मध्य प्रदेश में ‘नये जनादेश’ से पहले भाजपा सरकार लेगी कर्ज, कांग्रेस ने किया ‘विरोध’
Wednesday - December 5, 2018 10:21 am ,
Category : WTN HINDI
शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव में जीत का ‘आत्मविश्वास’
चुनाव परिणाम से पहले मध्य प्रदेश सरकार लेगी 800 करोड़ रुपये का कर्ज, कांग्रेस ने साधा ‘निशाना’
DEC 05 (WTN) – 11 दिसम्बर को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने हैं, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं और सभी यह जानना चाहते हैं कि क्या भाजपा लगातार चौथी बार जीत हासिल करेगी, या फ़िर कांग्रेस 15 सालों के बाद सत्ता में वापसी करेगी? लेकिन चुनाव परिणाम से आने से पहले मध्य प्रदेश में कर्जे को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। दरअसल राज्य सरकार 800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य पर पहले से ही पौने दो लाख करोड़ का कर्ज है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, अधूरे पड़े कामों के पूरा कराने के लिए राज्य की भाजपा सरकार 800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 800 करोड़ रुपये का यह कर्ज 8.44 प्रतिशत ब्याज पर दस सालों के लिए होगा। कर्ज लेने के लिए वित्त विभाग ने बाकायदा रिज़र्व बैंक से अनुमति मांगी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोई भी राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से मिली अनुमति के बाद एक वित्तीय वर्ष में अपनी जीडीपी का 3.5 प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है। यदि मध्य प्रदेश की बात करें, तो 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 के मध्य, मध्य प्रदेश सरकार क़रीब 24 हज़ार करोड़ रुपए तक कर्ज ले सकती है।
इस वित्तीय वर्ष की बात करें, तो 1 अप्रैल 2018 के बाद से अब तक राज्य सरकार 12,500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। यदि 800 करोड़ रुपए के इस कर्ज को भी मिला लाए जाए, तो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में लिया जाना कर्ज 13,300 करोड़ रुपए हो जाएगा। इधर कांग्रेस कर्ज लेने की सरकार की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रही है, लेकिन कर्ज लेने की प्रक्रिया को वित्त विभाग एक रूटीन प्रक्रिया बता रहा है।
इधर कांग्रेस ने राज्य सरकार के कर्ज लेने पर सवाल खड़े किये हैं। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर ऐसी क्या ज़रूरत पड़ गई कि नई सरकार के गठन होने से पहले ही सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है, क्या छह-सात दिन इंतज़ार नहीं किया जा सकता था।
इधर इस बारे में भाजपा का कहना है कि राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर यह कर्ज लिया जा रहा है। राज्य की भाजपा सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग के लिए काम करना रहा है, और लगातार काम किया जा रहा है। इस बारे में कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि यह सरकार जाते-जाते राज्य को और कर्जदार बनाने पर तुली है। कुछ ही दिनों बाद नया जनादेश आने वाला है, तो ऐसे में कर्ज लेने का औचित्य नहीं बनता।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिवराज कैबिनेट बैठक पर भी कांग्रेस सवाल उठा चुकी है और अब 800 करोड़ का कर्ज लेने की राज्य सरकार की तैयारी को कांग्रेस ने जनादेश का अपमान बताया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य की शिवराज सरकार नया जनादेश आने तक कर्ज लेने के फ़ैसले को टाल नहीं सकती थी। यदि चुनाव नतीजे के बाद भाजपा की हार हुई और कांग्रेस की जीत हुई, तो ऐसे में कुछ ही दिनों पहले लिये गये कर्ज का बोझ नई सरकार पर होगा जो उसने नहीं लिया है।
कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह को पूरा आत्मविश्वास है कि राज्य में फ़िर से भाजपा की जीत होगी और उसकी सरकार बनेगी। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान पूरे आत्मविश्वास के साथ ऐसे फ़ैसले ले रहे हैं जो दिखाता है कि उनमें जीत का काफ़ी आत्मविश्वास है। चाहे कैबिनेट की बैठक का निर्णय हो या फ़िर 800 करोड़ रुपये के कर्ज लेने का, दोनों ही मामलों में साफ़ ज़ाहिर होता है कि शिवराज सिंह चौहान पूरे आत्मविश्वास में हैं कि भाजपा की जीत हो रही है। अब देखना होगा कि शिवराज सिंह चौहान का आत्मविश्वास कितना सही साबित हो पाता है।
DEC 05 (WTN) – 11 दिसम्बर को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने हैं, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं और सभी यह जानना चाहते हैं कि क्या भाजपा लगातार चौथी बार जीत हासिल करेगी, या फ़िर कांग्रेस 15 सालों के बाद सत्ता में वापसी करेगी? लेकिन चुनाव परिणाम से आने से पहले मध्य प्रदेश में कर्जे को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। दरअसल राज्य सरकार 800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य पर पहले से ही पौने दो लाख करोड़ का कर्ज है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, अधूरे पड़े कामों के पूरा कराने के लिए राज्य की भाजपा सरकार 800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 800 करोड़ रुपये का यह कर्ज 8.44 प्रतिशत ब्याज पर दस सालों के लिए होगा। कर्ज लेने के लिए वित्त विभाग ने बाकायदा रिज़र्व बैंक से अनुमति मांगी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोई भी राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से मिली अनुमति के बाद एक वित्तीय वर्ष में अपनी जीडीपी का 3.5 प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है। यदि मध्य प्रदेश की बात करें, तो 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 के मध्य, मध्य प्रदेश सरकार क़रीब 24 हज़ार करोड़ रुपए तक कर्ज ले सकती है।
इस वित्तीय वर्ष की बात करें, तो 1 अप्रैल 2018 के बाद से अब तक राज्य सरकार 12,500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। यदि 800 करोड़ रुपए के इस कर्ज को भी मिला लाए जाए, तो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में लिया जाना कर्ज 13,300 करोड़ रुपए हो जाएगा। इधर कांग्रेस कर्ज लेने की सरकार की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रही है, लेकिन कर्ज लेने की प्रक्रिया को वित्त विभाग एक रूटीन प्रक्रिया बता रहा है।
इधर कांग्रेस ने राज्य सरकार के कर्ज लेने पर सवाल खड़े किये हैं। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर ऐसी क्या ज़रूरत पड़ गई कि नई सरकार के गठन होने से पहले ही सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है, क्या छह-सात दिन इंतज़ार नहीं किया जा सकता था।
इधर इस बारे में भाजपा का कहना है कि राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर यह कर्ज लिया जा रहा है। राज्य की भाजपा सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग के लिए काम करना रहा है, और लगातार काम किया जा रहा है। इस बारे में कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि यह सरकार जाते-जाते राज्य को और कर्जदार बनाने पर तुली है। कुछ ही दिनों बाद नया जनादेश आने वाला है, तो ऐसे में कर्ज लेने का औचित्य नहीं बनता।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिवराज कैबिनेट बैठक पर भी कांग्रेस सवाल उठा चुकी है और अब 800 करोड़ का कर्ज लेने की राज्य सरकार की तैयारी को कांग्रेस ने जनादेश का अपमान बताया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य की शिवराज सरकार नया जनादेश आने तक कर्ज लेने के फ़ैसले को टाल नहीं सकती थी। यदि चुनाव नतीजे के बाद भाजपा की हार हुई और कांग्रेस की जीत हुई, तो ऐसे में कुछ ही दिनों पहले लिये गये कर्ज का बोझ नई सरकार पर होगा जो उसने नहीं लिया है।
कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह को पूरा आत्मविश्वास है कि राज्य में फ़िर से भाजपा की जीत होगी और उसकी सरकार बनेगी। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान पूरे आत्मविश्वास के साथ ऐसे फ़ैसले ले रहे हैं जो दिखाता है कि उनमें जीत का काफ़ी आत्मविश्वास है। चाहे कैबिनेट की बैठक का निर्णय हो या फ़िर 800 करोड़ रुपये के कर्ज लेने का, दोनों ही मामलों में साफ़ ज़ाहिर होता है कि शिवराज सिंह चौहान पूरे आत्मविश्वास में हैं कि भाजपा की जीत हो रही है। अब देखना होगा कि शिवराज सिंह चौहान का आत्मविश्वास कितना सही साबित हो पाता है।