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए फ़िर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से ‘चोर’ कहा है। इस सबके बीच दसॉल्ट के सीईओ का इंटरव्यू सामने आया है जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर ‘निराधार’ आरोप लगाने की बात कही है।
राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट में मोदीजी ने अपनी चोरी मान ली है। हलफनामे में सरकार ने माना कि उन्होंने बिना वायुसेना से पूछे कॉन्ट्रैक्ट बदला और 30,000 करोड़ रुपये अम्बानी की जेब में डाले। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।”
राहुल गांधी के आरोपों के बीच फ्रांस की कम्पनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने एक समाचार एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में राफेल डील पर उठ रहे हर एक सवाल का जवाब दिया। अपने इंटरव्यू में ट्रैपियर ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप को ‘झूठा’ करार दिया।
एरिक ट्रैपियर ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं। राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर के बारे में सरासर झूठ बोला है। डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है वह बिल्कुल सही है, क्योंकि वे झूठ नहीं बोलते हैं।”
राफेल के दाम के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा, “जो अभी एयरक्राफ्ट मिल रहे हैं, वह क़रीब 9 प्रतिशत सस्ते हैं। जो 36 विमान का रेट है, वह मौजूदा 18 के बिल्कुल समान है। ये दाम दोगुना हो सकता था, लेकिन ये समझौता सरकार से सरकार के बीच का है इसलिए दाम नहीं बढ़ाया गया। बल्कि दाम 9 प्रतिशत सस्ता ही हुआ है। सीईओ ट्रैपियर ने बताया कि उड़ने के लिए तैयार स्थिति में 36 कॉन्ट्रैक्ट वाले राफेल का दाम 126 कॉन्ट्रैक्ट वाले दाम से काफी सस्ता है।”
HAL के साथ क़रार टूटने पर उन्होंने कहा, “जब 126 राफेल विमानों के क़रार की बात चल रही थी, तब HAL से क़रार की ही बात थी, लेकिन डील सही तरीके से आगे बढ़ती तो क़रार HAL को ही मिलता। लेकिन 126 विमान का क़रार सही नहीं हुआ इसलिए 36 विमान के कॉन्ट्रैक्ट पर बात हुई। जिसके बाद ये क़रार रिलायंस के साथ आगे बढ़ा।” आगे ट्रैम्पिर ने बताया, “आखिरी दिनों में HAL ने खुद कहा था कि वह इस ऑफसेट में शामिल होने का इच्छुक नहीं हैं और रिलायंस के साथ करार का रास्ता पूरी तरह से साफ़ हो गया।”
इस बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिये अपने हलफनामे में साफ़ किया कि आख़िर क्यों देश को राफेल विमान खरीदने की ज़रूरत पड़ी। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्यम श्रेणी के बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमान प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में पहले की यूपीए सरकार ने काफ़ी देरी कर दी। इस दौरान देश के दुश्मनों ने चौथी और पांचवी पीढ़ी के विमानों को बेड़े में शामिल कर लिया। इसी कारण से भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की संख्या में आयी गिरावट को तुरंत दूर करने की ज़रूरत थी।
यह पूरी जानकारी उस दस्तावेज में दी गई जिसे केंद्र सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को उचित ठहराने के लिए सार्वजनिक किया है। दस्तावेज में कहा गया है कि एमएमआरसीए खरीदने का प्रस्ताव भारतीय वायु सेना ने सरकार को भेजा था और 2007 में 126 लड़ाकू विमानों के लिए निविदा जारी की गयी थी। इस दौरान 126 बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) खरीद प्रक्रिया में लम्बे समय तक अनिर्णय से हमारे दुश्मनों ने आधुनिक विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया और पुराने संस्करणों का उन्नयन किया।
आगे दस्तावेज में कहा गया है कि उपलब्ध सूचना के मुताबिक दुश्मनों ने साल 2010 से 2015 के दौरान 400 से अधिक लड़ाकू विमानों को शामिल किया। हमारे विरोधी लड़ाकू विमानों को लेकर अपनी क्षमता बढ़ा रहे थे और हमारे लड़ाकू विमानों की क्षमता घट रही थी उससे स्थिति बहुत नाजुक हो गयी थी। भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की गिरती संख्या को तुरंत दूर करने और लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गयी। इसके लिए पहले से चल रही प्रक्रिया के तहत शर्तों के साथ उड़ान भरने की स्थिति में 36 राफेल विमानों (दो स्कवाड्रन) को खरीदने का इरादा बनाया गया।
केन्द्र सरकार ने राफेल विमानों के बारे में अपनी स्थिति साफ़ कर दी है वहीं राहुल गांधी लगातार राफेल मुद्दे पर मोदी सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। तो केन्द्र की मोदी सरकार और दसॉल्ट कम्पनी बार बार कह रही है कि राफेल सौदे में किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है। जिस तरह से राहुल गांधी लगातार सरकार पर राफेल डील पर आरोप लगा रहे हैं, यदि वे अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाए तो उन्हें देश को इसका जवाब देना होगा क्योंकि देश की वायुसेना का कहना है कि राफेल की डील भारतीय वायुसेना के लिए फायदे का सौदा है।