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‘अन्याय’ और ‘अत्याचार’ के ख़िलाफ़ फ़िर उठी पाकिस्तान में ‘आवाज़’

Wednesday - December 5, 2018 12:15 pm , Category : WTN HINDI
पाकिस्तान सरकार और सेना के ‘विरोध’ में उठे हज़ारों हाथ (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान सरकार और सेना के ‘विरोध’ में उठे हज़ारों हाथ (फ़ाइल फ़ोटो)

गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान की ‘कुटिल नज़र’, घोषित कर सकता है अपना पांचवां प्रांत

DEC 05 (WTN) – पूरी दुनिया में आतंक के आका के रूप में कुख्यात पाकिस्तान अपने यहां रह रहे लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने में असफल साबित हो रहा है। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की सेना किस तरह से अपने नागरिकों पर बलूचिस्तान में अत्याचार कर रही है। बलूचिस्तान ही नहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में भी पाकिस्तान सरकार और सेना लगातार वहां रहने वाले लोगों पर अन्याय और अत्याचार कर रही है। इसी के ख़िलाफ़ गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा इलाके में भारी संख्या में लोगों ने मूलभूत और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ रैली निकाली।
 
पूरी दुनिया के सामने भारत सरकार ने पाकिस्तान को बेनकाब किया हुआ है कि किस तरह से पाकिस्तान सरकार कश्मीर में आतंक को बढ़ावा दे रही है। लेकिन इतना होने के बाद भी पाकिस्तान आतंक को बढ़ावा देने से बाज नहीं आ रहा है, जबकि उसके देश में गिलगित-बाल्टिस्तान में रहने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे हैं। पाकिस्तान सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियों से तंग आकर गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने सरकरा और सेना के विरोध में जमकर नारेबाजी की और अपने हक़ और आज़ादी की मांग की।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ जम्मू कश्मीर का भू-भाग ही नहीं, बल्कि गिलगित-बाल्टिस्तान का मुद्दा भी काफी संवेदनशील है। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना-अपना हिस्सा बताते हैं। हालांकि जब भी इस क्षेत्र में प्रदर्शन होता है, तो स्थानीय लोग पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ही हमेशा नारेबाज़ी करते हुए नज़र आते हैं।
 
पाकिस्तान के कब्जे वाला यह इलाक़ा काफ़ी समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। अप्रैल 1949 तक गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा माना जाता रहा। लेकिन 28 अप्रैल 1949 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार के बीच कराची समझौता हुआ, जिसके तहत गिलगित के मामलों को सीधे पाकिस्तान की केंद्र सरकार के अधीन कर दिया गया। लेकिन इसमें  पाकिस्तान ने चालाकी दिखाई और इस समझौते में इस इलाके के किसी भी नेता को शामिल ही नहीं किया।
 
आपको बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने इस इलाके पर अपना अधिकार जताने के लिए नई चाल चली है। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में चार प्रांत हैं। अब पाकिस्तान इस क्षेत्र को अपना पांचवां प्रांत घोषित करना चाहता है। इसी का विरोध यहां के लोग कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र मामले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने औपचारिक बैठक बुलाई थी।
 
वर्तमान समय में पाकिस्तान सरकार की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के लीगल स्टेटस की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित की गई है। ऐसा माना जा रहा है कि लीगल स्टेटस की समीक्षा होने के बाद पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत घोषित कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो कहा जा रहा है कि इस क्षेत्र में काफ़ी तेज़ विरोध प्रदर्शन होगा और इसे बर्बरतापूर्वक दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार अपनी सेना तक का इस्तेमाल कर सकती है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदर्शनकारी पाकिस्तान से सरकार से मांग कर रहे हैं कि पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान से सुरक्षा बलों को हटाया जाए और वहां रहने वाले लोगों को बुनियादी और संवैधानिक अधिकार मिले। पूरी दुनिया जानता ही कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकारें सिर्फ़ दुनिया को धोखे में रखने के लिए है, बाक़ी पाकिस्तान में कोई भी सरकार हो उस पर सेना का ही दबदबा रहता है।
 
पाकिस्तान की सेना के कारण ही पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों पर सालों से अत्याचार होते आएं हैं। ऐसे में अब जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान से अन्याय और अत्याचार के ख़िलाफ़ विरोध की आवाज़ उठी है, तो आशंका है कि इस आवाज़ को दबाने की पूरी कोशिश पाकिस्तान की सेना करेगी और इसके लिए पाकिस्तान सेना किसी भी तरह की क्रूरता कर सकती है।