मध्य प्रदेश में भाजपा के विज्ञापन से कांग्रेस हुई ‘ख़फ़ा’
Saturday - November 17, 2018 11:24 am ,
Category : WTN HINDI
कांग्रेस ने की शिवराज सिंह चौहान के विज्ञापन की चुनाव आयोग में शिकायत
बिना नेता के चुनाव लड़ रही कांग्रेस के ‘निशाने’ पर शिवराज सिंह चौहान
NOV 17 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों, 2003, 2008 और 2013 में भाजपा से शिकस्त खा चुकी कांग्रेस इस बार पूरी ताक़त के साथ चुनाव प्रचार में लगी हुई है। वहीं 15 सालों से सत्ता का सुख भोग रही भाजपा के लिए इस बार के विधानसभा चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। 28 तारीख को मतदान से पहले दोनों ही पार्टियों जमकर प्रचार में लगी हुई हैं, लेकिन प्रचार पर ही भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान मचा हुआ है। आखिर क्या है पूरा मामला जानते हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के निशाने पर पूरी तरह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। कांग्रेस ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है जिससे शिवराज सिंह चौहान को घेरा ना जा सके। इसी कड़ी में कांग्रेस ने अब भाजपा के ओर से होने वाले विज्ञापनों के खर्चे को लेकर शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। अब कांग्रेस ने भाजपा के “माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” विज्ञापन पर आपत्ति दर्ज कराई है।
मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि शिवराज सिंह चौहान के नाम और फोटो के साथ अगर प्रचार हो रहा है तो क्यों नहीं उसका खर्चा शिवराज सिंह के निजी खर्चे में जोड़ा जाए। दरअसल भाजपा के विज्ञापन, “माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” पर कांग्रेस का आपत्ति है कि यह विज्ञापन लगभग हर रोज़ प्रदेश के ज़्यादातर अख़बारों में छप रहा है और इस विज्ञापन में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे और नाम का प्रयोग किया जा जा रहा है जबकि वे चुनाव में खुद एक प्रत्याशी हैं, ऐसे में भाजपा के साथ-साथ इस विज्ञापन के ज़रिये शिवराज सिंह चौहान का भी प्रचार हो रहा है जो कि ग़लत है।
कांग्रेस का आरोप है कि 11 नवम्बर से छप रहे इन विज्ञापनों का खर्चा यदि जोड़ा जाए तो वो 28 लाख रुपये की तय चुनावी खर्च सीमा से ज़्यादा है जो कि एक प्रत्याशी की चुनाव प्रचार के दौरान खर्च करने की अधिकतम सीमा है। इसलिए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि शिवराज सिंह चौहान के इस विज्ञापन देने पर रोक लगानी चाहिए।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ इस बारे में मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल.कांताराव का कहना है कि चुनाव आयोग के एक सर्कुलर के अनुसार यदि उम्मीदवार पार्टी के स्टार कैम्पेनर सूची में भी शामिल है तो चुनावी प्रचार का खर्चा उसके निजी खाते में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि कांताराव का कहना है कि कांग्रेस की शिकायत की जांच की जाएगी।
यह सही है कि लगभग हर रोज़ समाचार पत्रों में छप रहे विज्ञापन, “माफ़ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” को यदि शिवराज सिंह चौहान के चुनावी खर्च में जोड़ दिया जाए तो यह व्यय एक प्रत्याशी के लिए तय 28 लाख रुपये की सीमा से काफ़ी ज़्यादा हो जाएगा। लेकिन दूसरा तर्क है कि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में भाजपा की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं तो ऐसे में उनके नाम और चेहरे का उपयोग किया जाना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की शिकायत पर क्या फैसला चुनाव आयोग करता है।
लेकिन उससे बड़ा सवाल कांग्रेस पर है कि भाजपा ने तो अपनी तरफ से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में शिवराज सिंह चौहान को उतारा है लेकिन कांग्रेस की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के दावेदारा कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। तो क्या मान लिया जाए कि कांग्रेस बिना नेता के चुनाव मैदान में है।
NOV 17 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों, 2003, 2008 और 2013 में भाजपा से शिकस्त खा चुकी कांग्रेस इस बार पूरी ताक़त के साथ चुनाव प्रचार में लगी हुई है। वहीं 15 सालों से सत्ता का सुख भोग रही भाजपा के लिए इस बार के विधानसभा चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। 28 तारीख को मतदान से पहले दोनों ही पार्टियों जमकर प्रचार में लगी हुई हैं, लेकिन प्रचार पर ही भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान मचा हुआ है। आखिर क्या है पूरा मामला जानते हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के निशाने पर पूरी तरह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। कांग्रेस ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है जिससे शिवराज सिंह चौहान को घेरा ना जा सके। इसी कड़ी में कांग्रेस ने अब भाजपा के ओर से होने वाले विज्ञापनों के खर्चे को लेकर शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। अब कांग्रेस ने भाजपा के “माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” विज्ञापन पर आपत्ति दर्ज कराई है।
मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि शिवराज सिंह चौहान के नाम और फोटो के साथ अगर प्रचार हो रहा है तो क्यों नहीं उसका खर्चा शिवराज सिंह के निजी खर्चे में जोड़ा जाए। दरअसल भाजपा के विज्ञापन, “माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” पर कांग्रेस का आपत्ति है कि यह विज्ञापन लगभग हर रोज़ प्रदेश के ज़्यादातर अख़बारों में छप रहा है और इस विज्ञापन में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे और नाम का प्रयोग किया जा जा रहा है जबकि वे चुनाव में खुद एक प्रत्याशी हैं, ऐसे में भाजपा के साथ-साथ इस विज्ञापन के ज़रिये शिवराज सिंह चौहान का भी प्रचार हो रहा है जो कि ग़लत है।
कांग्रेस का आरोप है कि 11 नवम्बर से छप रहे इन विज्ञापनों का खर्चा यदि जोड़ा जाए तो वो 28 लाख रुपये की तय चुनावी खर्च सीमा से ज़्यादा है जो कि एक प्रत्याशी की चुनाव प्रचार के दौरान खर्च करने की अधिकतम सीमा है। इसलिए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि शिवराज सिंह चौहान के इस विज्ञापन देने पर रोक लगानी चाहिए।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ इस बारे में मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल.कांताराव का कहना है कि चुनाव आयोग के एक सर्कुलर के अनुसार यदि उम्मीदवार पार्टी के स्टार कैम्पेनर सूची में भी शामिल है तो चुनावी प्रचार का खर्चा उसके निजी खाते में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि कांताराव का कहना है कि कांग्रेस की शिकायत की जांच की जाएगी।
यह सही है कि लगभग हर रोज़ समाचार पत्रों में छप रहे विज्ञापन, “माफ़ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज” को यदि शिवराज सिंह चौहान के चुनावी खर्च में जोड़ दिया जाए तो यह व्यय एक प्रत्याशी के लिए तय 28 लाख रुपये की सीमा से काफ़ी ज़्यादा हो जाएगा। लेकिन दूसरा तर्क है कि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में भाजपा की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं तो ऐसे में उनके नाम और चेहरे का उपयोग किया जाना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की शिकायत पर क्या फैसला चुनाव आयोग करता है।
लेकिन उससे बड़ा सवाल कांग्रेस पर है कि भाजपा ने तो अपनी तरफ से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में शिवराज सिंह चौहान को उतारा है लेकिन कांग्रेस की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के दावेदारा कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। तो क्या मान लिया जाए कि कांग्रेस बिना नेता के चुनाव मैदान में है।