मध्य प्रदेश में यदि कांग्रेस जीती, तो राहुल गांधी के सामने ‘सीएम चुनना’ होगी बड़ी ‘चुनौती’
Monday - December 10, 2018 2:54 pm ,
Category : WTN HINDI
राहुल गांधी के सामने आने वाली हैं ‘चुनौतियां’!
बड़ा सवाल: यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस जीती, तो कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से सीएम पद के लिए किसे चुनेंगे राहुल गांधी?
DEC 10 (WTN) – कल यानि कि मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीज़े घोषित होने हैं। लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मध्य प्रदेश में जीत को लेकर है। यदि एक्ज़िट पोल पर विश्वास किया जाए, तो मध्य प्रदेश में 15 सालों के बाद कांग्रेस की सरकार बन रही है और भाजपा की हार हो रही है। यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने जीत हासिल की, तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए?
यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो राहुल गांधी के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए दो विकल्प होंगे। एक तरफ़ अनुभवी राजनेता और गांधी परिवार के वफ़ादार कमलनाथ, तो दूसरी तरफ़ युवा और जोशीले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया। मध्य प्रदेश में लगातार तीन बार से विधानसभा चुनाव हार रही कांग्रेस ने भाजपा को मात देने के लिए अनुभवी कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया, तो युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपी।
सबसे पहले बात करें कमलनाथ की, तो छिन्दवाड़ा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ इन्दिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश के ही नहीं, बल्कि वर्तमान में पूरे देश के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति पर और खासतौर से महाकौशल क्षेत्र में उनकी बढ़िया पकड़ है। कमलनाथ के समर्थक भी राज्य में काफ़ी तादात में हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि यदि कांग्रेस जीतती है, तो राहुल गांधी के सामने कमलनाथ मुख्यमंत्री के लिए सबसे बेहतरीन पसंद होंगे।
अब बात करते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया की, तो सिंधिया युवा नेता हैं और उनके पिता माधवराव सिंधिया राजीव गांधी के क़रीबी थे, तो वे खुद राहुल गांधी के क़रीबी हैं। युवाओं में सिंधिया की लोकप्रियता को देखते हुए ही राहुल गांधी ने उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपी। युवा होने और एक्टिव होने के कारण सिंधिया मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए लोगों की पसंद भी हैं। एक सर्वे में उन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज़्यादा लोगों ने पसंद किया। सिंधिया ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में काफ़ी लोकप्रिय हैं और उनकी छवि का फ़ायदा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मिल सकता है।
कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही नेता अपने-अपने क्षेत्रों में काफ़ी लोकप्रिय हैं और दोनों के समर्थक भी भारी तादात में हैं। लेकिन बात जब मुख्यमंत्री पद की आती है, तो कमलनाथ का पलड़ा भारी दिखाई देता है। जैसा कि आप जानते हैं कि कमलनाथ अनुभव के मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया से काफ़ी आगे हैं। कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के साथ राजनीति की है।
इतना ही नहीं, कमलनाथ इन्दिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं। कमलनाथ खुद कहते हैं कि इन्दिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं। अब ऐसे में जबकि कमलनाथ की गांधी परिवार से क़रीबी और अनुभव ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज़्यादा है, तो स्वाभाविक है कि राहुल गांधी को कमलनाथ को मुख्यमंत्री चुनने में किसी भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होना चाहिए।
लेकिन कमलनाथ को केन्द्र की राजनीति में ज़्यादा रूचि रही है और वे राष्ट्रीय स्तर के नेता रहे हैं। कहा जाता है कि यदि कांग्रेस मध्य प्रदेश में जीतती है और कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, और 2019 के लोकसभा चुनाव में यदि कांग्रेस केन्द्र में सरकार बनाती है, तो राहुल गांधी कमलनाथ जैसे अनुभवी नेता को केन्द्र में ले जाएंगे और राज्य की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंप देंगे।
मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से कौन मुख्यमंत्री बनेगा यह इस पर भी निर्भर करता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह किसका समर्थन करते हैं। यह सभी जानते हैं कि दिग्विजय सिंह हमेशा से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक विरोधी रहे हैं, और कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह पूरी कोशिश करेंगे कि सिंधिया मुख्यमंत्री ना बन सकें। ऐसे में साफ़ जाहिर होता है कि यदि कांग्रेस जीती, तो अनुभव, गांधी परिवार से क़रीबी और दिग्विजय सिंह से मौन समर्थन के चलते कमलनाथ का मुख्यमंत्री बनना तय है।
DEC 10 (WTN) – कल यानि कि मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीज़े घोषित होने हैं। लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मध्य प्रदेश में जीत को लेकर है। यदि एक्ज़िट पोल पर विश्वास किया जाए, तो मध्य प्रदेश में 15 सालों के बाद कांग्रेस की सरकार बन रही है और भाजपा की हार हो रही है। यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने जीत हासिल की, तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए?
यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो राहुल गांधी के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए दो विकल्प होंगे। एक तरफ़ अनुभवी राजनेता और गांधी परिवार के वफ़ादार कमलनाथ, तो दूसरी तरफ़ युवा और जोशीले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया। मध्य प्रदेश में लगातार तीन बार से विधानसभा चुनाव हार रही कांग्रेस ने भाजपा को मात देने के लिए अनुभवी कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया, तो युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपी।
सबसे पहले बात करें कमलनाथ की, तो छिन्दवाड़ा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ इन्दिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश के ही नहीं, बल्कि वर्तमान में पूरे देश के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति पर और खासतौर से महाकौशल क्षेत्र में उनकी बढ़िया पकड़ है। कमलनाथ के समर्थक भी राज्य में काफ़ी तादात में हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि यदि कांग्रेस जीतती है, तो राहुल गांधी के सामने कमलनाथ मुख्यमंत्री के लिए सबसे बेहतरीन पसंद होंगे।
अब बात करते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया की, तो सिंधिया युवा नेता हैं और उनके पिता माधवराव सिंधिया राजीव गांधी के क़रीबी थे, तो वे खुद राहुल गांधी के क़रीबी हैं। युवाओं में सिंधिया की लोकप्रियता को देखते हुए ही राहुल गांधी ने उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपी। युवा होने और एक्टिव होने के कारण सिंधिया मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए लोगों की पसंद भी हैं। एक सर्वे में उन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज़्यादा लोगों ने पसंद किया। सिंधिया ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में काफ़ी लोकप्रिय हैं और उनकी छवि का फ़ायदा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मिल सकता है।
कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही नेता अपने-अपने क्षेत्रों में काफ़ी लोकप्रिय हैं और दोनों के समर्थक भी भारी तादात में हैं। लेकिन बात जब मुख्यमंत्री पद की आती है, तो कमलनाथ का पलड़ा भारी दिखाई देता है। जैसा कि आप जानते हैं कि कमलनाथ अनुभव के मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया से काफ़ी आगे हैं। कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के साथ राजनीति की है।
इतना ही नहीं, कमलनाथ इन्दिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं। कमलनाथ खुद कहते हैं कि इन्दिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं। अब ऐसे में जबकि कमलनाथ की गांधी परिवार से क़रीबी और अनुभव ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज़्यादा है, तो स्वाभाविक है कि राहुल गांधी को कमलनाथ को मुख्यमंत्री चुनने में किसी भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होना चाहिए।
लेकिन कमलनाथ को केन्द्र की राजनीति में ज़्यादा रूचि रही है और वे राष्ट्रीय स्तर के नेता रहे हैं। कहा जाता है कि यदि कांग्रेस मध्य प्रदेश में जीतती है और कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, और 2019 के लोकसभा चुनाव में यदि कांग्रेस केन्द्र में सरकार बनाती है, तो राहुल गांधी कमलनाथ जैसे अनुभवी नेता को केन्द्र में ले जाएंगे और राज्य की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंप देंगे।
मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से कौन मुख्यमंत्री बनेगा यह इस पर भी निर्भर करता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह किसका समर्थन करते हैं। यह सभी जानते हैं कि दिग्विजय सिंह हमेशा से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक विरोधी रहे हैं, और कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह पूरी कोशिश करेंगे कि सिंधिया मुख्यमंत्री ना बन सकें। ऐसे में साफ़ जाहिर होता है कि यदि कांग्रेस जीती, तो अनुभव, गांधी परिवार से क़रीबी और दिग्विजय सिंह से मौन समर्थन के चलते कमलनाथ का मुख्यमंत्री बनना तय है।