डिजिटल इण्डिया की तरफ़ मोदी सरकार का एक ‘नया कदम’!
Monday - December 3, 2018 4:24 pm ,
Category : WTN HINDI
क्यूआर कोड के कारण ड्राइविंग लाइसेंस में होगा ‘ऐतिहासिक परिवर्तन’!
जल्द ही ड्राइविंग लाइसेंस से मिलेगी वाहन चालक और वाहन की ‘अपडेटेट जानकारी’
DEC 03 (WTN) – डिजिटल इण्डिया मुहिम कहिये या फ़िर ड्राइविंग लाइसेंस को आधुनिक बनाने की कवायद, सरकार आपके ड्राइविंग लाइसेंस को अब डिजिटल बनाने की कोशिश कर रही है। इस समय आपके पास जो ड्राइविंग लाइसेंस है वो जल्द ही बेकार होने वाला है! आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार फिलहाल इस्तेमाल हो रहे लेमिनेटेड ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल बंद करने जा रही है और इसकी जगह पर नए क्यूआर कोड अंकित ड्राइविंग लाइसेंस जारी किये जाने की योजना है।
केन्द्र सरकार का तर्क है कि क्यूआर कोडेड ड्राइविंग लाइसेंस होने से गाड़ी और लाइसेंस धारक की सारी जानकारी ना केवल ड्राइविंग लाइसेंस में स्टोर होगी ही, बल्कि इसके साथ ही प्रदूषण और इंश्योरेंस डिटेल्स भी उसमें अपडेटे हो जाएंगी। यानि कि अब क्यूआर कोड से वाहन चालकों के साथ-साथ वाहन की पूरी जानकारी भी केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित होगी। जब भी ट्रेफिक पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस पर अंकित क्यूआर कोड को स्कैन करेगी, स्कैन करते ही वाहन चालक की सारी जानकारी स्मार्टफोन पर आ जाएगी। इससे यह फ़ायदा होगी यदि किसी ने काग़ज़ातों में गड़बड़ी की है तो उसकी तुरंत ही जानकारी हासिल हो जाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों को मसौदा प्रस्ताव भेजा है कि नए ड्राइविंग लाइसेंस पॉलीकार्बोनेट से बने हों, और फिलहाल इस्तेमाल हो रहे लेमिनेटेड ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल बंद किया जाए। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मसौदे का मुख्य बिंदु यही है कि लाइसेंस में हाई सिक्योरिटी क्यूआर कोड यानी क्विक रेस्पॉन्स कोड लगाने की व्यवस्था की जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाहन चालक जब अपनी गाड़ी का प्रदूषण सर्टिफिकेट रिन्यू कराने जाएंगे, तो वहां बैठा ऑपरेटर लाइसेंस लेकर क्यूआर कोड अपडेट कर देगा, जिसमें प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर उसकी समाप्ति की तारीख की पूरी जानकारी होगी। यह पूरी जानकारी केन्द्रीय डेटाबेस सेन्टर में अपडेट हो जाएगी, और कोई भी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी क्यूआर कोड को डिकोड करते वाहन और वाहन चालक के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेगा।
इतना ही नहीं, जब वाहन का बीमा रिन्यू करवाया जाएगा तो उसकी पूरी जानकारी भी क्यूआर कोड के जडरिए डेटाबेस में अपडेट हो जाएगी। क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस से सहुलियत तो बहुत है, लेकिन इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सिस्टम में कई बदलाव करने होंगे। क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए राज्यों को बाक़ायदा वक़्त दिया गया है। कहा जा रहा है कि इस नई योजना को राज्य सरकारें जल्द ही मंजूरी दे देंगी और इस पर काम शुरू हो जाएगा।
सरकार की इस नई योजना के कई फायदे शुरू में दिखाई दे रहे हैं। वाहन से सम्बन्धित काग़ज़ातों में जो भी परिवर्तन होंगे, उसकी पूरी जानकारी अपडेट होती रहेगी और क्यूआर कोड के ज़रिये उसे पता किया जा सकेगा। इससे यह फ़ायदा होगा कि वाहन चालक को अपने काग़ज़ातों को साथ लेकर चलना ज़रूरी नहीं होगा और उसकी परेशानी दूर होगी। आशा कि जानी चाहिए कि केन्द्र सरकार के इस नये फ़ैसले का समर्थन राज्यों द्वारा भी किया जाएगा और देश में जल्द ही आधुनिक क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस जारी होंगे।
DEC 03 (WTN) – डिजिटल इण्डिया मुहिम कहिये या फ़िर ड्राइविंग लाइसेंस को आधुनिक बनाने की कवायद, सरकार आपके ड्राइविंग लाइसेंस को अब डिजिटल बनाने की कोशिश कर रही है। इस समय आपके पास जो ड्राइविंग लाइसेंस है वो जल्द ही बेकार होने वाला है! आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार फिलहाल इस्तेमाल हो रहे लेमिनेटेड ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल बंद करने जा रही है और इसकी जगह पर नए क्यूआर कोड अंकित ड्राइविंग लाइसेंस जारी किये जाने की योजना है।
केन्द्र सरकार का तर्क है कि क्यूआर कोडेड ड्राइविंग लाइसेंस होने से गाड़ी और लाइसेंस धारक की सारी जानकारी ना केवल ड्राइविंग लाइसेंस में स्टोर होगी ही, बल्कि इसके साथ ही प्रदूषण और इंश्योरेंस डिटेल्स भी उसमें अपडेटे हो जाएंगी। यानि कि अब क्यूआर कोड से वाहन चालकों के साथ-साथ वाहन की पूरी जानकारी भी केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित होगी। जब भी ट्रेफिक पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस पर अंकित क्यूआर कोड को स्कैन करेगी, स्कैन करते ही वाहन चालक की सारी जानकारी स्मार्टफोन पर आ जाएगी। इससे यह फ़ायदा होगी यदि किसी ने काग़ज़ातों में गड़बड़ी की है तो उसकी तुरंत ही जानकारी हासिल हो जाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों को मसौदा प्रस्ताव भेजा है कि नए ड्राइविंग लाइसेंस पॉलीकार्बोनेट से बने हों, और फिलहाल इस्तेमाल हो रहे लेमिनेटेड ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल बंद किया जाए। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मसौदे का मुख्य बिंदु यही है कि लाइसेंस में हाई सिक्योरिटी क्यूआर कोड यानी क्विक रेस्पॉन्स कोड लगाने की व्यवस्था की जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाहन चालक जब अपनी गाड़ी का प्रदूषण सर्टिफिकेट रिन्यू कराने जाएंगे, तो वहां बैठा ऑपरेटर लाइसेंस लेकर क्यूआर कोड अपडेट कर देगा, जिसमें प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर उसकी समाप्ति की तारीख की पूरी जानकारी होगी। यह पूरी जानकारी केन्द्रीय डेटाबेस सेन्टर में अपडेट हो जाएगी, और कोई भी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी क्यूआर कोड को डिकोड करते वाहन और वाहन चालक के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेगा।
इतना ही नहीं, जब वाहन का बीमा रिन्यू करवाया जाएगा तो उसकी पूरी जानकारी भी क्यूआर कोड के जडरिए डेटाबेस में अपडेट हो जाएगी। क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस से सहुलियत तो बहुत है, लेकिन इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सिस्टम में कई बदलाव करने होंगे। क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए राज्यों को बाक़ायदा वक़्त दिया गया है। कहा जा रहा है कि इस नई योजना को राज्य सरकारें जल्द ही मंजूरी दे देंगी और इस पर काम शुरू हो जाएगा।
सरकार की इस नई योजना के कई फायदे शुरू में दिखाई दे रहे हैं। वाहन से सम्बन्धित काग़ज़ातों में जो भी परिवर्तन होंगे, उसकी पूरी जानकारी अपडेट होती रहेगी और क्यूआर कोड के ज़रिये उसे पता किया जा सकेगा। इससे यह फ़ायदा होगा कि वाहन चालक को अपने काग़ज़ातों को साथ लेकर चलना ज़रूरी नहीं होगा और उसकी परेशानी दूर होगी। आशा कि जानी चाहिए कि केन्द्र सरकार के इस नये फ़ैसले का समर्थन राज्यों द्वारा भी किया जाएगा और देश में जल्द ही आधुनिक क्यूआर कोड वाले ड्राइविंग लाइसेंस जारी होंगे।