क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘फ़ायदे’ में होगी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार?
Monday - December 10, 2018 11:45 am ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘काफ़ी अहम’ हैं विधानसभा चुनावों के नतीज़े
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम लिखेंगे 2019 के लिए ‘महागठबंधन’ की ‘पटकथा’!
DEC 10 (WTN) – कल यानि कि मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीज़े आ रहे हैं। इन राज्यों के साथ ही तलेंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के परिणाम भी घोषित होंगे। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले इन राज्यों के चुनाव परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं कि आख़िर क्या जनादेश इन राज्यों से निकल कर सामने आता है। लेकिन यदि 2019 के लोकसभा चुनाव और भाजपा और कांग्रेस के लिहाज़ से बात करें तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजे इन दोनों ही पार्टियों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं और यही नतीज़े 2019 के लोकसभा चुनाव की पटकथा लिखेंगे।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे हिन्दी भाषी राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुक़ाबला है। कहा जा रहा है कि जो भी पार्टी इन तीनों राज्यों में से कम से कम दो राज्यों में जीत हासिल करेगी, वो पार्टी साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव लड़ेगी। लेकिन यदि हम कहें कि इन तीनों राज्यों में करारी हार से भाजपा और ख़ासकर नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में फ़ायदा मिलेगा, तो आप सोच में पड़ जाएंगे। लेकिन हम ऐसा क्यों कह रहे हैं आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस जानती है कि यदि नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में हराना है, तो सभी पार्टियों को मिलकर चुनाव लड़ना होगा। हाल के दिनों में विपक्षी दलों में एकजुटता देखने को मिली है और कहा जा रहा है कि सभी विपक्षी दल कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वो मोदी के ख़िलाफ़ बनने वाले महागठबंधन में शामिल हो जाए। लेकिन कांग्रेस कभी हां और कभी ना की स्थिति में है।
यदि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बुरी तरह से हरा दिया, तो इस जीत के बाद उसका आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ेगा और हो सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बिना किसी महागठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़े। क्योंकि कांग्रेस जानती है कि यदि गठबंधन में चुनाव लड़ा, तो एक तो चुनाव में जनता को समझना कठिन होगा और दूसरा कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में भी दिकक्त आएगी। वहीं महागठबंधन यदि जीतता है, तो प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टियों में तनातनी होगी। ऐसे में कांग्रेस यदि इन तीनों राज्यों में बुरी तरह से भाजपा को हरा देती है, तो कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वो बिना किसी गठबंधन के 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का सामना करने उतर सकती है।
लेकिन यदि कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार गई, तो कांग्रेस को अपनी कमज़ोर स्थिति का आंकलन हो जाएगा और फ़िर वो निश्चित तौर पर महागठबंधन का हिस्सा बनकर 2019 के चुनाव लोकसभा चुनाव में उतरेगी। और यदि ऐसा होता है, तो यह भाजपा और नरेन्द्र मोदी दोनों के लिए किसी बहुत बड़े ख़तरे से कम नहीं है। क्योंकि संयुक्त विपक्ष की ताकत गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में भाजपा देख चुकी है। जब उसे गोरखपुर जैसी सीट से हार का सामना करना पड़ा था जबकि गोरखपुर सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है।
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए यदि भाजपा चाहती है कि कांग्रेस किसी भी तरह के गठबंधन से दूर रहे और अकेले या फ़िर सिर्फ़ दो या तीन पार्टियों के साथ ही चुनाव लड़े, तो कांग्रेस के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए कांग्रेस का मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में जीतना जरूरी है। क्योंकि यदि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस हारी, तो वो हारकर गठबंधन करेगी ही। क्योंकि यदि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कांग्रेस, भाजपा को 15 सालों के बाद भी नहीं हरा पाती है तो कांग्रेस पार्टी कितनी कमजोर हो चुकी है इसका आंकलन उसे हो जाएगा और वो 2019 के लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की रिस्क नहीं लेगी।
वहीं राजस्थान जहां पर हर पांच साल में सरकार बदलती है, वहां पर भी यदि कांग्रेस हार गई तो कांग्रेस को अपनी अब तक की सबसे कमजोर स्थिति का आंकलन हो जाएगा कि वो अपने दम पर अभी भी भाजपा को नहीं हरा सकती है। ऐसे में वो मजबूर होकर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए महागठबंधन का हिस्सा बनेगी। और यदि ऐसा हुआ, तो भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण रुक जाएगा, और भाजपा के ख़िलाफ़ संयुक्त विपक्ष खड़ा होगा जिसकी ताकत भाजपा गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा चुनाव में देख चुकी है।
यदि इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस जीतती है, तो उसका आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ेगा क्योंकि इन तीनों ही राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई रैलियां की हैं और कांग्रेस जीत के बाद कह सकती है कि मोदी लहर को उसने हरा दिया। और इसी आत्मविश्वास के साथ हो सकता है कि वो 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़े, क्योंकि कांग्रेस को गठबंधन की राजनीति ज़्यादा रास नहीं आती है।
अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के क्या परिणाम रहते हैं। यदि भाजपा इन तीनों राज्यों में जीती, तो कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को किसी भी तरह से हराने के लिए महागठबंधन का हिस्सा बनेगी, और यदि हार गई तो हो सकता है की कांग्रेस आत्मविश्वास के कारण शायद महागठबंधन का हिस्सा ना बने। यह राजनीति है, कभी भी कुछ भी हो सकता है। इसलिए आगे-आगे देखिए, होता है क्या?
DEC 10 (WTN) – कल यानि कि मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीज़े आ रहे हैं। इन राज्यों के साथ ही तलेंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के परिणाम भी घोषित होंगे। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले इन राज्यों के चुनाव परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं कि आख़िर क्या जनादेश इन राज्यों से निकल कर सामने आता है। लेकिन यदि 2019 के लोकसभा चुनाव और भाजपा और कांग्रेस के लिहाज़ से बात करें तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजे इन दोनों ही पार्टियों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं और यही नतीज़े 2019 के लोकसभा चुनाव की पटकथा लिखेंगे।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे हिन्दी भाषी राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुक़ाबला है। कहा जा रहा है कि जो भी पार्टी इन तीनों राज्यों में से कम से कम दो राज्यों में जीत हासिल करेगी, वो पार्टी साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव लड़ेगी। लेकिन यदि हम कहें कि इन तीनों राज्यों में करारी हार से भाजपा और ख़ासकर नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में फ़ायदा मिलेगा, तो आप सोच में पड़ जाएंगे। लेकिन हम ऐसा क्यों कह रहे हैं आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस जानती है कि यदि नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में हराना है, तो सभी पार्टियों को मिलकर चुनाव लड़ना होगा। हाल के दिनों में विपक्षी दलों में एकजुटता देखने को मिली है और कहा जा रहा है कि सभी विपक्षी दल कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वो मोदी के ख़िलाफ़ बनने वाले महागठबंधन में शामिल हो जाए। लेकिन कांग्रेस कभी हां और कभी ना की स्थिति में है।
यदि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बुरी तरह से हरा दिया, तो इस जीत के बाद उसका आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ेगा और हो सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बिना किसी महागठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़े। क्योंकि कांग्रेस जानती है कि यदि गठबंधन में चुनाव लड़ा, तो एक तो चुनाव में जनता को समझना कठिन होगा और दूसरा कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में भी दिकक्त आएगी। वहीं महागठबंधन यदि जीतता है, तो प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टियों में तनातनी होगी। ऐसे में कांग्रेस यदि इन तीनों राज्यों में बुरी तरह से भाजपा को हरा देती है, तो कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वो बिना किसी गठबंधन के 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का सामना करने उतर सकती है।
लेकिन यदि कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार गई, तो कांग्रेस को अपनी कमज़ोर स्थिति का आंकलन हो जाएगा और फ़िर वो निश्चित तौर पर महागठबंधन का हिस्सा बनकर 2019 के चुनाव लोकसभा चुनाव में उतरेगी। और यदि ऐसा होता है, तो यह भाजपा और नरेन्द्र मोदी दोनों के लिए किसी बहुत बड़े ख़तरे से कम नहीं है। क्योंकि संयुक्त विपक्ष की ताकत गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में भाजपा देख चुकी है। जब उसे गोरखपुर जैसी सीट से हार का सामना करना पड़ा था जबकि गोरखपुर सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है।
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए यदि भाजपा चाहती है कि कांग्रेस किसी भी तरह के गठबंधन से दूर रहे और अकेले या फ़िर सिर्फ़ दो या तीन पार्टियों के साथ ही चुनाव लड़े, तो कांग्रेस के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए कांग्रेस का मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में जीतना जरूरी है। क्योंकि यदि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस हारी, तो वो हारकर गठबंधन करेगी ही। क्योंकि यदि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कांग्रेस, भाजपा को 15 सालों के बाद भी नहीं हरा पाती है तो कांग्रेस पार्टी कितनी कमजोर हो चुकी है इसका आंकलन उसे हो जाएगा और वो 2019 के लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की रिस्क नहीं लेगी।
वहीं राजस्थान जहां पर हर पांच साल में सरकार बदलती है, वहां पर भी यदि कांग्रेस हार गई तो कांग्रेस को अपनी अब तक की सबसे कमजोर स्थिति का आंकलन हो जाएगा कि वो अपने दम पर अभी भी भाजपा को नहीं हरा सकती है। ऐसे में वो मजबूर होकर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए महागठबंधन का हिस्सा बनेगी। और यदि ऐसा हुआ, तो भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण रुक जाएगा, और भाजपा के ख़िलाफ़ संयुक्त विपक्ष खड़ा होगा जिसकी ताकत भाजपा गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा चुनाव में देख चुकी है।
यदि इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस जीतती है, तो उसका आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ेगा क्योंकि इन तीनों ही राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई रैलियां की हैं और कांग्रेस जीत के बाद कह सकती है कि मोदी लहर को उसने हरा दिया। और इसी आत्मविश्वास के साथ हो सकता है कि वो 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़े, क्योंकि कांग्रेस को गठबंधन की राजनीति ज़्यादा रास नहीं आती है।
अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के क्या परिणाम रहते हैं। यदि भाजपा इन तीनों राज्यों में जीती, तो कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को किसी भी तरह से हराने के लिए महागठबंधन का हिस्सा बनेगी, और यदि हार गई तो हो सकता है की कांग्रेस आत्मविश्वास के कारण शायद महागठबंधन का हिस्सा ना बने। यह राजनीति है, कभी भी कुछ भी हो सकता है। इसलिए आगे-आगे देखिए, होता है क्या?