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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में ‘बिना’ कप्तान के कांग्रेस

Saturday - November 17, 2018 1:59 pm , Category : WTN HINDI
शिवराज सिंह चौहान के मुक़ाबले कांग्रेस से कौन?
शिवराज सिंह चौहान के मुक़ाबले कांग्रेस से कौन?

बड़ा सवाल: आखिर क्यों विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया?
 

NOV 17 (WTN) – जैसा कि आपको याद ही होगा कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और नरेन्द्र मोदी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे भी, मोदी ने वाराणसी और वड़ोदरा से दो जगहों से चुनाव लड़ा और जीता भी। वहीं दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की तरफ़ से अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, तो बाक़ायदा उन्होंने चुनाव लड़ा वो भी शीला दीक्षित के ख़िलाफ़ और उन्हें पराजित भी किया।
 
लेकिन मध्य प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ़ से ना ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और ना ही चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि ये दोनों ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। तो क्या मान लिया जाए कि कांग्रेस जानती है कि यदि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव के पहले घोषित कर दिया गया, तो मध्य प्रदेश कांग्रेस की विश्वविख्यात आपसी फूट के कारण चुनाव से पहले ही कांग्रेस हार जाएगी।
 
और यदि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में आपसी फूट की आशंका नहीं है, तो क्या कारण है कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव मैदान में नहीं उतारा गया। यदि ये दोनों ही नेता चुनाव मैदान में उतरते तो कमलनाथ महाकौशल और सिंधिया ग्वालियर-चम्बल में भाजपा को बुरी तरह पराजित कर सकते थे। या फ़िर यह मान लिया जाए कि कांग्रेस मान बैठी है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में भी जीतना तो मुश्किल है, तो क्यों बड़े नेताओं को मैदान में उतार कर आपसी फूट को बढ़ावा दिया जाए।
 
अब यदि कांग्रेसी यह तर्क दें कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव प्रचार में व्यस्त रहेंगे तो प्रचार में व्यस्त तो शिवराज सिंह चौहान भी हैं और वो चुनाव लड़ रहे हैं, तो क्या मान लिया जाए कि नरेन्द्र मोदी और अरविंद केजरीवाल की तरह हिम्मत मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता नहीं जुटा पा रहे हैं कि ताल ठोंककर चुनाव लड़ा जाए। हां बस एक बड़े नेता अरुण यादव को ज़रूर शिवराज सिंह चौहान के ख़िलाफ चुनाव मैदान में कांग्रेस ने उतारा है, लेकिन वो भी प्रतीकात्मक।
 
कहीं ऐसा ना हो कि जनता के बीच यह संदेश चला जाए कि कांग्रेस के दोनों ही बड़े नेता जब चुनाव मैदान में नहीं उतर रहे हैं यानि कि कांग्रेस बिना कप्तान के मैच खेल रही है, वैसे यूपी में भी भाजपा ने बिना कप्तान के मैच खेला था, और बाद में मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ ने भी चुनाव नहीं लड़ा था।

तो क्या मध्य प्रदेश में भी यह मान लिया जाए कि कांग्रेस यह सोचकर चल रही है कि जीत गये तो देखेंगे, नहीं तो क्या करना बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतारकर। यदि ऐसा है तो जनता के बीच ग़लत संदेश जा सकता है क्योंकि बिना नेता के चुनाव मैदान में उतरना यानि की पहले ही मार लेना माना जाता है। लेकिन कांग्रेस ने सोच समझकर ही यह कदम उठाया होगा, क्योंकि वो जानती है कि यदि कमलनाथ या ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों में किसी किसी एक को भी मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा जाता तो कांग्रेस की आपसी फूट के कारण कांग्रेस को हर एक सीट पर अपनों का ही विरोध झेलना पड़ता।