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विश्लेषण: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘कूटनीतिक’ जीत, अमेरिका ने पाकिस्तान को बताया ‘विश्वासघाती’

Monday - November 19, 2018 3:24 pm , Category : WTN HINDI
मोदी की रणनीति के चलते ट्रम्प ने भी माना पाकिस्तानी को ‘धोखेबाज़’
मोदी की रणनीति के चलते ट्रम्प ने भी माना पाकिस्तानी को ‘धोखेबाज़’

पाकिस्तान से हुआ अमेरिका का मोह भंग, रंग ला रही है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘चाल’

NOV 19 (WTN) – भारत हमेशा से ही कहता आया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देने वाला और आतंक को बढ़ावा देने वाला दुनिया का सबसे ‘कुख्यात’ देश है, लेकिन दुनिया इस बात को नज़रअंदाज़ करती आई थी। खैर देर ही सही, लेकिन अब अमेरिका को भी भारत की बात समझ में आ गई है कि पाकिस्तान आतंक को पनाह देने वाला देश है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राणनीति कामयाब रही और आतंकवाद के मसले पर पहले से ही पूरी दुनिया की आलोचना और फज़ीहत झेल रहे पाकिस्‍तान को अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने हकीकत से रूबरु करा दिया है।
 
अपने कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के बारे में साफ़ साफ़ कहते हुए उसे जमकर फटकार लगाई है। ट्रम्प ने पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से विश्वासघाती बताते हुए कहा, “इस देश ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में कुछ नहीं किया, बल्कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन जैसे खूंखार आतंकी को अपनी सरजमीं पर पनाह दे रखी थी, जिसने अमेरिका में 11 सितम्बर, 2001 को हुए सबसे भीषण आतंकी हमलों की साजिश कर सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान ले ली थी।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि पिछले ही सप्‍ताह उनके ही प्रशासन ने एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तान अल-कायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में बेहद प्रभावी सहयोगी रहा है। हालांकि पाकिस्तान को हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है। ट्रम्प प्रशासन की ओर से यह बयान अमेरिकी विदेश विभाग के आतंकवाद रोधी समन्वयक नाथन एलेक्जेंडर सेल्स ने कांग्रेस की एक बैठक में दिया था।
 
एलेक्जेंडर सेल्‍स के बयान के बाद अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रम्प ने 'फॉक्‍स न्‍यूज' को दिए इंटरव्‍यू में कहा, “पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए कुछ नहीं किया, इसने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को अपने देश में छिपाया हुआ था।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने 2 मई 2011 में एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन को पाकिस्‍तान के एबटाबाद में मार गिराया था, जो पाकिस्‍तान की सैन्‍य अकादमी से कुछ ही किलोमीटर दूर था।
 
आगे अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा, “पाकिस्तान में हर कोई जानता था कि वह (लादेन) वहां रह रहा था। वह भी ऐसी जगह जो पाकिस्तानी मिलिट्री अकादमी के बिल्कुल पास में थी।” डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्‍तान को अमेरिकी वित्‍तीय मदद बंद करने के अपने प्रशासन के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, “हम पाकिस्तान को हर साल 1.3 बिलियन डॉलर की मदद देते रहे, लेकिन अब हमने इसे बंद कर दिया है, क्योंकि पाकिस्तान ने हमारे लिए कुछ नहीं किया।”
 
जिस भाषा का प्रयोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के लिए किया है, इस तरह की भाषा पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पाकिस्तान के लिए प्रयोग में लाई गई है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान पर अमेरिका का शिकंजा दरअसल भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति की जीत है। कहा जाता है कि नरेन्द्र मोदी की रणनीति के कारण है पाकिस्तान आज पूरी दुनिया में अकेला पड़ गया है। मोदी ने योजनाबद्ध तरीके से पाकिस्तान को अमेरिका समेत दुनिया के देशों के सामने एक ऐसे देश के रूप में साबित कर दिया है जो कि आतंक को बढ़ावा देता है। चीन को छोड़कर कोई भी देश फिलहाल पाकिस्तान के करीब नहीं है और चीन ने भी सीपीईसी के जाल में पाकिस्तान को इस तरह से फंसा लिया है कि पाकिस्तान कर्ज में डूब गया है।
 
कई बार पाकिस्तान के राजनेता कह चुके हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कहने पर ही पाकिस्तान पर शिकंजा कसा है और मोदी के कहने पर ही ट्रम्प ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोकी है। पाकिस्तान को अमेरिकी मदद पर रोक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कितनी रणनीति है यह तो आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन यदि ऐसा है तो ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
 
पाकिस्तान चीन के कर्ज में बुरी तरह से फंस चुका है और आने वाले समय में पाकिस्तान की चीन से नज़दीकी के कारण अमेरिका पाकिस्तान से और भी दूरी बनाएगा जो कि भारत के लिए अच्छी ख़बर है, क्योंकि अमेरिका से मिल रही आर्थिक सहायता का उपयोग पाकिस्तान आतंकी गतिविधियां रोकने में कम और भारत के ख़िलाफ़ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ज़्यादा करता था।
 
वहीं पाकिस्तान को जो भी मदद चीन दे रहा है उस पर पूरी नज़र चीन की रहती है कि कहीं उसके दिये पैसों से आतंक को तो बढ़ावा नहीं मिल रहा है, क्योंकि चीन किसी भी तरह के आतंक को चीन में बढ़ने देने से पहले ही कुचल देने में भी भलाई समझता है। यानि कि पाकिस्तान अब बुरी तरह से फंस चुका है, क्योंकि अमेरिका से मिल रही सहायता मिलना उसे बंद हो गई वहीं वो चीन के कर्ज में बुरी तरह से फंस गया है।