विश्लेषण: आखिर क्या मायने हैं मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बढ़े हुए मतदान प्रतिशत के?
Friday - November 30, 2018 2:32 pm ,
Category : WTN HINDI
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुआ रिकॉर्ड मतदान
क्या बढ़े मतदान से शिवराज सरकार की बिदाई तय है, या फ़िर से मिलेगा कांग्रेस को वनवास?
NOV 30 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुए जोरदार मतदान ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। क्या शहर और क्या ग्रामीण इलाके, हर कहीं जमकर मतदान हुआ। चुनाव में मतदाताओं ने जमकर हिस्सा लिया और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लेकिन बात करें राजनेताओं की तो उनके लिए यह बड़ा हुआ मतदान चिंता का कारण बन गया है, और इसी कारण राजनेता तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं कि आखिर इस रिकॉर्ड तोड़ मतदान के क्या मायने हो सकते हैं।
भारतीय राजनीति में 80 और 90 के दशकों का ट्रेंड देखा जाए, तो बढ़े हुए मतदान को लोगों के गुस्से के रूप में देखा जाता था, और माना जाता था कि बढ़ा हुआ मतदान बदलाव लेकर आता था। यानि कि माना जाता था कि ज़्यादा मतदान होने के पीछे कारण है कि जनता वर्तमान सरकार को हटाना चाहती है। इसके पीछे कारण यह दिया जाता था कि लोग गुस्से में सरकार बदलने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मतदान कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बारे में राजनीति दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के मुताबिक़, बढ़े हुए मतदान का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। राकेश सिंह के अनुसार बढ़ा हुआ मतदान भाजपा की जीत की तरफ़ इशारा कर रहा है। वहीं भाजपा के कई बड़े नेताओं का मानना है कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के काम से खुश थी, इसलिए मतदाताओं ने घरों से निकल कर भाजपा के लिए वोट किया ताकि कहीं कांग्रेस पार्टी सत्ता में ना आ जाए।
वहीं मध्य प्रदेश में 15 सालों से चुनाव हार रही कांग्रेस का बढ़े हुए मतदान के पीछे कुछ और ही तर्क है। कांग्रेस का मानना है कि जनता में प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा है, जिसके कारण जनता ने भाजपा सरकार को हटाने के लिए जमकर सत्ता विरोधी मतदान किया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का तो दावा है कि राज्य में कांग्रेस सरकार बना रही है।
इधर बढ़े हुए मतदान के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी कांग्रेस की जीत का दावा किया है। इस बारे में कमलनाथ का कहना है कि शुरूआत में लग रहा था कि कांग्रेस सरकार बनाएगी, लेकिन जिस तरह से मतदान हुआ है, उससे लगता है कि परिणाम बेहद चौंकाने वाला होगा। यानि कि कमलनाथ का मनाना है कि चौंकाने वाले नतीजों से उनका मतलब था कि कांग्रेस के पक्ष में ऐसा परिणाम आ सकता है, जिसकी किसी ने उम्मीद भी न की हो।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 28 नवम्बर को मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में पिछले बार की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। 3.7 प्रतिशत की वृद्धि अपने आप में काफ़ी मायने रखती है और कोई भी राजनीतिक दल इसे हल्के में नहीं ले सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर सिर्फ़ तीन हज़ार मतों का रहा था। ऐसे में मतदान में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि ने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की नींद उड़ा दी है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत में हुई वृद्धि के अपने-अपने कारण बता रही हों और जीत का दावा कर रही हों, लेकिन इतना तो तय है कि इस बार के रिकॉर्ड मतदान ने दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों की दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यदि बढ़ा हुआ मतदान सत्ता विरोधी लहर है, तो शिवराज सरकार की बिदाई तय है, वहीं यदि बड़ा हुआ मतदान सत्ता के पक्ष में गया है, तो कांग्रेस को फ़िर से 5 साल का वनवास मिलना तय है। खैर इस बढ़े हुए मतदान के क्या मायने हैं इसका पता तो 11 दिसम्बर को काउंटिंग के दिन ही चलेगा, तब तक लगाते रहिए कयास।
NOV 30 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुए जोरदार मतदान ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। क्या शहर और क्या ग्रामीण इलाके, हर कहीं जमकर मतदान हुआ। चुनाव में मतदाताओं ने जमकर हिस्सा लिया और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लेकिन बात करें राजनेताओं की तो उनके लिए यह बड़ा हुआ मतदान चिंता का कारण बन गया है, और इसी कारण राजनेता तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं कि आखिर इस रिकॉर्ड तोड़ मतदान के क्या मायने हो सकते हैं।
भारतीय राजनीति में 80 और 90 के दशकों का ट्रेंड देखा जाए, तो बढ़े हुए मतदान को लोगों के गुस्से के रूप में देखा जाता था, और माना जाता था कि बढ़ा हुआ मतदान बदलाव लेकर आता था। यानि कि माना जाता था कि ज़्यादा मतदान होने के पीछे कारण है कि जनता वर्तमान सरकार को हटाना चाहती है। इसके पीछे कारण यह दिया जाता था कि लोग गुस्से में सरकार बदलने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मतदान कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बारे में राजनीति दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के मुताबिक़, बढ़े हुए मतदान का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। राकेश सिंह के अनुसार बढ़ा हुआ मतदान भाजपा की जीत की तरफ़ इशारा कर रहा है। वहीं भाजपा के कई बड़े नेताओं का मानना है कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के काम से खुश थी, इसलिए मतदाताओं ने घरों से निकल कर भाजपा के लिए वोट किया ताकि कहीं कांग्रेस पार्टी सत्ता में ना आ जाए।
वहीं मध्य प्रदेश में 15 सालों से चुनाव हार रही कांग्रेस का बढ़े हुए मतदान के पीछे कुछ और ही तर्क है। कांग्रेस का मानना है कि जनता में प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा है, जिसके कारण जनता ने भाजपा सरकार को हटाने के लिए जमकर सत्ता विरोधी मतदान किया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का तो दावा है कि राज्य में कांग्रेस सरकार बना रही है।
इधर बढ़े हुए मतदान के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी कांग्रेस की जीत का दावा किया है। इस बारे में कमलनाथ का कहना है कि शुरूआत में लग रहा था कि कांग्रेस सरकार बनाएगी, लेकिन जिस तरह से मतदान हुआ है, उससे लगता है कि परिणाम बेहद चौंकाने वाला होगा। यानि कि कमलनाथ का मनाना है कि चौंकाने वाले नतीजों से उनका मतलब था कि कांग्रेस के पक्ष में ऐसा परिणाम आ सकता है, जिसकी किसी ने उम्मीद भी न की हो।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 28 नवम्बर को मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में पिछले बार की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। 3.7 प्रतिशत की वृद्धि अपने आप में काफ़ी मायने रखती है और कोई भी राजनीतिक दल इसे हल्के में नहीं ले सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर सिर्फ़ तीन हज़ार मतों का रहा था। ऐसे में मतदान में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि ने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की नींद उड़ा दी है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत में हुई वृद्धि के अपने-अपने कारण बता रही हों और जीत का दावा कर रही हों, लेकिन इतना तो तय है कि इस बार के रिकॉर्ड मतदान ने दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों की दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यदि बढ़ा हुआ मतदान सत्ता विरोधी लहर है, तो शिवराज सरकार की बिदाई तय है, वहीं यदि बड़ा हुआ मतदान सत्ता के पक्ष में गया है, तो कांग्रेस को फ़िर से 5 साल का वनवास मिलना तय है। खैर इस बढ़े हुए मतदान के क्या मायने हैं इसका पता तो 11 दिसम्बर को काउंटिंग के दिन ही चलेगा, तब तक लगाते रहिए कयास।