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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का बागियों पर एक्शन

Thursday - November 15, 2018 4:03 pm , Category : WTN HINDI
भाजपा-कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं बागी
भाजपा-कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं बागी

60 से ज़्यादा बागी भाजपा से बाहर, कांग्रेस ने भी की कार्रवाई
 

NOV 15 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान मचा हुआ है। चुनाव के लिए नाम वापसी के बाद अब दोनों ही पार्टियां एक दूसरे के ख़िलाफ़ प्रचार के साथ-साथ बाग़ियों के ख़िलाफ़ एक्शन के मोड में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विधानसभा चुनाव में नाम वापसी के बाद भी चुनाव लड़ रहे ऐसे 60 बागियों को भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया है जो कि भाजपा से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने के बाद चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने फ़िलहाल एक पूर्व विधायक को निष्कासित किया है, बाक़ी दर्जनों प्रत्याशियों पर भी कभी भी कार्रवाई हो सकती है।
 
भाजपा ने पूरी कोशिश की थी कि बागी प्रत्याशियों चुनाव से नाम वापस ले लें, इसमें भाजपा कुछ हद तक सफ़ल भी रही, लेकिन फ़िर भी पार्टी लाइन से बाहर जाकर टिकट ना मिलने के बाद निर्दलीय या दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वालों के ख़िलाफ़ भाजपा ने कड़ी कार्रवाई की है। भाजपा ने अपनी पहली सूची में पार्टी के दिग्गज नेताओं समेत 60 से ज़्यादा नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है।
 
जिन लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है उनमें पूर्व मंत्री सरताज सिंह, पूर्व मंत्री और दमोह से पूर्व सांसद रामकृष्ण कुसमरिया, भिण्ड से विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, गुना की बमोरी सीट से पूर्व मंत्री के.एल.अग्रवाल, पूर्व मोर्चा अध्यक्ष धीरज पटैरिया, बैरसिया से पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर, पुष्पराजगढ़ सीट से पूर्व विधायक सुदामा सिंह, ग्वालियर से पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, बाबूलाल मेवरा, राजकुमार मेव, शाजापुर से जेपी मण्डलोई जैसे बड़े जनाधार वाले नेता शामिल हैं।
 
इधर बागियों से भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी परेशान है और वह भी एक्शन मोड पर है। कांग्रेस ने झाबुआ के पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। बाक़ी बागियों पर भी पार्टी आज या कल में बड़ा फैसला ले सकती है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस जिन नेताओं पर कार्रवाई कर सकती है उनमें पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी और राजनगर से सपा प्रत्याशी बन चुके उनके बेटे नितिन चतुर्वेदी, उज्जैन से पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू उनके बेटे अजीत बौरासी, उज्जैन दक्षिण से प्रत्याशी जयसिंह दरबार, उज्जैन उत्तर से प्रत्याशी माया त्रिवेदी, ग्वालियर दक्षिण से प्रत्याशी साहिब सिंह गुर्जर, भगवानपुरा से प्रत्याशी केदार डाबर समेत कई नेताओं पर कार्रवाई हो सकती है।
 
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को डर सता रहा है कि नोटा और सपाक्स के बाद यदि बागी प्रत्याशी भी मैदान में रहे तो दोनों ही पार्टियों के वोट कटेंगे जिसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ेगा। पार्टी से निकालने के बाद अब देखना होगा कि दोनों ही पार्टियों बागियों से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं। कांग्रेस से ज़्यादा भाजपा को बागियों का डर सता रहा है क्योंकि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद उसका परम्परागत वोट बैंक उससे नाराज़ चल रहा है, ऐसे में यदि बागियों ने भी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगा दी तो लगातार चौथी बार चुनाव जीतना भाजपा के लिए कठिन हो जाएगा।