शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक पर सियासत ‘तेज़’!
Monday - December 3, 2018 3:02 pm ,
Category : WTN HINDI
5 दिसम्बर को शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक पर ‘बवाल’
बड़ा सवाल: शिवराज सिंह को जीत का आत्मविश्वास या फ़िर हार की चिंता?
DEC 03 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम 11 दिसम्बर का आएंगे जिस पर सभी की निकाहें टिकी हुईं हैं। मध्य प्रदेश में लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस के लिए आशा है इस बार सत्ता विरोधी लहर का उसे फ़ायदा मिलेगा, और 15 सालों के बाद उसकी सत्ता में वापसी होगी। वहीं इधर भाजपा को विश्वास है कि वो इस बार भी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगी, और लगातार चौथी बार कांग्रेस को शिकस्त देने में सफल होगी।
लेकिन इस सबके बीच, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच दिसम्बर को कैबिनेट की बैठक बुला ली है। यह बैठक मंत्रालय में सुबह 10:30 बजे प्रस्तावित है, और इसी प्रस्तावित बैठक को लेकर प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने सरकार के कैबिनेट की बैठक बुलाए जाने का जमकर विरोध किया है। कांग्रेस ने इसे ग़ैर ज़रूरी बताया है और इसकी शिकायत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव से करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामान्य तौर पर चुनाव के परिणाम आने के पहले सरकार कोई भी बड़ी बैठकें नहीं करती है। लेकिन मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री ने ना सिर्फ समीक्षा बैठक कर ली, बल्कि कैबिनेट की बैठक भी बुला ली। पांच दिसम्बर को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है। वैसे इस बैठक में कोई भी नीतिगत फ़ैसला तो नहीं लिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को आपत्ति है कि जब फिलहाल कोई ऐसा तात्कालिक मुद्दा नहीं है, तो आखिर क्यों कैबिनेट बैठक बुलानी पड़ी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के अनुसार, “चुनाव परिणाम आने से पहले कैबिनेट की बैठक बुलाना एक निहायत ही ग़ैर ज़रूरी फ़ैसला है।” वहीं अजय सिंह का कहना है, “मंत्रालय में मुख्यमंत्री ने शनिवार को जो बैठक की थी, उसकी भी कोई ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि आचार संहिता प्रभावी रहने तक कोई भी फ़ैसला चुनाव आयोग की अनुमति के बिना सरकार नहीं ले सकती है।” कांग्रेस का आरोप है कि कैबिनेट की प्रस्तावित बैठक एक प्रकार से प्रशासनिक मशीनरी को प्रभावित करने का प्रयास है, जो चुनाव आयोग के निर्देशों के ख़िलाफ़ है।
लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर क्यों शिवराज सिंह चौहान ने आचार संहिता लगी होने के बाद भी कैबिनेट की बैठक करने का फ़ैसला क्यों लिया। वैसे मुख्यमंत्री सिर्फ़ आपातकालीन विषय पर बैठक कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि अभी कोई ऐसा आपातकालीन मुद्दा ही नहीं है जिसके लिए कैबिनेट बैठक बुलाई गई है। इधर कांग्रेस ही नहीं, बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक का जमकर विरोध किया है। इधर मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिकड, शिवराज सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है, “जब भाजपा सरकार आ रही है तो कैबिनेट की बैठक बुलाने में क्या आपत्ति है।”
इस पूरे मामले में संविधान के जानकारों के मानना है कि मौजूदा सरकार चुनाव परिणाम आने से पहले कैबिनेट बैठक बुला सकती है और रूटीन फ़ैसले और कामकाज भी कर सकती है, लेकिन सरकार कोई नई नीति नहीं बना सकती है और ना ही नए नियम लागू कर सकती है। या फ़िर ऐसा कोई भी फ़ैसला नहीं ले सकती है जिसे सरकार परिवर्तन के बाद बदलने की ज़रूरत पड़े।
शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक का विपक्ष जमकर विरोध कर रहा है, तो वहीं सरकार का तर्क है कि नियमानुसार कैबिनेट बैठक आयोजित की जा सकती है। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर क्या कुछ इस कैबिनेट बैठक में होगा। क्योंकि सरकार आचार संहिता के कारण कोई भी फ़ैसला तो ले नहीं पाएगी और ना ही किसी भी नियम को लागू करा पाएगी। ऐसे में शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं कि सरकार की हार और जीत की सम्भावनाओं के बीच क्या औचित्य इस कैबिनेट बैठक का है।
हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान को जीत का आत्मविश्वास हो कि अगली सरकार के गठन से पहले पुरानी सभी साथियों के साथ एक कैबिनेट बैठक की जाए ताक़ि आगे यदि सरकार बन रही है तो उसकी रणनीति बनाई जाए। वहीं हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान को हार का भय हो, और इसी कारण उन्होंने कैबिनेट बैठक बुलाई है जिससे परिणाम के पहले कैबिनेट के सभी सहयोगी एक बार मिल लें। लेकिन जो भी हो, शिवराज सरकार की कैबिनेट बैठक पर सवाल उठना लाजिमी है।
DEC 03 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम 11 दिसम्बर का आएंगे जिस पर सभी की निकाहें टिकी हुईं हैं। मध्य प्रदेश में लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस के लिए आशा है इस बार सत्ता विरोधी लहर का उसे फ़ायदा मिलेगा, और 15 सालों के बाद उसकी सत्ता में वापसी होगी। वहीं इधर भाजपा को विश्वास है कि वो इस बार भी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगी, और लगातार चौथी बार कांग्रेस को शिकस्त देने में सफल होगी।
लेकिन इस सबके बीच, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच दिसम्बर को कैबिनेट की बैठक बुला ली है। यह बैठक मंत्रालय में सुबह 10:30 बजे प्रस्तावित है, और इसी प्रस्तावित बैठक को लेकर प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने सरकार के कैबिनेट की बैठक बुलाए जाने का जमकर विरोध किया है। कांग्रेस ने इसे ग़ैर ज़रूरी बताया है और इसकी शिकायत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव से करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामान्य तौर पर चुनाव के परिणाम आने के पहले सरकार कोई भी बड़ी बैठकें नहीं करती है। लेकिन मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री ने ना सिर्फ समीक्षा बैठक कर ली, बल्कि कैबिनेट की बैठक भी बुला ली। पांच दिसम्बर को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है। वैसे इस बैठक में कोई भी नीतिगत फ़ैसला तो नहीं लिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को आपत्ति है कि जब फिलहाल कोई ऐसा तात्कालिक मुद्दा नहीं है, तो आखिर क्यों कैबिनेट बैठक बुलानी पड़ी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के अनुसार, “चुनाव परिणाम आने से पहले कैबिनेट की बैठक बुलाना एक निहायत ही ग़ैर ज़रूरी फ़ैसला है।” वहीं अजय सिंह का कहना है, “मंत्रालय में मुख्यमंत्री ने शनिवार को जो बैठक की थी, उसकी भी कोई ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि आचार संहिता प्रभावी रहने तक कोई भी फ़ैसला चुनाव आयोग की अनुमति के बिना सरकार नहीं ले सकती है।” कांग्रेस का आरोप है कि कैबिनेट की प्रस्तावित बैठक एक प्रकार से प्रशासनिक मशीनरी को प्रभावित करने का प्रयास है, जो चुनाव आयोग के निर्देशों के ख़िलाफ़ है।
लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर क्यों शिवराज सिंह चौहान ने आचार संहिता लगी होने के बाद भी कैबिनेट की बैठक करने का फ़ैसला क्यों लिया। वैसे मुख्यमंत्री सिर्फ़ आपातकालीन विषय पर बैठक कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि अभी कोई ऐसा आपातकालीन मुद्दा ही नहीं है जिसके लिए कैबिनेट बैठक बुलाई गई है। इधर कांग्रेस ही नहीं, बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक का जमकर विरोध किया है। इधर मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिकड, शिवराज सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है, “जब भाजपा सरकार आ रही है तो कैबिनेट की बैठक बुलाने में क्या आपत्ति है।”
इस पूरे मामले में संविधान के जानकारों के मानना है कि मौजूदा सरकार चुनाव परिणाम आने से पहले कैबिनेट बैठक बुला सकती है और रूटीन फ़ैसले और कामकाज भी कर सकती है, लेकिन सरकार कोई नई नीति नहीं बना सकती है और ना ही नए नियम लागू कर सकती है। या फ़िर ऐसा कोई भी फ़ैसला नहीं ले सकती है जिसे सरकार परिवर्तन के बाद बदलने की ज़रूरत पड़े।
शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक का विपक्ष जमकर विरोध कर रहा है, तो वहीं सरकार का तर्क है कि नियमानुसार कैबिनेट बैठक आयोजित की जा सकती है। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर क्या कुछ इस कैबिनेट बैठक में होगा। क्योंकि सरकार आचार संहिता के कारण कोई भी फ़ैसला तो ले नहीं पाएगी और ना ही किसी भी नियम को लागू करा पाएगी। ऐसे में शिवराज सरकार की प्रस्तावित कैबिनेट बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं कि सरकार की हार और जीत की सम्भावनाओं के बीच क्या औचित्य इस कैबिनेट बैठक का है।
हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान को जीत का आत्मविश्वास हो कि अगली सरकार के गठन से पहले पुरानी सभी साथियों के साथ एक कैबिनेट बैठक की जाए ताक़ि आगे यदि सरकार बन रही है तो उसकी रणनीति बनाई जाए। वहीं हो सकता है कि शिवराज सिंह चौहान को हार का भय हो, और इसी कारण उन्होंने कैबिनेट बैठक बुलाई है जिससे परिणाम के पहले कैबिनेट के सभी सहयोगी एक बार मिल लें। लेकिन जो भी हो, शिवराज सरकार की कैबिनेट बैठक पर सवाल उठना लाजिमी है।