चंद्र की कलाओं पर आधारित है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष
Sunday - November 18, 2018 10:05 am ,
Category : WTN HINDI
पंद्रह-पंद्रह दिनों के होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष
पूर्णिमा और अमावस्या के बाद बदलता है पक्ष
NOV 18 (WTN) – हिन्दू पंचांग के अनुसार एक साल में 12 महीने होते है। वहीं तीन साल बाद अधिक मास आता है तो चौथे साल 13 महीने हो जाते हैं। हर महीने के एक दिन को तिथि कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि की अवधि 19 से 24 घण्टों तक की हो सकती है। पंचांग में यह भी माना जाता है कि हर माह में तीस दिन होते है। इन दिनों की चन्द्र की गति के अनुसार की जाती है।
हिन्दू पंचांग में आपने कई बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के बारे में सुना होगा। दरअसल चन्द्रमा की कलाओं के अधिक या कम होने के आधार पर ही हिन्दू माह को दो पक्षों में बांटा गया है। इन्हीं पक्षों को कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष कहा जाता है।
पहले जानते हैं कृष्ण पक्ष के विषय में। पूर्णिमा और अमावस्या के मध्य के भाग को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। पूर्णिमा के अगले ही दिन से ही कृष्ण पक्ष शुरू माना जाता है जो कि लगभग 15 दिनों का रहता है। मान्यता है कि कृष्ण पक्ष में किसी भी शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए। कोई भी शुभ काम नहीं करने के पीछे कई तर्क दिये जाते हैं। जैसे पूर्णिमा के बाद जब चन्द्रमा घटता है, यानि चन्द्रमा की कलाएं कम होती हैं, तो चन्द्रमा की शक्ति कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही चन्द्रमा के आकार में कमी आने से रातें अंधेरी होती है। इस कारण कृष्ण पक्ष को शुभ नहीं माना जाता है।
आइये अब जानते हैं शुक्ल पक्ष के विषय में। अमावस्या और पूर्णिमा के मध्य के अंतराल को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। अमावस्या के बाद के लगभग 15 दिन इस पक्ष में आते है। अमावस्या के अगले ही दिन से चन्द्रमा का आकर बढ़ना शुरू हो जाता है, या ऐसा कहा जाए कि चन्द्रमा की कलाएं भी बढ़ती हैं। ऐसा होने से चन्द्रमा बड़ा होता जाता है और रातें अंधेरी नहीं रहतीं, बल्कि चांद की रोशनी से चमक जाती हैं।
इस दौरान चंद्र बल मजबूत होता है और यही कारण है कि कोई भी शुभ काम करने के लिए इस पक्ष को उपयुक्त और सर्वश्रेष्ठ हिन्दू पंचांग में माना जाता है। किसी भी नए काम की शुरुआत भी शुक्ल पक्ष में ही की जाती है।
NOV 18 (WTN) – हिन्दू पंचांग के अनुसार एक साल में 12 महीने होते है। वहीं तीन साल बाद अधिक मास आता है तो चौथे साल 13 महीने हो जाते हैं। हर महीने के एक दिन को तिथि कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि की अवधि 19 से 24 घण्टों तक की हो सकती है। पंचांग में यह भी माना जाता है कि हर माह में तीस दिन होते है। इन दिनों की चन्द्र की गति के अनुसार की जाती है।
हिन्दू पंचांग में आपने कई बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के बारे में सुना होगा। दरअसल चन्द्रमा की कलाओं के अधिक या कम होने के आधार पर ही हिन्दू माह को दो पक्षों में बांटा गया है। इन्हीं पक्षों को कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष कहा जाता है।
पहले जानते हैं कृष्ण पक्ष के विषय में। पूर्णिमा और अमावस्या के मध्य के भाग को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। पूर्णिमा के अगले ही दिन से ही कृष्ण पक्ष शुरू माना जाता है जो कि लगभग 15 दिनों का रहता है। मान्यता है कि कृष्ण पक्ष में किसी भी शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए। कोई भी शुभ काम नहीं करने के पीछे कई तर्क दिये जाते हैं। जैसे पूर्णिमा के बाद जब चन्द्रमा घटता है, यानि चन्द्रमा की कलाएं कम होती हैं, तो चन्द्रमा की शक्ति कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही चन्द्रमा के आकार में कमी आने से रातें अंधेरी होती है। इस कारण कृष्ण पक्ष को शुभ नहीं माना जाता है।
आइये अब जानते हैं शुक्ल पक्ष के विषय में। अमावस्या और पूर्णिमा के मध्य के अंतराल को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। अमावस्या के बाद के लगभग 15 दिन इस पक्ष में आते है। अमावस्या के अगले ही दिन से चन्द्रमा का आकर बढ़ना शुरू हो जाता है, या ऐसा कहा जाए कि चन्द्रमा की कलाएं भी बढ़ती हैं। ऐसा होने से चन्द्रमा बड़ा होता जाता है और रातें अंधेरी नहीं रहतीं, बल्कि चांद की रोशनी से चमक जाती हैं।
इस दौरान चंद्र बल मजबूत होता है और यही कारण है कि कोई भी शुभ काम करने के लिए इस पक्ष को उपयुक्त और सर्वश्रेष्ठ हिन्दू पंचांग में माना जाता है। किसी भी नए काम की शुरुआत भी शुक्ल पक्ष में ही की जाती है।