कुण्डली में नीच स्थान पर होने से परेशानी देते हैं बुध, बृहस्पति और शुक्र
Monday - December 10, 2018 1:06 pm ,
Category : WTN HINDI
कुण्डली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर है जातक की खुशियां
जीवन में सम्पन्नता प्रदान करते हैं कुण्डली में उच्च स्थान पर बैठे बुध, बृहस्पति और शुक्र
DEC 10 (WTN) – आज हम आपको बताते हैं कि कुण्डली में बुध, बृहस्पति और शुक्र ग्रहों के नीच और उच्च का होने से क्या लाभ और क्या नुकसान हैं। साथ ही हम आपको वो उपाय बताते हैं, जिसके ज़रिये आप ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पा सकते हैं।
बुध
जब कुण्डली में स्थित बुध ग्रह शुभ फल देता है, तो जातक को कम मेहनत के बाद भी ज़्यादा इनकम होता ही। साथ ही जिसकी कुण्डली में बुध उच्च है, उसकी बहन, बुआ और बेटी का जीवन अच्छे से व्यतीत होता है और सभी में आपसी प्रेम बना रहता है। बुध के शुभ फल देने से सम्बन्धित व्यक्ति बुद्धिमान होता है और बुद्धि के कारण व्यापार और नौकरी में उन्नति करता है, साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी काफ़ी आगे बढ़ता है।
परंतु यदि कुण्डली में बुध ग्रह नीच का यानि अशुभ फल दे रहा है, तो हमेशा बहन, बुआ और बेटी का सम्मान करें। जब भी यह घर में आएं, तो उन्हें कुछ ना कुछ देकर ही विदा करें। ज्योतिष की सलाह कि बुध के बुरे प्रभाव को निष्क्रिय करने के लिए घर में गाने बजाने का सामान ना रखें। घर में भगवान की मूर्ति रखने के बजाए उनकी तस्वीर की पूजा करें और पक्षियों को ना पालें। साथ ही शुद्ध शाकाहारी जीवन व्यतीत करें। छोटी कन्याओं के पूजन करने से भी बुध मजबूत होता है।
बृहस्पति
जब कुण्डली में बृहस्पति उच्च अवस्था का हो, तो वह सुख और सम्पन्नता देता है। कुण्डली में उच्च का बृहस्पति होने से सम्बन्धित जातक को अपने दादाजी से बहुत प्रेम और स्नेह मिलता है। बृहस्पति के शुभ प्रभाव से परिवार में बड़ों का सम्मान होता है और घर का माहौल धार्मिक और आध्यात्मिक रहता है। देखा गया है कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति के जीवन में पढ़ाई को लेकर कोई परेशानी उत्पन्न नहीं होती है।
लेकिन यदि कुण्डली में बृहस्पति नीच का है, तो उसके अशुभ होने से पढ़ाई में रूकावट पैदा होती है और घर में बड़े बुजुर्गों का सुख नहीं रहता है। बृहस्पति के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए बुजुर्गों का सम्मान करने के साथ-साथ साधु-सन्यासियों को भी मान-सम्मान दें। पीपल के पेड़ को पानी देने और मन्दिर में चने की दाल का दान करने से गुरु मजबूत बोता है। गले में सोने की चेन पहनने और दान करने से बृहस्पति प्रसन्न होते हैं।
शुक्र
कुण्डली में जब शुक्र जब उच्च स्थिति में होता है, तो सम्बन्धित व्यक्ति सुन्दर होता है और उसमें उत्साह और उमंग होता है। शुक्र के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को सैक्स में सम्पूर्ण सुख प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन सुखपूर्वक रहता है। शुक्र की स्थिति कुण्डली में मजबूत होने से जातक को घूमने-फिरने का शौक होता है, साथ ही वो साफ-सुथरे और सुन्दर घर का मालिक होता है।
लेकिन यदि कुण्डली में शुक्र कमजोर है, तो जातक को सुबह सही समय पर उठना चाहिए और घर के साथ-साथ खुद की भी साफ़ सफाई रखना चाहिए। शुक्र को प्रसन्न रखने के लिए पत्नी का सम्मान करें और उसे सौंदर्य प्रसाधन उपहार में दें। कुण्डली में शुक्र ग्रह के नीच होने पर सम्बन्धित व्यक्ति को मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए और गाय की सेवा करना चाहिए, साथ ही जातक यथासम्भव कोशिश करे कि वो काले और नीले रंग के वस्त्रों को ना पहने।
DEC 10 (WTN) – आज हम आपको बताते हैं कि कुण्डली में बुध, बृहस्पति और शुक्र ग्रहों के नीच और उच्च का होने से क्या लाभ और क्या नुकसान हैं। साथ ही हम आपको वो उपाय बताते हैं, जिसके ज़रिये आप ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पा सकते हैं।
बुध
जब कुण्डली में स्थित बुध ग्रह शुभ फल देता है, तो जातक को कम मेहनत के बाद भी ज़्यादा इनकम होता ही। साथ ही जिसकी कुण्डली में बुध उच्च है, उसकी बहन, बुआ और बेटी का जीवन अच्छे से व्यतीत होता है और सभी में आपसी प्रेम बना रहता है। बुध के शुभ फल देने से सम्बन्धित व्यक्ति बुद्धिमान होता है और बुद्धि के कारण व्यापार और नौकरी में उन्नति करता है, साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी काफ़ी आगे बढ़ता है।
परंतु यदि कुण्डली में बुध ग्रह नीच का यानि अशुभ फल दे रहा है, तो हमेशा बहन, बुआ और बेटी का सम्मान करें। जब भी यह घर में आएं, तो उन्हें कुछ ना कुछ देकर ही विदा करें। ज्योतिष की सलाह कि बुध के बुरे प्रभाव को निष्क्रिय करने के लिए घर में गाने बजाने का सामान ना रखें। घर में भगवान की मूर्ति रखने के बजाए उनकी तस्वीर की पूजा करें और पक्षियों को ना पालें। साथ ही शुद्ध शाकाहारी जीवन व्यतीत करें। छोटी कन्याओं के पूजन करने से भी बुध मजबूत होता है।
बृहस्पति
जब कुण्डली में बृहस्पति उच्च अवस्था का हो, तो वह सुख और सम्पन्नता देता है। कुण्डली में उच्च का बृहस्पति होने से सम्बन्धित जातक को अपने दादाजी से बहुत प्रेम और स्नेह मिलता है। बृहस्पति के शुभ प्रभाव से परिवार में बड़ों का सम्मान होता है और घर का माहौल धार्मिक और आध्यात्मिक रहता है। देखा गया है कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति के जीवन में पढ़ाई को लेकर कोई परेशानी उत्पन्न नहीं होती है।
लेकिन यदि कुण्डली में बृहस्पति नीच का है, तो उसके अशुभ होने से पढ़ाई में रूकावट पैदा होती है और घर में बड़े बुजुर्गों का सुख नहीं रहता है। बृहस्पति के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए बुजुर्गों का सम्मान करने के साथ-साथ साधु-सन्यासियों को भी मान-सम्मान दें। पीपल के पेड़ को पानी देने और मन्दिर में चने की दाल का दान करने से गुरु मजबूत बोता है। गले में सोने की चेन पहनने और दान करने से बृहस्पति प्रसन्न होते हैं।
शुक्र
कुण्डली में जब शुक्र जब उच्च स्थिति में होता है, तो सम्बन्धित व्यक्ति सुन्दर होता है और उसमें उत्साह और उमंग होता है। शुक्र के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को सैक्स में सम्पूर्ण सुख प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन सुखपूर्वक रहता है। शुक्र की स्थिति कुण्डली में मजबूत होने से जातक को घूमने-फिरने का शौक होता है, साथ ही वो साफ-सुथरे और सुन्दर घर का मालिक होता है।
लेकिन यदि कुण्डली में शुक्र कमजोर है, तो जातक को सुबह सही समय पर उठना चाहिए और घर के साथ-साथ खुद की भी साफ़ सफाई रखना चाहिए। शुक्र को प्रसन्न रखने के लिए पत्नी का सम्मान करें और उसे सौंदर्य प्रसाधन उपहार में दें। कुण्डली में शुक्र ग्रह के नीच होने पर सम्बन्धित व्यक्ति को मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए और गाय की सेवा करना चाहिए, साथ ही जातक यथासम्भव कोशिश करे कि वो काले और नीले रंग के वस्त्रों को ना पहने।