कमल चावला: क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और खिलाड़ियों को कवरेज दे मीडिया
Saturday - December 8, 2018 11:17 am ,
Category : WTN HINDI
राजनीति में आकर खेलों की बेहतरी के लिए काम करें खिलाड़ी – कमल चावला
अर्जुन अवॉर्ड की राजनीति पर कमल चावला का बयान, कहा किकेटरों के अलावा अन्य खिलाड़ियों के विश्वस्तरीय प्रदर्शन का भी हो निष्पक्ष आंकलन
DEC 08 (WTN) – मीडिया को क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और खिलाड़ियों की तरफ़ भी बराबर का ध्यान देना चाहिए, ताक़ि बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को भी बढ़ावा मिल सके। यह कहना है विश्व प्रसिद्ध स्नूकर खिलाड़ी और पीपुल्स यूनिवर्सिटी के ब्रांड एम्बेस्डर कमल चावला का। 8 अंतर्राष्ट्रीय और 11 राष्ट्रीय पदक विजेता और विश्व के नम्बर दो स्नूकर खिलाड़ी कमल चावला का मानना है कि मीडिया को तटस्थता दिखाते हुए क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों की कवरेज करना चाहिए और उनकी उपलब्धियां जनता तक पहुंचानी चाहिए। अर्जुन पुरस्कार, खेल संघ और कई मुद्दों पर WTN ने ख़ास बात की कमल चावला से।
WTN: आपको नहीं लगता कि देश में क्रिकेट के अलावा बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को वो मान-सम्मान नहीं मिल पाता जिसके वे हक़दार हैं, आख़िर इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है?
कमल चावला: जी, आपने सही कहा के देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और खिलाड़ियों को उतनी तरजीह नहीं दी जाती है जिसके कि वे हक़दार हैं। मेरा क्रिकेट या क्रिकेट खिलाड़ियों से कोई विरोध नहीं है, वे देश के लिए खेल रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं, पोडियम पर तिरंगा लहराए इसके लिए दिन रात जी जान से मेहनत करते हैं, तो ऐसे में मीडिया को अपना रोल बेहतर तरीक़े से निभाना चाहिए और बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को भी कवरेज देना चाहिए, ताक़ि देश के लोगों को उनकी उपलब्धि के बारे में जानकारी मिल सके और साथ ही खिलाड़ियों का उत्साह बढ़े। मीडिया तटस्थता के साथ अन्य खेलों के बारे में भी बताए, जिससे देश के लोगों को पता तो लगे कि क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेलों में देश के खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
WTN: आप चार बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुए हैं, लेकिन आपको अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिल सका। क्या आपको लगता है अर्जुन अवॉर्ड के लिए क्रिकेटरों को ज़्यादा महत्व दिया जाता है, तुलना में बाक़ी खिलाड़ियों के?
कमल चावला: देखिए मेरा मानना है कि क्रिकेट खिलाड़ी हों या फ़िर अन्य खेलों के खिलाड़ी, सभी के लक्ष्य होता है बेहतरीन प्रदर्शन करना और देश को जीत या पदक दिलाना। लेकिन क्रिकेट सीमित देशों में खेला जाता है जबकि बाक़ी खेल कई देशों में खेले जाते हैं। उदाहरण के तौर पर स्कूनर में ही दुनिया के 50 से 60 देशों के नामी खिलाड़ी अपना दमखम दिखाते हैं, ऐसे में वहां से पदक जीतकर लाना अपने आप में काफ़ी चुनौतीपूर्ण काम है। मुझे लगता है कि अर्जुन अवॉर्ड के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन में यह भी देखना चाहिए कि खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किन किन देशों के ख़िलाफ़ किया है, फ़िर उसी आधार पर अवॉर्ड दिये जाने चाहिए।
WTN: भारत में खेलों संघों पर राजनेताओं को कब्जा है, जबकि अन्य देशों में खेल संघों पर खिलाड़ियों का नियंत्रण होता है, क्या आपको नहीं लगता कि भारत में भी खेल संघों पर राजनेताओं की बजाय खिलाड़ियों का नियंत्रण होना चाहिए?
कमल चावला: इस मामले में मेरी राय है कि खेल संघों में दो पद होना चाहिए, जिसमें एक पद राजनेता या आईएएस अधिकारियों के पास रहे, ताक़ि वे खिलाड़ियों के लिए प्रायोजक ढूंढ सकें और उनके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करा सकें, वहीं एक पद खिलाड़ियों के लिए भी होना चाहिए। जो खिलाड़ियों को कोचिंग और उनकी ज़रूरतों की तरफ़ ध्यान दे सके और उनमें आत्मविश्वास भर सके।
WTN: सिडनी ओलम्पिक में रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर देश के खेल मंत्री हैं। क्या आपको लगता है कि खेलों की भलाई के लिए खिलाड़ियों को राजनीति में आना चाहिए?
कमल चावला: बिल्कुल, मेरा मानना है कि भारत में खेलों की भलाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को राजनीति में आना चाहिए और खेलों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। मेरी राज्यवर्धन सिंह राठौर से मुलाक़ात हुई थी और मैं उनसे काफ़ी प्रभावित हूं, क्योंकि जिस तरह से खेलों के लिए वे काम कर रहे हैं वह सराहनीय है।
WTN: आख़िरी सवाल आपसे, आपकी आदर्श खिलाड़ी कौन रहे हैं? और युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे आप।
कमल चावला: जहां तक मेरे आदर्श खिलाड़ी की बात है, तो विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी गीत सेठी मेरे आदर्श हैं और उनसे बहुत कुछ मैंने सीखा है और उन्हीं की तरह मैं भी देश का नाम रोशन करना चाहता हूं। वहीं महान फुटबॉल खिलाड़ी पेले के संघर्ष से भी मुझे काफ़ी प्रेरणा मिलती है कि किस तरह से विपरीत परिस्थितियों में भी हौंसला रखकर जीत हासिल की जा सकती है। वहीं मेरा युवाओं के लिए संदेश है कि खेलों का जीवन में बहुत महत्वपूर्ण रोल है। खेलों से शारीरिक विकास तो होता ही है, साथ ही हम खेलों से अनुशासन सीखते हैं जो कि हर किसी के लिए ज़रूरी है।
DEC 08 (WTN) – मीडिया को क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और खिलाड़ियों की तरफ़ भी बराबर का ध्यान देना चाहिए, ताक़ि बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को भी बढ़ावा मिल सके। यह कहना है विश्व प्रसिद्ध स्नूकर खिलाड़ी और पीपुल्स यूनिवर्सिटी के ब्रांड एम्बेस्डर कमल चावला का। 8 अंतर्राष्ट्रीय और 11 राष्ट्रीय पदक विजेता और विश्व के नम्बर दो स्नूकर खिलाड़ी कमल चावला का मानना है कि मीडिया को तटस्थता दिखाते हुए क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों की कवरेज करना चाहिए और उनकी उपलब्धियां जनता तक पहुंचानी चाहिए। अर्जुन पुरस्कार, खेल संघ और कई मुद्दों पर WTN ने ख़ास बात की कमल चावला से।
WTN: आपको नहीं लगता कि देश में क्रिकेट के अलावा बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को वो मान-सम्मान नहीं मिल पाता जिसके वे हक़दार हैं, आख़िर इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है?
कमल चावला: जी, आपने सही कहा के देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और खिलाड़ियों को उतनी तरजीह नहीं दी जाती है जिसके कि वे हक़दार हैं। मेरा क्रिकेट या क्रिकेट खिलाड़ियों से कोई विरोध नहीं है, वे देश के लिए खेल रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं, पोडियम पर तिरंगा लहराए इसके लिए दिन रात जी जान से मेहनत करते हैं, तो ऐसे में मीडिया को अपना रोल बेहतर तरीक़े से निभाना चाहिए और बाक़ी खेलों और खिलाड़ियों को भी कवरेज देना चाहिए, ताक़ि देश के लोगों को उनकी उपलब्धि के बारे में जानकारी मिल सके और साथ ही खिलाड़ियों का उत्साह बढ़े। मीडिया तटस्थता के साथ अन्य खेलों के बारे में भी बताए, जिससे देश के लोगों को पता तो लगे कि क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेलों में देश के खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
WTN: आप चार बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुए हैं, लेकिन आपको अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिल सका। क्या आपको लगता है अर्जुन अवॉर्ड के लिए क्रिकेटरों को ज़्यादा महत्व दिया जाता है, तुलना में बाक़ी खिलाड़ियों के?
कमल चावला: देखिए मेरा मानना है कि क्रिकेट खिलाड़ी हों या फ़िर अन्य खेलों के खिलाड़ी, सभी के लक्ष्य होता है बेहतरीन प्रदर्शन करना और देश को जीत या पदक दिलाना। लेकिन क्रिकेट सीमित देशों में खेला जाता है जबकि बाक़ी खेल कई देशों में खेले जाते हैं। उदाहरण के तौर पर स्कूनर में ही दुनिया के 50 से 60 देशों के नामी खिलाड़ी अपना दमखम दिखाते हैं, ऐसे में वहां से पदक जीतकर लाना अपने आप में काफ़ी चुनौतीपूर्ण काम है। मुझे लगता है कि अर्जुन अवॉर्ड के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन में यह भी देखना चाहिए कि खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किन किन देशों के ख़िलाफ़ किया है, फ़िर उसी आधार पर अवॉर्ड दिये जाने चाहिए।
WTN: भारत में खेलों संघों पर राजनेताओं को कब्जा है, जबकि अन्य देशों में खेल संघों पर खिलाड़ियों का नियंत्रण होता है, क्या आपको नहीं लगता कि भारत में भी खेल संघों पर राजनेताओं की बजाय खिलाड़ियों का नियंत्रण होना चाहिए?
कमल चावला: इस मामले में मेरी राय है कि खेल संघों में दो पद होना चाहिए, जिसमें एक पद राजनेता या आईएएस अधिकारियों के पास रहे, ताक़ि वे खिलाड़ियों के लिए प्रायोजक ढूंढ सकें और उनके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करा सकें, वहीं एक पद खिलाड़ियों के लिए भी होना चाहिए। जो खिलाड़ियों को कोचिंग और उनकी ज़रूरतों की तरफ़ ध्यान दे सके और उनमें आत्मविश्वास भर सके।
WTN: सिडनी ओलम्पिक में रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर देश के खेल मंत्री हैं। क्या आपको लगता है कि खेलों की भलाई के लिए खिलाड़ियों को राजनीति में आना चाहिए?
कमल चावला: बिल्कुल, मेरा मानना है कि भारत में खेलों की भलाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को राजनीति में आना चाहिए और खेलों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। मेरी राज्यवर्धन सिंह राठौर से मुलाक़ात हुई थी और मैं उनसे काफ़ी प्रभावित हूं, क्योंकि जिस तरह से खेलों के लिए वे काम कर रहे हैं वह सराहनीय है।
WTN: आख़िरी सवाल आपसे, आपकी आदर्श खिलाड़ी कौन रहे हैं? और युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे आप।
कमल चावला: जहां तक मेरे आदर्श खिलाड़ी की बात है, तो विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी गीत सेठी मेरे आदर्श हैं और उनसे बहुत कुछ मैंने सीखा है और उन्हीं की तरह मैं भी देश का नाम रोशन करना चाहता हूं। वहीं महान फुटबॉल खिलाड़ी पेले के संघर्ष से भी मुझे काफ़ी प्रेरणा मिलती है कि किस तरह से विपरीत परिस्थितियों में भी हौंसला रखकर जीत हासिल की जा सकती है। वहीं मेरा युवाओं के लिए संदेश है कि खेलों का जीवन में बहुत महत्वपूर्ण रोल है। खेलों से शारीरिक विकास तो होता ही है, साथ ही हम खेलों से अनुशासन सीखते हैं जो कि हर किसी के लिए ज़रूरी है।