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विश्लेषण: क्या भाजपा को मिल सकता है पेट्रोल-डीजल सस्ते होने का फ़ायदा?

Saturday - December 1, 2018 3:56 pm , Category : WTN HINDI
सस्ते कच्चे तेल और मज़बूत रुपये का कमाल, पेट्रोल-डीज़ल के दाम हुए कम
सस्ते कच्चे तेल और मज़बूत रुपये का कमाल, पेट्रोल-डीज़ल के दाम हुए कम

पेट्रोल-डीज़ल के साथ गैस सिलेंडर भी हुआ सस्ता, राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल सकता है लाभ

DEC 01 (WTN) – पेट्रोल-डीज़ल सस्ता, रसोई गैस सिलेण्डर सस्ता और सोना भी सस्ता। क्या वाकई में महंगे दिन चले गये हैं और सस्ताई का जमाना आ गया है, या फ़िर विधानसभा चुनाव को देखते हुए अभी बाज़ार में पेट्रोल-डीज़ल और रसोई गैस सिलेण्डर के दाम कम किये जा रहे हैं ताकि उसका फ़ायदा भाजपा को मिल सके। सरकार पर आरोप तो कई लग सकते हैं, लेकिन इस मामले में सरकार का कहना है कि पेट्रोल-डीज़ल के दामों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है और इनके दाम अब तेल कम्पनियां अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत और रुपये की वैल्यू के अनुसार ही निर्धारित करती हैं।
 
सबसे पहले बात करते हैं पेट्रोल और डीज़ल की, तो इन दोनों के दाम शनिवार को लगातार 10वें दिन कम हुए। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आने से पेट्रोल और डीज़ल के दाम में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले एक महीने में दिल्ली में पेट्रोल 6.54 रुपए और डीज़ल 6.43 रुपए प्रति लीटर सस्ता हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की क़ीमतों में कमी की सिलसिला जारी है। शुक्रवार को फ़िर कच्चे तेल के दाम में एक प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
 
तेल व्यापार से जुड़े जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीज़ल के भाव अभी दो से तीन रुपए प्रति लीटर और कम हो सकते हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अक्टूबर में चार साल के उच्च स्तर पर जाने बाद ब्रेंट क्रूड में क़रीब 27 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है। वहीं कच्चा तेल सस्ता होने के साथ-साथ डॉलर के मुक़ाबले रुपया मज़बूत हुआ है जिसके कारण हाल के दिनों में भारत में पेट्रोल-डीज़ल आम जनता को सस्ते में मिल रहा है।
 
इधर, घरेलू गैस यानि कि एलपीजी की क़ीमतों में एक बार फिर उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। सब्सिडी वाले रसाई गैस सिलेंडर की क़ीमत में 6.52 रुपये और बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की क़ीमत में 133 रुपये की कटौती की गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जून के बाद से रसोई गैस सिलेंडर की क़ीमतों में 6 बार वृद्धि की गई थी। नवम्बर के महीने में गैर सब्सि़डी सिलेंडर की क़ीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। इससे पहले सितम्बर के महीने में भी गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 59 रुपए और सब्सिडी वाले सिलेंडर की क़ीमत में 2.94 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। 
 
इससे पहले इसी साल अप्रैल महीने के दौरान बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत में कटौती देखने को मिली थी, जब इसके दाम में प्रति सिलेंडर 35 रूपए की कटौती की गई थी। इसके अलावा सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत में भी 1.74 रुपए की कटौती देखने को मिली थी।
 
इधर, सोने के भाव में भी कमी देखने में आ रही है। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने के ही भाव में गिरावट दर्ज की गई है। कल यानि कि शुक्रवार को सोने का भाव 65 रुपए गिरकर 31,475 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया, वहीं आज 75 रुपये और गिरकर सोने का भाव 31,400 रुपए प्रति दस ग्राम हो गया है। जानकारी के मुताबिक़, लोकल ज्वेलर्स की कम मांग से सोने के भाव में गिरावट आई है वहीं सोने के भाव पर डॉलर के मुक़ाबले मज़बूत रुपए का भी असर पड़ा है।
 
मज़बूत होते रुपये और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में कमी के कारण जहां पेट्रोल-डीज़ल सस्ता हुआ है, वहीं मज़बूत रुपये का असर सोने के दामों पर भी देखा जा सकता है। कारण कुछ भी हो, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस सिलेंडर और सोने के दाम कम होने का राजनीतिक लाभ भाजपा को राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। जब पेट्रोल-डीज़ल के दामों में वृद्धि हो रही थी तो विपक्ष ने इसे मोदी सरकार के ख़िलाफ़ हथियार बनाया था, अब जबकि इनके दामों में भारी कमी आई है, तो ऐसे में केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा इसे चुनाव में अपने हथियार बनाएगी। अब देखना होगा कि राजस्थान और तेलंगाना की जनता पर पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस सिलेंडर और सोने के सस्ते होने का कितना प्रभाव पड़ता है।